विदर्भ ने केरल को और सौराष्ट्र ने कर्नाटक को हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।

खिताबी जीत अपने-आप में ही एक बड़ी उपलब्धि है। फिर यह सफलता अगर अपने पिछले खिताब की रक्षा करते हुए हासिल की जाए तो और महत्वपूर्ण हो जाती है। इस लिहाज से विदर्भ की टीम का रणजी ट्रॉफी जीतना काफी अहम हो जाता है। विदर्भ ने सौराष्ट्र की टीम को फाइनल मैच में हराकर रणजी ट्रॉफी लगातार दूसरी बार अपने नाम कर ली है। रणजी ट्रॉफी के अब तक के इतिहास में यह कारनामा अंजाम देने वाली विदर्भ 6वीं टीम बन गई है।
इससे पूर्व केवल मुंबई, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और दिल्ली ही रणजी ट्रॉफी दो बार अपने नाम कर सकी हैं। इस जीत से विदर्भ ने साबित किया कि रणजी ट्रॉफी 2017-18 की खिताबी जीत उसे अनायास ही नहीं मिली थी। नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन ग्राउंड में खेले गए फाइनल मैच में विदर्भ की टीम ने पहली पारी में 312 रन बनाए। इसके जवाब में सौराष्ट्र की टीम ने जब 307 रन स्कोर किए तो लगा कि मुकाबला काफी कांटे का है। सौराष्ट्र की इस पारी में स्निल पटेल ने शानदार शतकीय पारी (102) खेली। फिर दूसरी पारी में विदर्भ की टीम 200 रन ही बना सकी और सौराष्ट्र के सामने जीत के लिए 206 रनों का लक्ष्य रखा। विदर्भ की तरफ से 49 रनों के साथ आदित्य सरवटे टॉप स्कोरर रहे। एक तरह से काफी सामान्य सा दिखाई देने वाला यह लक्ष्य सौराष्ट्र की टीम के लिए पहाड़ जैसा स्कोर साबित हुआ और उसकी पूरी टीम मैच के पांचवें दिन पहले ही सत्र में महज 127 रनों पर ही ढेर हो गई। इस तरह विदर्भ ने फाइनल मैच 78 रनों से जीत लिया। विदर्भ की इस जीत में आदित्य सरवटे हीरो रहे जिन्होंने दोनों पारियों की कुल 20 विकटों में से 157 रन देकर 11 विकेट अपने नाम किए। इस आलराउंडर प्रदर्शन की बदौलत उन्हें मैच आॅफ दि मैच के अवार्ड से नवाजा गया। फाइनल मैच की अगर बात की जाए तो सौराष्ट्र की तरफ से खेलने वाले अनुभवी बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा पर लोगों की निगाहें टिकी हुई थीं लेकिन वह पूरी तरह नाकाम रहे।
उनकी असफलता का खामियाजा सौराष्ट्र को भुगतना पड़ा और तीसरी बार भी रणजी ट्रॉफी चैम्पियन बनने का उसका सपना चकनाचूर हो गया। गौरतबल है कि सौराष्ट्र इससे पहले भी 2012-13 और 2015-16 का फाइनल हारकर इस खिताबी जीत से वंचित रह चुका है। इसी तरह विदर्भ की तरफ से खेलते हुए टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर भी फाइनल मैच की दोनों पारियों में कुछ विशेष नहीं कर सके। अलबत्ता पूरे टूर्नामेंट में इस 41 वर्षीय खिलाड़ी का बल्ला खूब चला। रणजी के इस सीजन में उन्होंने 11 मैचों में 69.13 की औसत से कुल 1037 रन बनाए। इसमें उनके चार शतक और दो अर्द्धशतक शामिल हैं। उत्तराखंड की टीम के विरुद्ध उन्होंने 206 रनों की शानदार पारी खेली। जाफर रणजी ट्रॉफी के दो अलग-अलग सीजन में एक हजार रन बनाने वाले और 11 हजार रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं। इसके साथ ही वसीम जाफर 10 बार फाइनल मैच जीतने वाली टीम का हिस्सा बने।
जाफर के अलावा विदर्भ की तरफ से कप्तान फैज फजल (752 रन) और अक्षय वाडेकर (725 रन) सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहे। गेंदबाजी में आदित्य सरवटे ने पूरे सीजन में कुल 55 विकेट चटकाए। टीमों के प्रदर्शन पर अगर गौर किया जाए तो कभी रणजी की दिग्गज माने जाने वाली मुंबई, दिल्ली और महराष्ट्र की टीमें कुछ खास नहीं कर सकीं। नॉकआउट दौर में गुजरात को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचने वाली केरल पहली टीम थी, जबकि राजस्थान को हराकर कर्नाटक ऐसा करने वाली दूसरी टीम बनी। इनके अलावा विदर्भ ने उत्तराखंड और सौराष्ट्र ने उत्तर प्रदेश को हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की। इनमें से विदर्भ ने केरल को और सौराष्ट्र ने कर्नाटक को हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।
इसी तरह खिलाडि़यों की अगर बात की जाए तो पुडुचेरी के पंकज सिंह ने सबसे ज्यादा 17 बार पांच या उससे अधिक विकेट लेने और इसी टीम के बल्लेबाज पारस डोगरा सबसे ज्यादा 8 बार दोहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड बनाया। वहीं मध्य प्रदेश के अजय रोहेरा ने डेब्यू मैच में सबसे अधिक रन (267) बनाने का तो विकेटकीपर के तौर पर नमन ओझा ने सबसे ज्यादा बल्लेबाजों को शिकार बनाने का घरेलू रिकॉर्ड बनाया। खिलाडि़यों के प्रदर्शन के अलावा रणजी ट्रॉफी का यह सीजन दिल्ली के गौतम गंभीर और सौराष्ट्र के कप्तान जयदेव शाह के रिटायरमेंट के लिए भी याद रखा जाएगा।

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