टीम इंडिया ने आॅस्ट्रेलिया दौरे के दौरान तीनों फॉर्मेट में अपना सिक्का जमाया। टेस्ट और वनडे सीरीज में पहली बार आॅस्ट्रेलिया को उसकी सरजमीन पर ही मात दी, तो टी-20 सीरीज में बराबरी की। अपने प्रदर्शन के बल पर टीम इंडिया ने विश्व कप के लिए भी अपनी मजबूत दावेदारी ठोक दी है।

 

टी म इंडिया के लिए आॅस्ट्रेलिया दौरे का इससे सुखद अंत भला और क्या हो सकता था! मेलबर्न में खेले गए आखिरी एकदिवसीय मैच में भारत ने आॅस्ट्रेलिया को 7 विकेट के भारी अंतर से मात दे दी। इसके साथ ही विराट कोहली एण्ड कंपनी ने आॅस्ट्रेलिया से तीन वनडे मैचों की श्रृंखला भी 2-1 से जीत ली। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए इस कम स्कोरिंग मैच में पहले युजवेंद्र चहल ने अपनी फिरकी पर कंगारुओं को छकाते हुए उन्हें महज 230 के स्कोर पर रोक दिया। चहल ने इस मैच में 42 रन देकर 6 विकेट लिए। इसके लिए उन्हें मैच आॅफ दि मैच के खिताब से नवाजा गया। ऐसा करके उन्होंने इसी मैदान पर अपने हमवतन अजीत आगरकर के 2004 में आॅस्ट्रेलिया के विरुद्ध बनाए गए रिकॉर्ड की बराबरी की। फिर बेहतरीन मैच फिनिशर के तौर पर जाने जाने वाले पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने केदार जाधव के साथ मिलकर टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाकर ही दम लिया। उन्होंने 114 गेंदों पर 87 रनों की सूझबूझ भरी पारी खेली। उनके अलावा केदार जाधव ने 57 गेंदों पर 61 रनों की पारी खेलकर उनका बखूबी साथ दिया। धोनी ने इस वनडे सीरीज में लगातार तीन अर्द्धशतक जड़कर साबित कर दिया कि उनमें अभी अब बहुत दम बाकी है। इससे पूर्व आॅस्ट्रेलिया ने सिडनी में खेले गए पहले वनडे मैच में टीम इंडिया को 34 रनों से हराकर 1-0 की बढ़त ले ली थी। उस मैच में रोहित शर्मा की शानदार शतकीय पारी (129 गेंदों पर 133 रन) बेकार गई। इस हार से विचलित हुए बिना टीम इंडिया ने वापसी करते हुए एडिलेड में खेला गया दूसरा वनडे 6 विकटों से जीत कर सीरीज में 1-1 से बराबरी कर ली। कप्तान कोहली शतकीय पारी के साथ इस जीत के हीरो रहे। फिर तीसरे वनडे में भारत ने इतिहास रच दिया। इससे पहले भारत आॅस्ट्रेलिया से उसकी सरजमीन पर कोई भी द्विपक्षीय एकदिवसीय श्रृंखला नहीं जीत सका था। अलबत्ता क्रिकेट के इस प्रारूप में भारत आॅस्ट्रेलिया को उसकी धरती पर 1985 में बेन्सन एण्ड हेजेज वर्ल्ड चैंपियनशिप आॅफ क्रिकेट और फिर 2008 में कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज में मात दे चुका है। दरअसल, वहां पर भारत और आॅस्ट्रेलिया के मध्य यह केवल दूसरी द्विपक्षीय एकदिवसीय सीरीज थी। इससे पूर्व भारत ने आॅस्ट्रेलिया में 2016 में द्विपक्षीय एकदिवसीय श्रृंखला खेली थी, जिसमें उसे 4-1 से हार का मुंह देखना पड़ा था। अगर भारत के इस दौरे की बात की जाए तो यह पूरा दौरा कई ऐतिहासिक सफलताओं से भरपूर रहा। पहले तीन मैचों की टी-20 सीरीज 1-1 से बराबर करने के बाद टीम इंडिया ने आॅस्ट्रेलिया को चार मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 से मात दी। इस तरह भारत ने वह करिश्मा कर दिखाया, जिसके लिए उसे 71 सालों का लंबा इंतजार करना पड़ा। यह भारत की आॅस्ट्रेलिया में उसके खिलाफ पहली टेस्ट सीरीज जीत थी। अब भारत ने आॅस्ट्रेलिया की सरजमीन पर उसे पहली बार वनडे सीरीज में भी शिकस्त दी। यानी क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट की सीरीज में उसका अजेय रहने का जो सिलसिला शुरू हुआ तो यह पराक्रम सबसे लंबे फॉर्मेट ‘टेस्ट मैचों’ से होता हुआ सीमित ओवर वाले मुकाबले तक जारी रहा। भारत टी-20 सीरीज भी जीतने में सफल हो जाता, अगर दूसरे मैच में बारिश ने उसकी उम्मीदों पर पानी नहीं फेरा होता। इस मैच में भारत आॅस्ट्रेलिया को 19 ओवर में महज 132 रनों पर रोक कर काफी मजबूत स्थिति में था। पूरे आॅस्ट्रेलियाई दौरे में भारत कोई भी सीरीज नहीं हारा। यह कारनामा अंजाम देने वाली टीम इंडिया दुनिया की पहली टीम बन गई है। खिलाडि़यों के प्रदर्शन के लिहाज से देखा जाए तो इसमें बल्लेबाजी के स्थापित खिलाडि़यों में कप्तान विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन और अजिंक्य रहाने ने जहां आवश्यकता के अनुसार महत्वपूर्ण योगदान दिया वहीं चेतेश्वर पुजारा का एक नया अवतार उभर कर सामने आया। उन्होंने टेस्ट मैचों में 74.4 की औसत से कुल 521 रन स्कोर किए और इस दौरान तीन शतक जड़े। उनके अलावा मयंक अग्रवाल, हनुमा विहारी और ऋषभ पंत की तिकड़ी ने भी भरोसा जगाया। श्रृषभ पंत ने टेस्ट सीरीज में जहां बल्ले से कमाल दिखाते हुए 350 रन बनाए, वहीं विकेट के पीछे भी अपने दस्ताने में 20 कैच लपककर खुद को धोनी के विकल्प के तौर पर विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया। इसी तरह गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और उमेश यादव की मौजूदगी ने टीम इंडिया को बेहतरीन पेस आक्रमण दिया तो चाइनामैन कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल ने बतौर स्पिनर अपना लोहा मनवाया।

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