अन्य राज्यों की तरह ही छत्तीसगढ़ में भी चुनाव प्रचार जोरों पर है। आमतौर पर यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होता है। इस बार अजीत जोगी की पार्टी ने बीएसपी और सीपीआई के साथ गठबंधन कर एक तीसरा कोण जरूर बनाया है, इसके बावजूद माना यही जा रहा है कि चुनावी जंग में कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही मुख्य टक्कर होगी। नौ नवंबर को बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस की ओर से उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी दोनों ही छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार करने पहुंचे और उन्होंने मतदाताओं को अपनी पार्टी के पक्ष में लुभाने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगदलपुर में विशाल रैली को संबोधित कर बीजेपी के चुनाव अभियान को गति दी, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सूबे में तीन स्थानों पर जनसभा को संबोधित किया और छत्तीसगढ़ के लिए पार्टी का घोषणा पत्र भी जारी किया। पहले बात नरेंद्र मोदी की रैली की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी संबोधन में कांग्रेस पर अर्बन नक्सलियों को समर्थन देने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस के नेताओं को बताना चाहिए कि सरकार जब भी अर्बन नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो कांग्रेस उनके बचाव में क्यों सामने आ जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी का कहना था की नक्सलवादी आम जनता के बीच आतंक फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और कांग्रेस उन्हें हर स्तर पर समर्थन दे रही है। हाल में ही कांग्रेस के स्टार प्रचारक राज बब्बर ने रायपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए नक्सलियों को क्रांतिकारी की संज्ञा दी थी और कहा था की जो लोग अभाव में हैं और जिनका अधिकार छीना गया है, वे लोग अपने अधिकार के लिए प्राणों की आहुति दे रहे हैं। इसी तरह पांच शहरी आतंकवादियों की गिरतारी को लेकर भी कांग्रेस ने मुद्दा बनाने की कोशिश की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इस विषय को प्रमुखता के साथ उठाया और कहा कि माओवादी आम लोगों की हत्या करते हैं और कांग्रेस के नेता उनको क्रांतिकारी कह कर पुकारते हैं। जिन माओवादियों ने लोगों की जिंदगी तबाह कर रखी है, स्कूलों में आग लगा रहे हैं और क्षेत्र में विकास का काम नहीं होने दे रहे हैं, कांग्रेस उनका समर्थन कर रही है। ऐसे में आसानी से अंदाज लगाया जा सकता है कि कांग्रेस कि अपनी मनोवृति कैसी है।

नक्सलवाद पर प्रहार

मोदी का भाषण पूरी तरह से नक्सलवाद के खिलाफ और विकास पर आधारित था। इन दोनों ही मसलों को लेकर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आंकड़ों का सहारा लेते हुए कहा कि पहले 10 साल में 20 हजार किलोमीटर सड़क बनी थी, लेकिन एनडीए की सरकार बनने के बाद चार साल में ही 30 हजार किलोमीटर सड़क बना दी गई। इस चार साल में छत्तीसगढ़ के 9000 गांवों को सड़क से जोड़ा गया और 3000 किलोमीटर नेशनल हाईवे बनाने काम किया गया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र जगदलपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने साफ किया कि नक्सलवादी विकास के विरोधी हैं, जबकि बीजेपी विकास की पक्षधर है। अपनी बातों से उन्होंने कांग्रेस और नक्सलवादियों के बीच मधुर संबंध होने की बात का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस खुद भी विकास की पक्षधर नहीं है, इसीलिए वह नक्सली विचारधारा का समर्थन करती है। नरेंद्र मोदी की जगदलपुर में हुई सभा से निश्चित रूप से बीजेपी को काफी फायदा होने की उम्मीद है। इस सभा में गांव से आए लोगों ने खुलकर प्रधानमंत्री की बातों का समर्थन किया। उनके मनोभावों से लग रहा था कि वह हर हालत में नरेंद्र मोदी का समर्थन करना चाहते हैं। दरअसल इस बार के विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी बीजेपी के लिए एक तुरुप का पत्ता साबित हो रहे हैं। राज्य में पिछले 15 सालों से बीजेपी की सरकार है और इस वजह से यहां पर सत्ता विरोधी माहौल भी स्वाभाविक रूप से कुछ हद तक बना हुआ है। इसके बावजूद लोग अभी भी नरेंद्र मोदी को देश का सबसे बड़ा नेता मानते हैं और उनकी बातों के प्रति अपनी सहमति जताते हैं। इसीलिए नरेंद्र मोदी की रैली से बीजेपी को छत्तीसगढ़ में भरपूर चुनावी लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दोनों ही नौ नवंबर को छत्तीसगढ़ मे थे। अपने चुनावी भाषण में मोदी ने विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया, वहीं राहुल अपने भाषण में केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश में ही लगे रहे।

बीजेपी को मिलेगी मजबूती

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जिस तरह से विकासवाद का समर्थन किया, वह भी बीजेपी को और मजबूती देने वाला साबित होगा। छत्तीसगढ़ लंबे समय से विकास की बाट जोह रहा है। देश के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक रहा छत्तीसगढ़ पिछले कुछ वर्षों में विकास की राह पर लगातार आगे बढ़ रहा है। यही बात बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित होने वाली है। कांग्रेस जहां एंटी एस्टैब्लिशमेंट वोट के बल पर राज्य की सत्ता पर काबिज होने की कोशिश कर रही है, वहीं बीजेपी अपने विकास कार्यों का बखान करके लोगों को अपने साथ जोड़े रखने की कोशिश में लगी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी चुनावी रैली में इसी बात पर बल दिया और निश्चित रूप से राज्य की जनता को प्रभावित करने में भी काफी हद तक सफल रहे। जगदलपुर का क्षेत्र ऐसे भी विकास के लिहाज से पिछड़ा माना जाता है। हालांकि पिछले पांच वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में भी ढांचागत विकास के क्षेत्र में काफी काम हुआ है और राज्य सरकार की पहल पर कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इससे क्षेत्र के लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में विकास की गति को और तेज करने की बात कह कर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस मोर्चे पर बीजेपी लगातार प्रयास करते रहने वाली है। माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी की इस रैली का असर जगदलपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर पड़ेगा और मतदान के दौरान बीजेपी को इसका भरपूर फायदा मिलेगा।

पुरानी बातों का दोहराव

अब बात कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की चुनावी जनसभा की। राहुल गांधी ने कांकेर और डोंगरगढ़ में जनसभा को संबोधित करते हुए बीजेपी को नोटबंदी और राफेल डील के मुद्दे पर ही घेरने की कोशिश की। इन दोनों ही मुद्दों पर कांग्रेस अध्यक्ष ने उन्हीं बातों को दोहराया, जो वे लंबे समय से कहते आ रहे हैं। उन्होंने बीजेपी सरकार को घेरते हुए कहा कि पीएम मोदी ने हिन्दुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड से छीनकर अनिल अंबानी को राफिल डील दिलाई और उनको फायदा पहुंचाया। इसी तरह नोटबंदी को भी राहुल गांधी ने देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया और कहा कि प्रधानमंत्री ने महिलाओं, किसानों, पिछड़ों और दलितों का पैसा वसूल कर उद्योगपतियों तक पहुंचा दिया। कांग्रेस अध्यक्ष का कहना था कि नोटबंदी के नाम पर गरीबों का पैसा बैंकों तक पहुंचाया गया और बाद में वही पैसा बीजेपी सरकार ने अपनी उद्योगपति दोस्तों को दे दिया। देखा जाए तो नौ नवंबर की अपनी तीनों जनसभाओं में राहुल गांधी ने ऐसा कुछ भी नया नहीं कहा, जिससे कि छत्तीसगढ़ की जनता प्रभावित हो। यह ठीक है कि नौ नवंबर को ही कांग्रेस का चुनावी घोषणा पत्र जारी करके कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी ने कई चुनावी वादे भी किए, जिनमें स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की घोषणा भी शामिल है। इसके अलावा घोषणापत्र में घरेलू बिजली बिल की दर को आधा करने, हर वर्ग के लोगों को एक रुपये किलो की दर से प्रतिमाह 35 किलो चावल देने और बेरोजगार युवाओं को मासिक अनुदान देने की बात भी कही गई है।

स्थानीय लोगों को निराशा

विडंबना तो ये है कि घोषणा पत्र की इन बातों को भी राहुल गांधी अपनी जनसभाओं में ढंग से नहीं रख सके। ऐसे में यह कह पाना मुश्किल है कि मतदाताओं पर उनके भाषणों का कितना प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि राहुल गांधी से उन्हें कांग्रेस के विजन की जानकारी मिलने और क्षेत्र के विकास को लेकर कांग्रेस की नीति के बारे में पता चलने की उम्मीद थी। लेकिन राहुल गांधी का पूरा भाषण केंद्र की बीजेपी सरकार पर आरोप लगाने पर ही केंद्रित रहा। कांग्रेस अपने चुनावी वादों को किस तरीके से पूरा करेगी, इस बारे में भी राहुल गांधी ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया, जिससे स्थानीय लोगों को काफी निराशा भी हुई। बहरहाल, छत्तीसगढ़ में चुनावी जोर आजमाइश जारी है और दो चरणों के चुनाव के बाद इस बात का भी फैसला हो जाएगा कि यहां किस पार्टी की सरकार बनेगी। अभी सूबे में बड़े नेताओं के और भी दौरे होने वाले हैं। इन दौरों से राज्य का चुनावी माहौल और गर्म होगा। लेकिन फिलहाल नौ नवंबर को हुई राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा ने छत्तीसगढ़ के चुनाव के माहौल में गर्मी तो ला ही दी है।

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