भारतीय क्रिकेट टीम के मध्यक्रम में विश्वसनीयता और निरंतरता का अभाव है। जो विश्व कप विजेता बनने के सपनों पर किसी ग्रहण से कम नहीं है।

देश में इन दिनों क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित लीग में से एक इंडियन प्रीमियर लीग खेली जा रही है। आईपीएल का ये बारहवां संस्करण है। इसमें देश और दुनिया के कई धुरंधर क्रिकेटर बल्ले और गेंद से अपना जौहर दिखा रहे हैं। इस बार का आईपीएल कई मायने में बेहद खास है। ऐसा माना जा रहा है कि 30 मई से इंग्लैंड में शुरू होने वाले क्रिकेट विश्व कप के लिए कई टीमों में खिलाडि़यों का चयन आईपीएल में किए गए प्रदर्शन के आधार पर होगा। इसलिए सभी क्रिकेटर दमदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं को आकर्षित करने की पुरजोर कोशिश करेंगे। भारतीय क्रिकेट टीम के नजरिए से देखा जाए तो टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करने वाले हर क्रिकेटर के लिए ये आईपीएल काफी अहम है। साल 2019 में आॅस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में वनडे सीरीज जीतकर टीम इंडिया ने बेहतरीन आगाज किया। लेकिन हाल ही में भारत और और आॅस्ट्रेलिया के बीच भारतीय सरजमीं पर खेली गई पांच एकदिवसीय मैचों की सीरीज को कंगारू टीम 3-2 से जीतने में सफल रही।
इस हार के लिए मध्यक्रम में बल्लेबाजों का लचर प्रदर्शन काफी हद तक जिम्मेदार रहा। मिडिल आॅर्डर में भारतीय चयनकर्ताओं ने जिन खिलाडि़यों पर दांव लगाया वह उलटा साबित हुआ। इससे मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने वाले क्रिकेटरों पर सवाल उठना लाजिमी है। टीम इंडिया जब आॅस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में वनडे सीरीज जीतने में सफल हुई तो मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने कहा था कि उन्होंने क्रिकेट विश्व कप के लिए भारतीय टीम का चयन कर लिया है। वहीं घरेलू वनडे सीरीज में आॅस्ट्रेलिया से हारने के बाद तिलमिलाए कप्तान विराट कोहली ने बयान दिया कि विश्व कप के लिए टीम तैयार है लेकिन इसमें एक या दो खिलाडि़यों का फेरबदल हो सकता है। ऐसे में एक दो खिलाड़ी कौन होंगे यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है? आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान टीम इंडिया के सिलेक्टर्स ने मध्यक्रम में जिन खिलाडि़यों को घरेलू सीरीज में मौका दिया उनमें अंबाती रायडू, केदार जाधव, विजय शंकर, रवींद्र जडेजा, ऋषभ पंत शामिल थे।
केदार जाधव और विजय शंकर कुछ मैचों में अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहे। वहीं अन्य क्रिकेटर्स ने टीम इंडिया को निराश किया। आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतिम दो मैचों में ऋषभ पंत को मौका दिया गया जो विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी में कुछ खास नहीं कर पाए। विश्व कप जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट के लिए टीम का चयन करते वक्त खिलाडि़यों के मौजूदा ट्रैक रिकॉर्ड को देखा जाता है। इसके अलावा टीम में शामिल किए जाने वाले उन खिलाडि़यों के उस देश में किए गए प्रदर्शन पर भी नजर डाली जाती है जहां विश्व कप खेला जाना है। साल 2018 में भारत और इंग्लैंड के बीच इंग्लिश सरजमी पर 3 वनडे मैचों की सीरीज खेली गई। इसमें टीम इंडिया को इंग्लैंड ने 2-1 से हराया था। इस दौरे पर टीम इंडिया में शामिल किए गए केएल राहुल कोई चमत्कारिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। वहीं साल 2018 के आईपीएल में 14 मैचों में एक शतक और पांच अर्धशतक के जरिए 684 रन बनाकर ऋषभ पंत दूसरे सबसे सफल बल्लेबाज रहे। लेकिन जब वनडे मैचों में चयन हुआ तो उनका बल्ला ज्यादातर खामोश रहा।
21 अक्टूबर 2018 से लेकर 13 मार्च 2019 तक ऋषभ पंत ने 5 वनडे मैचों की चार पारियों में महज 93 रन बनाए हैं। इस प्रकार साल 2019 में अंबाती रायडू ने 10 एकदिवसीय मैचों की 10 पारियों में 247 रन बनाए, जिन्हें असफल ही माना जाएगा। कुछ इसी तरह का लचर प्रदर्शन केएल राहुल का भी रहा। वहीं पिछले कुछ समय से रवींद्र जडेजा भी उस स्तर का प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं जिसके लिए वह जाने जाते हैं। केदार जाधव भी साल 2019 में 11 वनडे मैचों की 9 पारियों में 290 रन बनाकर औसत प्रदर्शन किया। हाल ही में टीम इंडिया के लिए वनडे मैचों में डेब्यू करने वाले आॅलराउंडर विजय शंकर भी 9 मैचों की 5 पारियों में 165 रन ही बना सके। इस तरह साल 2019 में टीम इंडिया का मध्यक्रम विश्वसनीयता और निरंतरता के अभाव से जूझता रहा।
इसके लिए टीम सिलेक्टर्स की मनमानी और गुटबाजी कम जिम्मेदार नहीं रही। जिसके भुक्तभोगी रैना हुए और 2018 में उन्हें केवल तीन मैचों के लिए टीम में शामिल किया गया। ऋषभ पंत, केदार जाधव, विजय शंकर, अंबाती रायडू, केएल राहुल, सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा ये सात खिलाड़ी मध्यक्रम के प्रबल दावेदार हैं। मिडिल आॅर्डर में आवश्यकता है दो या तीन की। लेकिन इन खिलाडि़यों के पिछले एक साल के प्रदर्शन पर गौर किया जाए तो इन्हें आउट आॅफ फॉर्म ही माना जाएगा जो कि विश्व कप के लिए चिंता का विषय है।

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