खे लोगे तो खिलोगे- खेलों को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिया हुआ यह मूलमंत्र है। प्रधानमंत्री का यह मूलमंत्र युवाओंको बहुत रास आ रहा है। हाल ही में सम्पन्न हुए खेलो इंडिया के दूसरे संस्करण-खेलो इंडियायूथ गेम्स में यही देखा गया। जिसमें पिछली बारके मुकाबले इस बार लोगों की दोगुनी भागीदारी रही। फिर चाहे इसमें शरीक खिलाडि़यों कीसंख्या हो या फिर कोच, सपोर्ट स्टॉफ, तकनीकि अधिकारियों और वालंटियर ही हो। हर लिहाज से इस बार का आयोजन खेलो इंडिया के पहले संस्करण से ज्यादा व्यापक और वृहद रहा।महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थित शिवछत्रपति स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में खेलो इंडियायूथ गेम्स-2019 का आयोजन किया गया।9-20 जनवरी तक चले इन खेलों में 5,925 खिलाडि़यों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया।जबकि पिछले साल तीन से साढ़े तीन हजारखिलाडि़यों ने ही हिस्सा लिया था। इस तरहयह राष्ट्रीय खेलों की तरह ही दूसरे मेगा खेलइवेंट के तौर पर उभर कर सामने आया है। पदक तालिका के लिहाज से देखा जाए तो महाराष्ट्र नेदेश के खेल मानचित्र पर विशेष पहचान रखने वाले हरियाणा को पछाड़ दिया है। महाराष्ट् र85 स्वर्ण पदक, 62 रजत पदक और 81कांस्य पदक के साथ कुल 228 पदक जीते। दूसरी ओर हरियाणा 178 पदकों के साथमहाराष्ट्र से पिछड़ जरूर गया लेकिन पहलवानी जैसे कई खेलों में उसने अपनी बादशाहत कायम रखी। वहीं 136 पदकों के साथ दिल्ली तीसरे स्थान पर रही। दिल्ली यह साबित करने में कामयाब रही कि खिलाडि़यों को बेहतर सुख सुविधा देकर उनके हुनर को निखारा जा सकताहै। देखा जाए तो ‘खेलो इंडिया’ का बुनियादी उद्देश्य भी यही है। पिछले साल ये खेल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संपन्न हुए थे। इस बार इसकी मेजबानी महाराष्ट्र ने की। राजधानी को छोड़करपुणे में इन खेलों को कराने का उद्देश्य छोटे शहरों और गांव-देहात के युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना है। खेल मेजबान होने के वैसे ही अपनेफायदे होते हैं। अपना मैदान व अपने लोगों केबीच खेलने जैसी अनुकूल परिस्थितियां होती हैं।खेलो इंडिया के जरिए खेल मंत्रालय देश के युवाओं को एक अंतरराष्ट्रीय स्तरका प्लेटफार्म मुहैया कराना चाहता है। इसीमकसद के तहत इस बार खेलो इंडिया स्कूल गेम्स को और विस्तार देकर इसे खेलो इंडिया यूथ गेम्स कर दिया गया। इसमें अंडर-17के साथ-साथ अंडर-21 का एक और वर्गजोड़ा गया, ताकि कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर के खिलाडि़यों को भी बढ़ावा दिया जासके। इस आयोजन की खास बात यह रहीकि इसमें स्वयं खेल मंत्री राज्यवर्द्धन सिंहराठौर समेत ओलंपियन गगन नारंग औरमैरी कॉम जैसे खिलाड़ी अपने ट्वीट संदेशों के जरिए खिलाडि़यों की हौसला अफजाई करते रहे। वहीं इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खिलाडि़यों की मौजूदगी ने चार चांद लगाया। 12 दिनों के इस आयोजन के सजीव प्रसारण और ‘पांच मिनट और’ के अभियान ने बच्चों में खेलों के लिए अत्यधिक लालसा जगाई।इससे उत्साहित होकर खेलो इंडिया के समापन अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ‘पांच मिनट और’ को बढ़ाकर अब स्कूलों में खेलों के लिए एक घंटे अनिवार्य किए जाने की अपनी वचनबद्धता जाहिर की है। इससे स्कूल स्तर पर खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें निखारने में मदद मिलेगी। उम्मीद कीजानी चाहिए कि खेलो इंडिया का अभियानसाल-दर-साल और व्यापक होता जाएगा। इसके जरिए हम चंद सालों में खेलों में अपनीअलग पहचान बनाने में सफल होंगे।

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