इस बार मध्य प्रदेश विधानसभा का चुनाव काफी दिलचस्प होने जा रहा है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर दिखाई पड़ रही है। दिल्ली की सर्वे एजेंसी सेंटर फॉर इलेक्शन मैनेजमेंट एंड कम्यूनिकेशन (सीईएमसी) के ताजा सर्वे में शिवराज सिंह चौहान की सत्ता हिलती दिख रही है। लेकिन इसी सर्वे में ये भी साफ साफ देखा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जलवा अभी भी बरकरार है और वही शिवराज सिंह चौहान को दोबारा मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी करा सकते हैं। इस सर्वे के मुताबिक यद्यपि कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी का वोट शेयर महज एक फीसदी कम है, लेकिन सीटों के मामले में बीजेपी को 2013 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले भारी नुकसान हो रहा है। हालांकि वोट शेयर ें मामूली रूप से पिछड़ने के बावजूद वो सत्ता की दौड़ में बनी हुई है। इस सर्वे में 42 फीसदी लोगों ने कांग्रेस को और 41 फीसदी लोगों ने बीजेपी को अपनी पहली पसंद बताया है। इस आंकड़े को सीटों में तब्दील करने पर बीजेपी को 112, कांग्रेस को 114 और अन्य को 4 सीटें मिलती दिख रही हैं। अगर 2013 के आंकड़े देखे जाएं तो तब बीजेपी को 44.88 फीसदी वोट शेयर के साथ 165 सीटों पर और कांग्रेस को 36.38 फीसदी वोट शेयर के साथ 58 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं बीएसपी को 4 और अन्य को 3 सीटें मिली थीं। इस लिहाज से देखा जाए तो इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास सरकार बनाने का बेहतरीन मौका है। लेकिन ये स्थिति भी तभी तक की है, जबतक कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य में चुनाव प्रचार में नहीं उतरते। ऐसा कहना इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि यहां प्रधानमंत्री की लोकप्रियता अभी भी बरकरार है और अन्य दलों के शीर्ष नेता उनकी लोकप्रियता के मुकाबले काफी पीछे नजर आ रहे हैं। इस सर्वे में शामिल 48 फीसदी लोगों ने 2013 में बीजेपी को वोट दिया था, लेकिन इनमें से लगभग सात फीसदी लोग इस बार बीजेपी से नाराज हैं और वे अपना वोट बीजेपी को नहीं देना चाहते। सात फीसदी लोगों की बीजेपी से नाराजगी का सीधा फायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है। हालांकि इस सर्वे में ये भी पता चल रहा है कि कांग्रेस बीजेपी से नाराज सभी लोगों को अपने साथ ला पाने में सफल नहीं हो सकी है। सर्वे से पता चलता है कि बीजेपी से नाराज होने वाले लोगों में से आधे से भी कम लोग कांग्रेस के पाले में खिसके हैं। इस सर्वे में शामिल 39 फीसदी लोगों ने, जिन्होंने 2013 में भी कांग्रेस को वोट दिया था, वो इस बार भी पार्टी के ही साथ हैं, जबकि बीजेपी से छिटके लोगों में से तीन फीसदी लोग कांग्रेस के पाले में जाते दिख रहे हैं। साफ है कि बीजेपी से नाराज शेष चार फीसदी लोगों को अपनी ओर खींच पाने में कांग्रेस अभी भी सफल नहीं हो सकी है। कांग्रेस को पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी का खामियाजा भी उठाना पड़ रहा है। सर्वे में शामिल हुए 51 फीसदी लोगों का मानना है कि कांग्रेस में चल रही गुटबाजी का बीजेपी को चुनाव के दौरान लाभ मिलेगा। इसी तरह कांग्रेस का मायावती की पार्टी बीएसपी के साथ गठबंधन न होने का साफ असर भी सर्वे में साफ साफ दिख रहा है। 56 फीसदी लोगों का मानना है कि कांग्रेस को चुनाव में गठबंधन नहीं हो पाने का नुकसान होगा। मुख्यमंत्री की पहली पसंद के तौर पर कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया बाजी मारते हुए दिख रहे हैं। प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री के रूप में 32 फीसदी लोगों ने उन्हें अपनी पहली पसंद माना है, जबकि मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को महज 28 फीसदी लोगों का ही साथ मिल सका है। मुख्यमंत्री के रूप में तीसरे दावेदार कांग्रेस के कमलनाथ बने हैं। वे 12 फीसदी लोगों की पहली पसंद हैं, जबकि बीजेपी के कैलाश विजयवर्गीय 7 फीसदी लोगों की पहली पसंद होने के साथ मुख्यमंत्री की दौड़ में चौथे नंबर पर दिख रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता में गिरावट बीजेपी के लिए विधानसभा चुनाव के दौरान काफी नुकसानदेह साबित हो सकती है। प्रदेश में कामकाज और रोजगार की स्थिति के मामले में भी शिवराज सिंह चौहान के प्रति लोगों में नाराजगी दिख रही है। सर्वे में शामिल 38 फीसदी लोग सरकार के कामकाज से खुश नहीं हैं। हालांकि 30 फीसदी लोग शिवराज सरकार के पिछले 15 साल के कामकाज को अच्छा बता रहे हैं, जबकि 32 फीसदी लोग सरकार के कामकाज को ठीक ठाक मानते हैं। इसी तरह रोजगार मुहैया कराने के मुद्दे पर भी सरकार लोगों की आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी है। 28 फीसदी लोगों का मानना है कि सरकार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में असफल रही है। मुद्दा के रूप में भी ये लोग बेरोजगारी को अहम मानते हैं। वहीं 20 फीसदी लोग किसानों के मुद्दों को, जबकि 19 फीसदी लोग विकास को सबसे बड़ा मुद्दा मान रहे हैं। 16 फीसदी लोगों की नजर में महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा है, जबकि 9 फीसदी लोग भ्रष्टाचार को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा मान रहे हैं। इस सर्वे से साफ है कि मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू बरकरार है। उनकी लोकप्रियता पार्टी से भी अधिक है। 57 फीसदी लोग मानते हैं कि 2019 के आम चुनाव के बाद मोदी ही देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। वहीं राहुल गांधी को 19 फीसदी लोगों ने, मायावती को 8 फीसदी लोगों ने और ममता बनर्जी को महज सात फीसदी लोगों ने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पहली पसंद माना है। मध्यप्रदेश के लोग भले ही पंद्रह साल से चल रही शिवराज सिंह की सरकार से बहुत ज्यादा खुश नहीं हैं, लेकिन वो 2019 में केंद्र में बीजेपी की ही सरकार चाहते हैं। 54 फीसदी लोगों का मानना है कि 2019 में केंद्र में बीजेपी की ही सरकार बनेगी। वहीं 27 फीसदी लोग मिली-जुली सरकार की बात कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस की सरकार के पक्ष में महज 19 फीसदी लोग ही हैं। सीईएमसी का ये सर्वे 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर 2018 के बीच किया गया। इसमें मध्य प्रदेश के सभी 52 जिलों को शामिल किया गया है। इस सर्वे का सैम्पल साइज 5245 है।

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