छत्तीसगढ़ में मतदान के रूप में चुनाव का सबसे अहम दौर पूरा हो चुका है। दोनों चरणों में वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। चुनावी गहमागहमी के बाद अब नेताओं के लिए 11 दिसंबर तक का समय कुछ आराम करने वाला है। चुनाव में किसकी जीत होगी और किसकी हार यह 11 तारीख को ही पता चल पाएगा। तब तक के लिए राज्य के सभी 1279 उम्मीदवारों की किस्मत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ईवीएम में बंद हो गई है। 20 नवंबर को दूसरे चरण के चुनाव के बाद अगला दिन लगभग सभी दलों के नेताओं के लिए चुनावी आकलन करने का रहा। दिनभर सभी दलों के बड़े नेता राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आ रही खबरों की समीक्षा करने और उसके अनुसार अपनी पार्टी की चुनावी संभावनाओं का आकलन करने में जुटे रहे। दोनों चरणों को मिलाकर राज्य के 76.37 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले हैं। चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण की 18 सीटों के लिए 76.39 फीसदी तथा दूसरे चरण की 72 सीटों के लिए 76.35 फीसदी मतदाताओं ने अपने वोट डाले। इस बार 2013 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 1.05 फीसदी कम मतदान हुआ है।

मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर

दूसरे चरण का मतदान संपन्न होने के साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के अलावा राज्य के 11 मंत्री, बीजेपी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री समेत सभी 1279 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो गई है।

छत्तीसगढ़ में दोनों चरणों की वोटिंग हो चुकी है। जनता ने राज्य की 90 सीटों पर किस्मत आजमा रहे 1279 प्रत्याशियों का फैसला ईवीएम में बंद कर दिया है। अब 11 दिसंबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि जनता ने किसके पक्ष में अपना फैसला दिया है।

पहले चरण की तरह ही दूसरे चरण के मतदान के दौरान भी लगभग पूरे दिन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपैट में खराबी होने और बिजली का कनेक्शन बाधित होने जैसी कई अव्यवस्थाओं की शिकायतें आती रहीं और चुनाव अधिकारी लगातार इनको दूर करने में जुटे रहे। राहत की बात यह रही कि ईवीएम या वीवीपैट में खराबी की वजह से मतदान प्रक्रिया में कुछ ठहराव जरूर आया लेकिन चुनाव अधिकारियों ने मतदान प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया। इस चुनाव में राज्य के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के अलावा उनके सभी मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इन लोगों में बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, दयालदास बघेल, पुन्नूलाल मोहले, रामसेवक पैकरा और अमर अग्रवाल का नाम प्रमुख तौर पर लिया जा सकता है। दूसरे चरण की जिन 72 सीटों पर वोटिंग हुई है, उनमें 46 सामान्य वर्ग की हैं, जबकि 9 सीट अनुसूचित जाति और 17 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और बीएसपी गठबंधन को इन 26 आरक्षित सीटों से ही सबसे अधिक उम्मीद है। गठबंधन के नेताओं का दावा है कि दूसरे चरण की 20 सीटों पर उसका जनाधार 33 फीसदी तक है और यहां उसे अच्छी सफलता मिलने की संभावना है।

प्रमुख सीटों पर नजर

राज्य में की कंस्टीट्यूएंसी की बात की जाए, तो इनमें मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की राजनांदगांव सीट के अलावा अंबिकापुर, कोटा, मरवाही, पाटन, रायपुर दक्षिण और सक्ति का नाम लिया जा सकता है। अंबिकापुर में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार टीएस सिंहदेव का अनुराग सिंहदेव से मुकाबला है। ये सीट सामान्य वर्ग की है, लेकिन यहां आदिवासी और ईसाई वोटरों का दबदबा है। इस सीट पर बीजेपी को अजीत जोगी के गठबंधन से काफी उम्मीद है। अगर गठबंधन ईसाई और आदिवासी वोटों में सेंध लगाने में सफल रहा, तो बीजेपी टीएस सिंहदेव को उनके ही गढ़ में परास्त कर सकती है। इसी तरह कोटा की सीट पर कांग्रेस के विभोर सिंह, बीजेपी के काशी साहू और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की रेणु जोगी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। रेणु जोगी इसके पहले कांग्रेस के टिकट पर तीन बार यहां से चुनाव जीत चुकी हैं। मरवाही में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के नेता अजीत जोगी चुनाव लड़ रहे हैं और उनका मुकाबला बीजेपी की अर्चना सिंह से है। जोगी पांच साल बाद इस सीट से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार उन्होंने अपने बेटे अमित जोगी को यहां से कांग्रेस के टिकट पर लड़ाया था। मरवाही को जोगी परिवार की परंपरागत सीट माना जाता है। पाटन में पीसीसी चीफ तथा कांग्रेस के एक और मुख्यमंत्री पद के दावेदार भूपेश बघेल का सामना बीजेपी के मोतीलाल साहू से है। बघेल लगातार दावा करते रहे हैं कि कांग्रेस की जीत होने पर वे मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार होंगे। रायपुर दक्षिण में मंत्री बृजमोहन अग्रवाल कांग्रेस के कन्हैया का सामना कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस सीट को बचाने में उन्हें परेशानी नहीं होगी। राज्य की सक्ति सीट से कांग्रेस के चरणदास महंत और मेघराम साहू के बीच मुकाबला है। महंत भी कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं।

डॉ. रमन सिंह को जीत का भरोसा

छत्तीसगढ़ में दोनों चरणों की वोटिंग हो चुकी है। जनता ने राज्य की 90 सीटों पर किस्मत आजमा रहे 1279 प्रत्याशियों का फैसला ईवीएम में बंद कर दिया है। अब 11 दिसंबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि जनता ने किसके पक्ष में अपना फैसला दिया है।दूसरे चरण का मतदान खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए भरोसा जताया कि राज्य की जनता एक बार फिर बीजेपी के पक्ष में ही अपना फैसला देगी। उन्होंने कहा कि 15 साल तक किसी राज्य में एक ही दल का शासन होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि होती है। इस दौरान एंटी एस्टेब्लिशमेंट सेंटीमेंट उभरने की बात भी कही जाती है, लेकिन उनकी सरकार को 15 साल के शासन के बावजूद सत्ता विरोधी लहर का सामना नहीं करना पड़ा है। रमन सिंह का दावा है कि उनकी सरकार ने 15 वर्ष लगातार काम किया है और अपने काम की बदौलत ही वह इस विधानसभा चुनाव में भी सफलता हासिल करने वाली है। उनके मुताबिक 2003 में जब बीजेपी की सरकार बनी थी, उस वक्त राज्य में न तो सड़कें थी और न ही बिजली की पर्याप्त उपलब्धता थी। इन 15 सालों के दौरान बीजेपी की सरकार ने राज्य में बुनियादी ढांचा तैयार किया है। राज्य के दूरस्थ इलाकों में भी माओवादियों के खौफ के बावजूद विकास कार्यों को संपन्न किया गया है। मख्यमंत्री का यह भी कहना है कि अगर बीजेपी ने 2003 में सत्ता में आने के बाद ढंग से काम नहीं किया होता, तो राज्य की जनता उसको पांच साल बाद ही सत्ता से बेदखल कर देती, लेकिन इसी जनता ने उन्हें 15 साल तक काम करने का मौका दिया है और अब एक और कार्यकाल देने जा रही है। माओवादी आतंकवाद के संबंध में उनका कहना था कि आतंक प्रभावित क्षेत्रों में भी लोगों ने जमकर मतदान करके माओवाद को स्पष्ट रूप से नकार दिया है। हालांकि माओवाद राज्य के कुछ इलाकों में बचा हुआ है, लेकिन अधिकतर जगहों को उनके चंगुल से मुक्त करा लिया गया है। अगर एक बार फिर जनता ने बीजेपी को राज्य में सरकार चलाने का आशीर्वाद दिया, तो आने वाले 5 सालों में माओवादियों का राज्य से पूरी तरह से सफाया कर दिया जाएगा।

हर दल ने झोंकी ताकत

जहां तक राज्य में चुनाव प्रचार की बात है तो बीजेपी ने यहां लगभग साढ़े तीन सौ सभाएं और तीन रोड-शो किया। दूसरे चरण के चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार सभाएं की, जबकि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 17 सभा करने के साथ-साथ तीन रोड-शो भी किए। इसी तरह गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और दिल्ली प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी स्टार प्रचारक के रूप में लगातार सभाओं को संबोधित किया। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी ने तीन दिन में 15 से ज्यादा सभाएं की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में एक रात भी गुजारी। इस दौरान उन्होंने दूसरे चरण की 52 विधानसभा सीटों पर असर डालने की कोशिश की। अगर अजीत जोगी मायावती गठबंधन की बात की जाए, तो इस गठबंधन ने भी राज्य में लगभग ढाई सौ सभाओं का आयोजन किया। बीएसपी सुप्रीमो मायावती और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ अध्यक्ष अजीत जोगी ने संयुक्त रूप से छह चुनावी सभाएं की, जबकि अजीत जोगी ने अकेले 89 रैलियां की। साफ है कि हर पार्टी ने अपनी ओर से चुनाव जीतने के लिए अपना सब कुछ चुनाव प्रचार के दौरान झोंक दिया। माओवादियों की चुनाव बहिष्कार की धमकी के बावजूद यहां के मतदाताओं ने भारी संख्या में मतदान कर साफ कर दिया कि वे धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। लेकिन मतदाताओं ने दो चरणों में हुए मतदान के दौरान क्या फैसला किया है, इसका पता तो अब 11 दिसंबर को मतगणना के समय ही चलेगा। तभी ये भी पता चलेगा कि राज्य के किस नेता के घर इस बार सच में दिवाली मनेगी और कौन अपनी किस्मत को कोसते हुए अगले चुनाव की प्रतीक्षा करेगा।

 

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