कृषि कुंभ का क्या उद्देश्य था ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की कोशिश में है। ये लक्ष्य किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का प्रशिक्षण देकर ही हासिल किया जा सकता है। कृषि कुंभ का यही प्रयास है। इसमें कृषि और इससे जुड़े विभागों के कार्यों का समन्वय किया गया है। कुल मिलाकर यह आयोजन नीति निर्धारण और कृषि विज्ञान को संतुलित करने का आयोजन रहा।

 किसानों के लिए ये कितना लाभकारी होगा?

70 साल तक किसानों के लिए ऐसा आयोजन कभी नहीं हुआ। प्रदेश सरकार ने पहली बार इस दिशा में प्रयास किया है। इसके अच्छे परिणाम आएंगे। किसान जागरूक होगा। उसकी आर्थिक स्थित भी मजबूत होगी।

 किसानों के लिए कोई विशेष घोषणा जो इस आयोजन में की गयी हो?

निजी क्षेत्र में यदि कोई अपनी जमीन पर मंडी खोलना चाहता है तो सरकार उसे लाइसेंस देगी। कोल्ड स्टोर मालिक भी अपनी मंडी खोल सकेंगे। इनसे कोई मंडी शुल्क नहीं लिया जाएगा। लाइसेंस फीस एक लाख से घटाकर 10 हजार रुपये कर दी गई। कोई कृषक उत्पादक संघ (एफपीओ) यदि एक साल पहले से रजिस्टर्ड है, तो बीज प्रसंस्करण इकाई और गोदाम के लिए 60 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। उनको 500 टन तक का गोदाम बनाने के लिए सरकार सहायता देगी। पहले चरण में ऐसे सौ एफपीओ को अनुदान दिया जाएगा।

 ऐसे आयोजन को निचले स्तर तक पहुंचाने के लिए क्या प्रयास किया जा रहा है?

15 दिसंबर तक सभी 69 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) पर कृषि मेले लगाए जाएंगे। इसके अलावा कई नए केवीके खुल रहे हैं। सरकार ने हर जिले में कृषि मेला लगाने का निर्णय लिया है।

 कृषि संयत्रों पर किस प्रकार का अनुदान दिया जा रहा है?

हमारी सरकार ने आठ कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया है। इन यंत्रों में से एक की खरीद पर 50 फीसदी और तीन यंत्र खरीदने पर 80 फीसदी अनुदान मिलेगा। लाभ लेने के लिए किसानों को यंत्र खरीदने के बाद पोर्टल पर रसीद अपलोड करनी होगी। रोटावेटर, जीरो सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, हैपी सीडर, मल्चर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर, श्रव मास्टर, रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ खरीदने पर यह लाभ मिलेगा।

 कृषि की दृष्टि से पिछड़े जिलों के लिए कोई विशेष योजना?

कृषि विकास दर के लिहाज से पिछड़े सात जिलों चंदौली, सोनभद्र, श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर, फतेहपुर और चित्रकूट के लिए विशेष योजनाएं तैयार होंगी। यहां के किसानों को अनुदान योजनाओं का अधिक लाभ मिलेगा।

 जैविक खेती को लेकर सरकार अभी क्या कर रही है?

हमीरपुर जनपद को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रखा गया है। 13 जनपदों में 75 क्लस्टर पर 50-50 एकड़ विकसित किये जाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार इसे बढ़ावा देने के लिए सजग है। किसानों को इसके प्रति उत्साहित किए जाने की अवश्यकता है।

 कृषि विज्ञान केन्द्रों की प्रदेश में क्या हालत है?

मौजूदा समय में उन्नत खेती के लिए कृषि विज्ञान केन्द्रों का महत्व बढ़ गया है। पूरे प्रदेश में स्थापित होने वाले 20 केन्द्रों की भारत सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद उसमें से 18 केन्द्रों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को प्रस्ताव भेजा गया है। निरीक्षण के बाद 11 केन्द्रों पर सहमति मिल गयी है। 5 की कार्यवाही प्रक्रिया में है। इलाहाबाद और श्रावस्ती की भूमि के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी है। ये आसान काम नहीं है। जमीन का अधिग्रहण अब आसान नहीं रहा। इसके बावजूद सरकार हार मानने वाली नहीं हैं।

 फसल विविधीकरण को लेकर सरकार क्या कर रही है?

फसलों के विविधीकरण के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। एक फसल लगाने से उर्वराशक्ति का ह्रास होता है। दैवी या प्राकृतिक आपदा से बोई गई एक फसल को नुकसान होता है। कई फसलें होगीं तो एक फसल के बचने की उम्मीद अधिक रहती है। इसीलिए एक साथ एक से अधिक फसल बोने के लिए किसानों को किसान मेला और संगोष्ठी के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। यह किसानों के हित में आवश्यक है।

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