देशी-विदेशी प्रतिभावान खिलाडि़यों वाले आईएसएल के क्लब अब सवा सौ करोड़ की आबादी वाले हमारे मुल्क में भी फुटबॉल के उज्ज्वल भविष्य की आस जगा रहे हैं।

तकरीबन साढ़े पांच माह तक चले इंडियन सुपर लीग के महाकुंभ का आखिरकार समापन हो गया और 95 मैचों के बाद इसके नये सरताज का फैसला हुआ। बेंगलुरु एफसी आईएसएल का नया चैंपियन बन गया है। उसने एफसी गोवा को 1-0 से शिकस्त देकर यह खिताबी जंग जीत ली। इस तरह भारत के स्टार फुटबॉलर सुनील छेत्री की कप्तानी वाली बेंगलुरु की टीम अपनी दूसरी कोशिश में ही यह कारनामा अंजाम देने में सफल रही। वह लगातार दूसरी बार आईएसएल के फाइनल में पहुंची थी। तब उसे चेन्नईयन एफसी के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था। इसके बरक्स गोवा एफसी अपनी दो कोशिशों के बाद भी आईएसएल का ताज अपने नाम करने से चूक गई। संयोगवश उसे भी 2015 में चेन्नईयन के हाथों ही परास्त होना पड़ा था। मुंबई फुटबॉल एरिना के मैदान में खेले गए रोचक फाइनल मुकाबले में निर्धारित 90 मिनट के खेल में दोनों टीमें 0-0 के स्कोर के साथ बराबरी पर थीं।
अतिरिक्त समय तक खिंचे इस मैच में एक वक्त लगा कि खिताब का फैसला पेनॉल्टी शूटआॅउट के जरिए होगा लेकिन मैच के 116वें मिनट में राहुल भेके के शानदार हेडर के जरिए किए गए गोल की बदौलत बेंगलुरू एफसी ने हीरो इंडियन सुपर लीग के पांचवें संस्करण का खिताब जीत लिया। इससे पूर्व एटलिको डि कोलकाता और चेन्नईयन इस खिताब पर दो-दो बार कब्जा जमा चुके हैं। दरअसल मिडफील्डर अहमद जाहो को मैच के अतिरिक्त समय के पहले हॉफ से ठीक पहले दिखाए गए दूसरे पीले कार्ड के सबब से गोवा की टीम को 10 खिलाडि़यों पर खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा। गोवा के लिए एक और बड़ा झटका उनके कप्तान मंदरराव देसाई को हैमस्ट्रिंग चोट की वजह से मैच के 45वें मिनट में बाहर जाने के रूप में लगा। इसका फायदा उठाते हुए राहुल भेके ने डमास डेलगाडो के कॉर्नर पर विजयी गोल दाग दिया। इस सीजन में बेंगलुरु की यह गोवा पर मुसलसल तीसरी जीत थी।
बहरहाल दोनों टीमों के दरमियान खेले गए इस खिताबी मुकाबले का दोनों हॉफ गोल रहित रहा। इससे पूर्व दो चरणों में खेले गए सेमीफाइनल मैचों के पहले चरण में बेंगलुरू एफसी की टीम को नार्थ ईस्ट यूनाईटेड के हाथों 2-1 से परास्त होना पड़ा था लेकिन दूसरे चरण में बेंगलुरू की टीम ने उन्हें 3-0 से हरा दिया। इस तरह 4-2 के औसत से बेंगलुरू एफसी ने फाइनल में जगह बनाई। वहीं गोवा और मुंबई सिटी के दरमियान खेले गए दूसरे सेमीफाइनल का पहला मैच गोवा ने 5-1 से जीता। जबकि दूसरे मैच में उसे मुंबई सिटी के हाथों 1-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस तरह गोवा 5-2 के औसत के साथ फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम रही। इससे इतर अगर लीग मैचों की बात करें तो उन्हें देखकर लगा कि भारतीय फुटबॉल तरक्की पर हैं। आईएसएल के 88वें मैच तक टूर्नामेंट की 10 टीमों में से 6 टीमें प्लेआॅफ की रेस में बनी हुई थीं। कोलकाता और जमशेदपुर की टीमों ने भी प्लेआॅफ के लिए क्वालिफाई करने की अपनी संभावनाएं बरकरार रखी थीं लेकिन लीग के अंतिम चरण में मुंबई सिटी और नार्थईस्ट यूनाईटेड के उदय से उनकी उम्मीदें क्षीण हो गईं। युवा टीम होने के नाते डेल्ही डायनामोज कोई खास करिश्मा तो नहीं दिखा सकी लेकिन ऊर्जावान टीम होने के नाते उसके लिए आगे अच्छी संभावनाएं हैं।
केरल ब्लास्टर्स और एफसी पुणे शुरुआती झटकों से उबरने में नाकाम रहीं तो वहीं दो बार आईएसएल खिताब जीतने वाली चेन्नईयन ने खराब प्रदर्शन से अपने प्रशंसकों को मायूस किया। गत चैम्पियन चेन्नईयन इस बार अंक तालिका में सबसे नीचे दसवें नंबर पर रही। इसी तरह अगर खिलाडि़यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो टूर्नामेंट में 16 गोल के साथ गोवा के खिलाड़ी फेरान कोरोमिनास टॉप स्कोरर रहे। यह अलग बात है कि फाइनल मैच में यह स्पैनिश फुटबॉलर कोई करिश्मा करने में नाकाम रहा। वहीं नार्थईस्ट यूनाईटेड के बार्थोलोमिव ओगबेचे और मुंबई सिटी के मोदोव साउगोव 12-12 गोल के साथ संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर रहे, जबकि बेंगलुरू एफसी के कप्तान सुनील छेत्री ने 9 गोल दागे। इस तरह देखा जाए तो देशी-विदेशी प्रतिभावान खिलाडि़यों वाले यह क्लब अब सवा सौ करोड़ की आबादी वाले हमारे मुल्क में भी फुटबॉल के उज्ज्वल भविष्य की आस जगा रहे हैं।

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