सरकारें आनी-जानी हैं। यह एक सतत प्रक्रिया है और सेहतमंद लोकतंत्र के जरूरी भी। लेकिन सत्ता में किसी के आने-जाने से विकास कार्य नहीं रुकना चाहिए। खासकर ऐसा काम जिनका सीधा सरोकार आमजन से हो। मगर राजनीतिक अदावतों की वजह से कई बार ऐसा नहीं हो पाता है। यह तब और तकलीफदेह हो जाता है, जब स्वयं को किसी विशेष वर्ग या तबके का हितैषी बताने वाली सियासी पार्टियों की सरकारें उनके कल्याण की योजनाओं को रोक देती हैं। ऐसा ही एक मामला पुरानी दिल्ली के कमरा बंगश इलाके में मुस्लिम लड़कियों के लिए स्कूल बनाने का है, जो सियासी रस्साकशी के चलते लंबे अर्से से लंबित है। दिल्ली की तत्कालीन बीजेपी सरकार ने मुस्लिम बालिकाओं के लिए स्कूल बनाने की योजना बनाई थी। इसके शिलान्यास के एक माह बाद ही पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना की विदाई और फिर दो साल बाद ही कांग्रेस की सरकार बनने से यह योजना अधर में लटक गई। दरअसल पुरानी दिल्ली की मुस्लिम लड़कियों को शिक्षित करने के इरादे से 22 साल पूर्व दिल्ली की तत्कालीन बीजेपी सरकार ने कमरा बंगश की वक्फ सम्पत्ति पर एक स्कूल बनाने का फैसला लिया था। तब विपक्ष के नेता नहीं रहे एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 जनवरी 1996 को इस स्कूल की आधारशिला रखी थी। इस अवसर पर उस वक्त के बीजेपी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी भी मौजूद थे, लेकिन आज भी इस जगह पर स्कूल निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है। यहां तक कि शिलान्यास के पत्थर का नामोनिशान भी अब वहां से मिट चुका है। ज्ञात हो कि कमरा बंगश इलाके में जिस जमीन पर इस स्कूल की आधारशिला रखी गई, वह सम्पत्ति दिल्ली वक्फ बोर्ड की मिल्कियत है। इसीलिए दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सिराज पराचा ने स्कूल के निर्माण की तमाम रूपरेखा पार्टी के आला नेताओं के कहने पर तैयार की थी। इस जमीन पर तब महज एक डिस्पेंसरी थी, जिसे हटवा दिया गया। लेकिन वक्त ने करवट ली और फरवरी 1996 में दिल्ली में मदनलाल खुराना के बाद पहले साहिब सिंह वर्मा और फिर सुषमा स्वजराज को मुख्यमंत्री बनाया गया। इस राजनीतिक उठापटक के बाद 1998 में दिल्ली की सरकार बीजेपी के हाथ से चली गई। इसके बाद दिल्ली में मुसलमानों की हितैषी होने का दावा करने वाली कांग्रेस की सरकार अस्तित्व में आई और इसकी कमान शीला दीक्षित को सौंपी गई। 15 साल तक लगातार दिल्ली की सत्ता में बनी रहने वाली शीला दीक्षित सरकार ने कमरा बंगश स्कूल की एक ईंट भी नहीं रखी। यही नहीं इस जमीन के कुछ हिस्से पर तो दुकान और मकान भी बन गए हैं। जबकि क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों की तरफ से इस भूमि पर स्कूल बनाने के लिए सरकार का ध्यान बार-बार आकर्षित कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि 20 साल तक मटिया महल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले और मुसलमानों के मसीहा होने का दम भरने वाले शोएब इकबाल की हठधर्मिता और निजी स्वार्थों के चलते मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने स्कूल बनाने की इस योजना से अपनी दूरी बनाए रखी। हालांकि इस स्कूल के लिए दिल्ली सरकार को अलग से न तो कोई जमीन खरीदनी थी और न ही किसी जमीन का अधिग्रहण करना था।

कमरा बंगश इलाके में पहले से ही दिल्ली वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति संख्या-2440 मौजूद है। इसी पर इस स्कूल की तामीर होनी थी। इसके निर्माण में आने वाले खर्च को भी दिल्ली वक्फ बोर्ड को राज्य सरकार से मिलने वाले फंड से ही वहन करना था। योजना के तहत बनने वाले इस बहुमंजिला स्कूल में कक्षा एक से लेकर इंटरमीडियट तक की शिक्षा का प्रबंध होना था। एक अनुमान के अनुसार इसमें लगभग ढाई हजार लड़कियों की शिक्षा का प्रबंध हो जाता। काबिलेजिक्र है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास ऐसी बहुत सी सम्पत्तियां हैं, जो या तो बेकार पड़ी हैं या फिर उन पर नाजायज कब्जा है। दिवंगत मदनलाल खुराना की तत्कालीन बीजेपी सरकार की यह योजना अगर सफल हो जाती, तो वक्फ बोर्ड की जमीन पर बनाया गया यह पहला स्कूल होता। इसकी कामयाबी से वक्फ बोर्ड को और स्कूल खोलने का हौसला मिलता। इससे बखूबी अंजादा लगाया जा सकता है कि कितने मुस्लिम बच्चों और बच्चियों को शिक्षा की सहूलियत मिलती। दिल्ली में बीजेपी के बाद आने वाली सरकारों के इस उदासीन रवैये के कारण पुरानी दिल्ली के मुसलमानों को एक बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। बीजेपी के शासनकाल में एक स्कूल का शिलान्यास कराया गया, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने न तो इस स्कूल का निर्माण का काम पूरा कराया और न ही पुरानी दिल्ली में अपने 15 वर्षों के शासनकाल में एक भी नया स्कूल बनवाया। कमोबेश यही हाल दिल्ली की आम आदमी पार्टी की मौजूदा सरकार का भी है। सरकार ने दिल्ली के मुसलमानों को सब्जबाग दिखाकर दिल्ली की सत्ता तो हासिल कर ली, लेकिन सरकार के 4 साल के कार्यकाल में भी कमरा बंगश स्कूल की कोई खबर नहीं ली गई है। स्थानीय लोगों की तरफ से स्कूल बनाने के लिए बार-बार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मांग की जा रही है। चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान विधायक अल्का लांबा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कमरा बंगश स्कूल के निर्माण का वादा किया था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह भी अपना वादा भूल गईं। हालांकि हाल के दिनों में स्थानीय लोगों के बार-बार याद दिलाने और अगले साल ही चुनाव के दबाव के कारण अल्का लांबा ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खां से मुलाकात करके कमरा बंगश स्कूल के निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है। इस बीच दिल्ली वक्फ बोर्ड ने भी अपनी एक बैठक में स्कूल के निर्माण कार्य के लिए प्रस्ताव पारित कराया है।

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