भारत में कुश्ती को बढ़ावा देने के मकसद से आयोजित होने वाला प्रो रेसलिंग लीग का यह सीजन भी कामयाब रहा। इससे भारतीय पहलवानों ने न केवल विदेशों खिलाडि़यों से दांव-पेंच सीखा बल्कि उनकी कमजोरियों व खामियों के बारे में भी जाना।

रियाणा हैमर्स पेशेवराना कुश्ती के मुकाबले ‘प्रो रेसलिंग लीग’ का नया सुल्तान बन गया है। लीग के गत तीन सीजन की सिलसिलेवार खिताबी हार के बाद आखिरकार चौथा सीजन उसके लिए सौभाग्यशाली रहा। फाइनल मैच में उसने डिफेंडिंग चैम्पियन पंजाब रॉयल्स को 6-3 पटखनी दे दी। इस तरह पीडब्लूएल में खिताबी जीत की हैट्रिक लगाने के पंजाब रॉयल्स के सपने को चकनाचूर कर दिया। ग्रेटर नोएडा के गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी इंदोर स्टेडियम में खेला गया फाइनल मैच एक तरह से गत दो सीजन का दोहराव कहा जाएगा क्योंकि यह दोनों खिताबी मुकाबले भी इन्हीं दोनों टीमों के दरम्यान खेले गए। अलबत्ता पंजाब पिछले दो सीजन अपने नाम करने में कामयाब रहा था जबकि 2015 में हुए प्रो रेसलिंग लीग का पहला खिताब मुंबई ने जीता था। इस बार के फाइनल मुकाबले के नजीते पर गौर किया जाए तो ऐसा लगता है कि हरियाणा हैमर्स की टीम इसमें अपनी बादशाहत कायम करने के इरादे से ही उतरी थी। इस मैच में हरियाणा ने शुरू की पांच बाउट जीतकर अजेय बढ़त बना ली थी और पंजाब रॉयल्स के स्टार पहलवान बजरंग पूनिया के रिंग में उतरने से पहले ही खिताब अपने नाम कर लिया था। विजेता हरियाणा हैमर्स की तरफ से यूक्रेनी हैवीवेट पहलवान एलेक्जेंडर खोत्सिनिवस्की, बेलारूसी पहलवान अली शाबानोव, किरन, रवि कुमार और मोल्डोवा की अनास्तासिया निचिता ने अपने-अपने वर्ग के लगातार पांच मुकाबले जीतकर उसे 5-0 की अजेय बढ़त दिला दी थी। पंजाब रॉयल्स की जीत का सिलसिला 6वें बाउट से शुरू हुआ जब बजरंग पुनिया ने रजनीश को 11-0 के भारी अंतर से शिकस्त दे दी। अलबत्ता तब तक काफी देर हो चुकी थी और उसकी मैच में वापसी की तमाम उम्मीदें क्षीण हो चुकी थीं।

मात्र औपचारिकता बचे शेष बाउट में पंजाब रॉयल्स की तरफ से अमित धनकर और अंजू ने अपनी टीम की हार का अंतर कम किया। फिर अंतिम बाउट भी हरियाणा हैमर्स की टीम से आजरबैजान की खिलाड़ी तात्याना अमेल्चेनको ने जीत लिया। इस तरह यह खिताबी जंग हरियाण हैमर्स ने 6-3 से जीत ली। काबिलेजिक्र है कि प्रो रेसलिंग लीग के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में पंजाब रॉयल्स ने यूपी दंगल की टीम को कांटे की टक्कर में 5-4 से शिकस्त देकर फाइनल में प्रवेश किया था। जबकि दूसरे सेमीफाइनल में हरियाण हैमर्स ने दिल्ली सुल्तान्स पर 6-3 की जीत दर्ज की थी। लीग के तमाम मैचों की बात की जाए तो फाइनल में पहुंचने वाली दोनों ही टीमों का प्रदर्शन काफी शानदार रहा। अंक तालिका में हरियाणा हैमर्स और पंजाब रॉयल्स की टीमें पांच-पांच मुकाबलों में जीत और दो-दो की हार के साथ 10 प्वाइंट हासिल कर बराबरी थीं। अलबत्ता विदेशी और स्वदेशी खिलाडि़यों का शानदार मिश्रण लिए हरियाणा हैमर्स की टीम इस बार पंजाब रॉयल्स से बीस साबित हुई। टीम में कुल पांच खिलाड़ी स्वदेशी तो वहीं चार विदेशी खिलाड़ी थे।

जबकि दिल्ली सुल्तान्स, एमपी योद्धा, यूपी दंगल और मुंबई महारथी की टीमों को लीग समाप्त होने तक 4-4 अंकों से संतोष करना पड़ा। काबिलेजिक्र है कि हर टीम में नौ खिलाड़ी होते हैं, लेकिन लीग के पहले राउंड में केवल सात खिलाडि़यों के बीच ही मुकाबला होता है। इनमें से टीमें अपनी मर्जी से किन्हीं दो वर्गों के बाउट को ब्लॉक अर्थात उनके मुकाबले को निकाल सकती हैं। खिलाडि़यों के लिहाज से पंजाब रॉयल्स म बजरंग पूनिया, दिल्ली सुल्तान्स में साक्षी मलिक, मुंबई महारथी में विनेश फोगाट और एमपी योद्धा में पूजा ढांडा जैसे स्टार पहलवानों की मौजूदगी रही। इसके अलावा एलेक्जेंडर खोत्सिनिवस्की, अली शाबानोव, अनास्तासिया निचिता, तात्याना अमेल्चेनको, इब्रागीम इलियासोव, मिमी हरित्सोवा, वेस्कान सिंथिया, हाजी अलीयेव, कैथरीना जिडाचिविस्का जैसे कई ऐसे विदेशी पहलवानों की मौजूदगी रही जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी ख्याति दर्ज करा चुके हैं। ऐसे में देखा जाए तो भारत में कुश्ती को बढ़ावा देने के मकसद से आयोजित होने वाला प्रो रेसलिंग लीग का यह सीजन भी कामयाब रहा। इससे भारतीय पहलवानों ने न केवल विदेशी खिलाडि़यों से दांव-पेंच सीखा बल्कि उनकी कमजोरियों व खामियों के बारे में भी जाना। इस तरह ये भारतीय पहलवानों को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्लेटफार्म मुहैया कराता है जहां वह अपने हुनर का प्रदर्शन करने के साथ ही विदेशी पहलवानों से नए-नए गुर भी सीखते हैं।

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