पाकिस्तान की कट्टर जमातें देश को अस्थिर करने के लिए वर्ष भर नई-नई तरकीबें खोजने में जुटी रहती हैं। इसको रोकने के लिए देश की सीमाओं पर सेना और सुरक्षा बल लगातार अभियान चलाकर पाकिस्तानी मंसूबों को नेस्तनाबूद करने में जुटी रहती हैं। पाकिस्तान से लगने वाली राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और गुजरात की सीमाओं पर विशेष चौकसी के चलते जेहादी ताकतें घुसपैठ करने के लिए नेपाल से लगने वाली सीमा का उपयोग करना शुरू किया है। जब उन इलाकों पर भी सुरक्षा बलों की चौकसी तेज हुई, तो कट्टरपंथी ताकतें भारत में घुसपैठ करने और अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए नए रास्ते की तलाश की।

पूर्वोत्तर में यहां की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा से जेहादी गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। देश की दूसरी सीमाओं पर निगरानी और चौकसी बढ़ाने के बाद अब पूर्वोत्तर आतंकियों का नया ठिकाना बन रहा है।

यह रास्ता पूर्वोत्तर से होकर गुजरता है। उग्रवाद और विद्रोह की लंबे समय से मार झेल रहा पूर्वोत्तर एक बार फिर से जेहादी गतिविधियों के निशाने पर आ गया है। पूर्वोत्तर की सीमाएं मुख्य रूप से चीन, म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान से लगती हैं। जेहादी आतंकवादियों की घुसपैठ मुख्य रूप से बांग्लादेश के रास्ते त्रिपुरा, मेघालय और असम के जरिए हो सकती हैं। कारण, अंतरराष्ट्रीय सीमाएं इन राज्यों में खुली हैं। यही कारण है कि इस रास्ते भारत में कट्टरपंथी आतंकवादी आसानी से घुसपैठ कर सकते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती इन राज्यों में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के सामने उनकी भाषा बन कर आई है। इस इलाके में जेहादी आतंकवादियों को भाषा के आधार पर पकड़ना आसान है। इससे निपटने के लिए कट्टरपंथी आतंकवादी संगठन भारत के भटके हुए अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं और बांग्लादेश के युवाओं को अपना मोहरा बनाकर अपने मंसूबों को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसका खुलासा उस समय हुआ जब उत्तर प्रदेश की एटीएस ने 13 सितम्बर को कानपुर से असम के होजाई जिले के यमुनामुख निवासी एक युवक कमर-उज-जमान को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद एटीएस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी नए-नए तथ्य और भारत को अस्थिर करने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ।

जांच में पता चला कि गिरफ्तार कमर-उज-जमान हिजबुल मुजाहिदीन का कट्टर आतंकवादी है, जो कानपुर में बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। असम पुलिस की एक टीम हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी कमर से पूछताछ करने के लिए कानपुर पहुंची। उसके बाद हिजबुल मुजाहिदीन के असम को लेकर बनाए गए एक बड़े खतरनाक प्लान का पता चला। कमर से हुई गहन पूछताछ के आधार पर असम पुलिस ने उसके बड़े भाई सैफुल इस्लाम को गिरफ्तार किया। इस बीच पुलिस ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के कुल 7 कैडरों को गिरफ्तार कर लिया। जिनकी पहचान कमर का बड़ा भाई सैफुल इस्लाम, उमर फारूक, शाहिदुल आलम, शाहनवाज आलम, रियाजुद्दीन भुइंया, जयनाल अहमद और बहारुल इस्लाम शामिल हैं। इनसे जब गहन पूछताछ हुई तो पता चला कि हिजबुल मुजाहिद्दीन असम को इस्लामिस्तान यानी ‘असमिस्तान’ बनाने की एक बड़ी साजिश रची है।

इस बात का पता पिछले वर्ष गिरफ्तार किए गए जमात-ए-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के आतंकवादियों से हुई पूछताछ से भी चलता है। सूत्रों ने दावा किया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के भटके युवाओं को धर्म के नाम पर भ्रमित कर उन्हें असम को असमिस्तान बनाने का झांसा देकर अपने साथ मिलाकर भारत को तोड़ने की खतरनाक साजिश में शामिल कर रहे हैं। यह सिलसिला असम में काफी समय से चल रहा है। लेकिन जमीन पर ऐसी कोई भी गतिविधि देखने को नहीं मिलती जिससे यह पता लग सके कि जेहादी तंजीमे असम में सक्रिय हैं।

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कमर का एक फोटो वायरल हुआ। इसमें वह एके-47 राइफल अपने हाथों में लिए हुए था। बाद में पता चला कि वह हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया है। हिज्ब की गतिविधियों को असम में फैलाने का मास्टर माइंड कमर ही था। कमर के बारे में पता चला है कि वह शुरुआत में एक मोबाइल की दुकान चलाता था। बाद में वह कपड़े के व्यवसाय में उतर गया। इसी सिलसिले में वह कश्मीर पहुंचा, जहां पर वह हिजबुल मुजाहिदीन के संपर्क में आया। आरंभ में वह अपने घर आता-जाता रहता था। लेकिन 2017 में अचानक वह गायब हो गया। उसके परिजनों ने यमुनामुख थाना और कश्मीर के एक थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

गीताश्रम को उड़ाने की साजिश

कमर-उज-जमान का घनिष्ठ सहयोगी गिरफ्तार उमर फारूक को एक बड़ी खतरनाक जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पता चला है कि उमर फारूक पेशे से मीना बाजार में काम करता था। जबकि वह एक कट्टर हिजबुल आतंकवादी है। हिजबुल मुजाहिद्दीन ने गीताश्रम को उड़ा कर पूर्वोत्तर में अपनी उपस्थिति का एहसास कराने की योजना तैयार की थी। ज्ञात हो कि होजाई जिले में स्थित गीताश्रम महज एक नाम नहीं है। यहां पर पूर्वोत्तर स्तर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सभी बड़े कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इसलिए इसका महत्व काफी अधिक है। गीताश्रम आरएसएस के अनुषांगिक संगठन संस्कार मंदिर प्रकल्प का एक संस्थान है।

इस बीच उसका फोटो जब सोशल मीडिया में वायरल हुआ तो असम पुलिस तुरंत हरकत में आ गई और उसको पकड़ने के लिए एक टीम का गठन किया गया। इस बीच कमर की मां ने कहा कि अगर उसका बेटा आतंकवादी बन गया है, तो पुलिस उसे मार कर उसे कुत्ते-बिल्लियों को खिला दे। उसे अपने बेटे का शव भी नहीं चाहिए। जांच में यह पता चला है कि 2017 के बाद भी कमर होजाई जिले के यमुनामुख में आता-जाता रहा है। यह दूसरी बात है कि वह अपनी मां से नहीं मिल पाया। लेकिन अपने भाइयों से वह जरूर मिला है। कमर के पांच भाई हैं। इसलिए उसके भाइयों पर भी शक की सुई मंडरा रही है। असम में गिरफ्तार सात हिजबुल आतंकवादियों से पुलिस गहराई से जांच में जुटी है। पूछताछ के लिए यूपी एटीएस की टीम और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम भी इसमें लगी हुई है। पूछताछ में पता चला है कि हिजबुल मुजाहिदीन की गतिविधियां असम और उससे सटे मेघालय राज्य में भी सक्रिय हैं। हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद असम पुलिस पूरी तरह से सतर्क हो गई है। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और पुलिस महानिदेशक कुलधर सैकिया ने कहा है कि राज्य में बढ़ रही जेहादी गतिविधियों के खतरे के प्रति सरकार और प्रशासन पूरी तरह से सचेत है।

इसको नाकाम करने के लिए सभी तरह के आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस महानिदेशक ने कहा है कि हिजबुल मुजाहिदीन से संबंधित मामले की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी होजाई पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है। वह पूरी तल्लीनता के साथ मामले को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अपनी टीम के साथ जुटे हुए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि गिरफ्तार हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों से जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे हिज्ब के और समर्थकों की गिरफ्तारी सुनिश्चित हो पाएगी।

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