चंद्रबाबू ने केंद्र के विरोध में जनता को भड़काया है। राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने के मामले में जनता को समझाने में कामयाबी हासिल की है।

तेलुगू भाषी राज्य आंध्र प्रदेश में लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनाव भी होने जा रहे हैं। राज्य विभाजन के बाद दूसरी बार होने वाले इस चुनाव में पिछले चुनाव से स्थिति बदली हुई प्रतीत हो रही है। प्रदेश विधान सभा की 175 सीटों और लोकसभा की 25 सीटों पर 11 अप्रैल को एक साथ वोटिंग होगी। हर चुनाव क्षेत्र में तेलुगू देशम, अभिनेता पवन कल्याण की जनसेना पार्टी एवं भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। पिछले विधानसभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू भाजपा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय दलों के सहयोग से सत्ता पर काबिज हुए थे, लेकिन इस बार कुनबा बिखर चुका है।
उनको वाईएसआर के जगनमोहन और पवन कल्याण से तगड़ी चुनौती मिल रही है। इसीलिए टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू अपने भविष्य को लेकर बहुत ज्यादा सशंकित नजर आ रहे हैं। उत्तरी आंध्र प्रदेश में इस बार पवन कल्याण की पार्टी जनसेना टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस दोनों के वोट काट सकती है। इस बार लगता है कि किसी भी पार्टी की जीत बहुत कम अंतर से होगी। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कुछ शहरी निर्वाचन क्षेत्र में पवन कल्याण की पार्टी 15 से 20 हजार वोट जरूर हासिल करेगी। इसका प्रभाव मुख्य राजनीतिक दलों की जीत-हार पर देखने को मिलेगा। हर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के वोटर अधिक हैं।
वे ही उम्मीदवार की जीत और हार तय कर सकते हैं। ऐसे मतदाता को लुभाने का हर पार्टी प्रयास कर रही है। उत्तरी आंध्र प्रदेश में कम्मा, कापु और शेट्टी बलिजा तथा दलित आबादी है। इनका समर्थन जहां होगा, सरकार उसी खेमे की बनती दिखाई देती है। लोकसभा का तस्वीर अलग है क्योंकि 2014 में भारतीय जनता पार्टी और तेलुगू देशम पार्टी के गठबंधन को सफलता मिली थी। पर अब हालात बदल चुके हैं। लगता है कि राज्य में भाजपा को खाता खोलने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। चंद्रबाबू ने केंद्र के विरोध में जनता को भड़काया है। राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने के मामले में जनता को समझाने में कामयाबी हासिल की है।
भाजपा और टीडीपी दोनों एक दूसरे पर इस चुनाव में जमकर आग उगल रहे हैं। आंध्र प्रदेश की बदहाली के लिए दोनों नेता एक दूसरे को दोषी मान रहे हैं। इस विधान सभा के चुनाव में मुख्य रूप से राज्य को विशेष दर्जा, विशाखापट्टनम में रेलवे जोन, कापू समुदाय का आरक्षण, पोलावरम बंद का निर्माण और राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप जैसे मुद्दे हैं। राज्य में राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष वाईएसआर का आरोप है कि पवन कल्याण मुख्यमंत्री चंद्रबाबू से मिले हुए हैं और जानबूझ कर हर चुनाव क्षेत्र में कमजोर उम्मीदवार को खड़े किए हैं। इसी क्रम में तेलुगू देशम पार्टी ने आरोप लगाए हैं कि वाईएसआर कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली हुई हैं क्योंकि जगन मोहन अपनी रैली में नरेंद्र मोदी की आलोचना नहीं करते हैं। तेलुगू देशम पार्टी से दल बदलकर उनकी पार्टी में आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
इसलिए हवा का रुख किधर है इसपर अभी से कुछ नहीं कहा जा सकता है। क्या अगली सरकार वाईएसआर कांग्रेस की है? पिछली विधान सभा चुनाव में मात्र 0.04 प्रतिशत अधिक वोट पाकर सरकार बनाने वाले चंद्रबाबू नायडू अबकी बार अपने खिसकते जनाधार की वजह से काफी परेशान हैं। अपनी खामियों और जनता से बोले गए झूठ से लोगों का ध्यान भटकाकर केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं। दूसरी तरफ सत्ता विरोधी लहर भुनाने में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता जगनमोहन रेड्डी कामयाब होते दिख रहे हैं। चंद्रबाबू कई राजनीतिक और गैर राजनीतिक हथकंडे कर जाल बुन रहे हैं ताकि सत्ता विरोधी लहर को बांटने में सफल हो सकें। राज्य की राजनीति इस तरह गर्म है कि सट्टा बाजार में चंद्रबाबू, जगन मोहन, मुख्यमंत्री के बेटे लोकेश और जनसेना की मुखिया पवन कल्याण पर लोग जमकर पैसा लगा रहे हैं। इसलिए इसबार पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

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