बिहार पुलिस के इतिहास में 2 नवम्बर, 2018 एक काला अध्याय बन गया है। राजधानी पटना के लोदीपुर न्यू पुलिस लाइन में ट्रैफिक की ट्रेनी सिपाही सविता कुमारी पाठक की डेंगू से हुई मौत के बाद पुलिस लाइन में कानून की रक्षा के लिए नव नियुक्त रंगरूटों (महिला-पुरुष) ने जमकर बवाल काटा। लगभग चार घंटे तक उग्र रंगरूटों ने न सिर्फ पुलिस लाइन में लगे सीसीटीवी और उसके डीवीआर को तोड़ दिया बल्कि डीएसपी मसलेउद्दीन की उनके कार्यालय में जमकर पिटाई और उनके आवास में घुसकर तोड़फोड़ की। विद्रोही पुलिस वालों ने उनके परिजनों की पिटाई के साथ दो दर्जन पुलिस अधिकारियों के वाहनों में तोड़फोड़ और सड़क पर हंगामा किया और ग्रामीण एसपी आनंद कुमार और सिटी एसपी अमरेश डी की खदेड़कर पिटाई भी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एसपी के अंगरक्षकों ने 12 राउंड हवाई फायरिंग की। फायरिंग से उत्तेजित रंगरूटों का हंगामा नहीं थमने पर ग्रामीण एसपी और सिटी एसपी किसी तरह जानकर बचाकर भागे। इस प्रकरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चिंता स्वभाविक थी। डीजीपी एसके द्विवेदी से मौके की नजाकत जानने के साथ अविलंब स्थिति को संभालने के साथ ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शीघ्रातिशीघ्र कार्रवाई का निर्देश दिया। एसएसपी मनु महाराज ने खुद के लिए कड़ी सुरक्षा घेरा बनाकर पुलिस लाइन पहुंचकर रंगरूटों को समझाया और उनकी शिकायतों पर समुचित कार्रवाई का भरोसा दिया। पटना के जोनल आईजी नैयर हसनैन को जांच का जिम्मा मिला।

पुलिसकर्मियों की बगावत से मानो सरकार की हनक और प्रशासन का इकबाल पूरी तरह समाप्त होने का स्थानीय लोगों ने एहसास किया। रंगरूट अपने पैरों तले कानून को कुचलते रहे।

छानबीन और साक्ष्यों के आधार पर हुई जांच को आधार पर बनाकर 167 रंगरूट सिपाही एवं 8 सिपाही को बर्खास्त करने, 23 पुलिस कर्मियों को निलंबित करने की फौरी कार्रवाई के साथ 10 वर्षों से पुलिस लाइन में जमे 93 पुलिसकर्मियों के जोन तबादले की कार्रवाई हुई है। बिहार पुलिस के इतिहास में पुलिसकर्मियों के खिलाफ सबसे बड़ी सामूहिक कार्रवाई हुई है। बर्खास्त रंगरूटों में 79 महिला और 88 पुरुष हैं। बताते चलें कि पटना जिला पुलिस बल में नवनियुक्त 450 पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दिये बिना ही ड्यूटी ली जा रही थी। इन्हीं पुलिसकर्मियों में सहकर्मी सविता को डेंगू पीडि़त होने पर भी छुट्टी देने की बजाय ड्यूटी पर लगा दिये जाने के कारण रंगरूटों में गुस्सा फूटा था। गौरतलब है कि सविता 10 दिनों से बीमार होने के बावजूद दवा खाकर ड्यूटी कर रही थी। पहले उसे टायफाड हुआ। फिर डेंगू के लक्षण दिखने लगे। बीमार होने पर तीन दिनों की छुट्टी मिली थी। इसे बढ़ाने की अर्जी पर सुनवाई होने की बजाय उसे ट्रैफिक थाने में ड्यूटी करने का फरमान जारी हुआ। तब सविता पोस्ट पर ही ड्यूटी करती रही। वहीं मरने के एक दिन पहले बेहोश हो गयी थी। तब उसे बोरिंग रोड स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहीं सीवान की रहने वाली सविता की मौत हो गई। सविता का शव पुलिस लाइन में आने के बाद मौत के लिए अफसर को दोषी मान कार्रवाई की मांग गूंज रही थी। रंगरूटों का कहना था कि जब से तैनात हुए उन्हें छुट्टी नहीं मिली। छठ तक छुट्टी पर रोक लगी थी। इन्हें वेतन नहीं मिलने और ड्यूटी मिलने के बाद पुलिस लाइन में रहने के बजाय दर्जनों जवानों को किराये के मकान में रहने की विवशता का उल्लेख कर रंगरूटों का डीएसपी पर अधिक गुस्सा झलक रहा था। पुलिस बगावत पर काबू पाने के लिए रैफ और बीएमपी जवानों को लगाना पड़ा था। एसएसपी मनु महाराज ने पुलिस लाइन के अंदर प्रवेश करने के पहले गेट पर पहुंचते ही अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट पहन रखी थी। उनके अंदर पहुंचते हेलमेट फेंका गया। वह आगे बढ़ गये। उन्होंने हंगामा कर रहे पुलिसकर्मियों से लाउडस्पीकर पर कहा-मारपीट से ठीक हो जाए तो मुझे मारो, मां कसम पीछे नहीं हटूंगा। आपलोगों को हमने बहाल किया है। आप मेरे बच्चे हैं। समस्याएं हल होंगी। आपलोगों की सारी मांगें मानी जायेंगी। आप पर अपराध को रोकने की जिम्मेदारी है। आज आप ही गुंडे बन गये हैं। कोई समस्या थी तो आप मेरे पास आते। मैं आपके लिए ही हूं। पटना के जोनल आईजी नैयर हसनैन खां ने कहा है कि साक्ष्य के आधार पर 175 सिपाही बर्खास्त किये गये हैं। उपद्रव के मामले में अभी कई पहलुओं पर छानबीन जारी है। दोषी को बख्शा नहीं जायेगा। पटना के एसएसपी मनु महाराज ने कहा है कि पुलिस लाइन में हुआ उपद्रव कतई बर्दाश्त करने लायक नहीं है। इस विभाग में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। अभी तो कार्रवाई शुरू हुई है, कइयों को बर्खास्त किया जायेगा। जानकारों की माने तो और डेढ़ सौ सिपाही बर्खास्त हो सकते हैं। थाने में दर्ज मामले पर अलग कार्रवाई अवश्यंभावी है। बर्खास्त सिपाही को नौकरी गंवाने के साथ आपराधिक कृत्य को लेकर सजा भी अवश्यंभावी है।

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अस्सी के दशक में इन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से अपने पत्रकारीय जीवन की शुरुआत की। उसके बाद दैनिक आज में उप संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान में मुख्य संवाददाता व प्रधान संवाददाता, राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो प्रमुख एवं विशेष संवाददाता और दैनिक भास्कर में ब्यूरो प्रमुख एवं राजनीतिक संपादक के पद पर कार्य कर चुके हैं। दैनिक भास्कर से सेवानिवृत्त होने के बाद मार्च, 2017 से हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी से राजनीतिक संपादक के रूप में जुड़े हैं।

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