धर्मसभा में आने वाले करीब 95 फीसदी लोग युवा थे। धर्मसभा में लगातार 1990 और 1992 की यादों को ताजा किया गया। धर्मसभा में 9 दिसंबर को दिल्ली में विशाल धर्मसभा करने और 4 मार्च 2019 से रामेश्वर से रामराज यात्रा निकालने की घोषणा की गई। यह यात्रा 10 राज्यों से होती हुई 14 अप्रैल को रामनवमी के दिन अयोध्या पहुंचेगी। यह यात्रा भी राम मंदिर निर्माण के लिए ही होगी। स्वाभाविक है कि यात्रा जिन-जिन राज्यों से गुजरेगी, वहां का युवा राम मंदिर निर्माण के समर्थन में जुड़ेगा। दिल्ली में आयोजित होने वाली धर्मसभा में भी राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग की जायेगी। इसके साथ ही इन धर्मसभाओं के जरिये राम मंदिर निर्माण में बाधा डालने वालों को बेनकाब करने की कोशिश भी की जायेगी। अयोध्या की धर्मसभा में हिंदुत्व का ज्वार नजर आया। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने साफ कहा कि यदि अयोध्या में मंदिर के निर्माण को लेकर दूसरे पक्ष के रवैये में बदलाव नहीं आया, तो काशी और मथुरा मे भी उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि हिंदू समाज इन दो स्थानों पर भी केवल मंदिर चाहता है। धर्म सभा में जगदगुरु तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री से हुई बातचीत के आधार पर कह दिया कि 11 दिसंबर के बाद किसी भी समय कोई बड़ा निर्णय हो सकता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में भगवान राम की दुनिया में सबसे ऊंची मूर्ति स्थापित कराने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना में भगवान श्रीराम की 151 मीटर ऊंची मूर्ति, मूर्ति के ऊपर 20 मीटर ऊंचा छत्र एवं नीचे 50 मीटर ऊंचाई वाला बेस-पेडेस्टल होगा। इस प्रकार मूर्ति की कुल ऊंचाई 221 मीटर होगी। बेस-पेडेस्टल के अन्दर ही भव्य एवं अत्याधुनिक म्यूजियम बनाया जायेगा, जिसमें सप्तपुरियों में अयोध्या का इतिहास, इक्ष्वाकु वंश के इतिहास में राजा मनु से लेकर वर्तमान में श्रीराम जन्म भूमि तक का इतिहास, भगवान विष्णु के समस्त अवतारों का विवरण सहित सनातन धर्म विषयक आधुनिकतम तकनीक पर आधारित प्रदर्शनी की व्यवस्था होगी।

उनके मुताबिक सरकार ने अपने सभी सांसदों से 12 जनवरी तक दिल्ली में ही बने रहने के लिए कहा है। रामभद्राचार्य का यह खुलासा इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार राम मंदिर निर्माण के तरीके तलाशने में लगी हुई है। 25 नवंबर को अयोध्या के साथ ही नागपुर और बेंगलुरु में भी धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस सभी धर्मसभाओं के केंद्र में राम मंदिर निर्माण का ही मुद्दा था।

खास रही धर्मसभा

पवन पाण्डेय…  राम मंदिर आंदोलन के स्तंभ माने जाने वाले परमहंस रामचंद्र दास, महंत अवैद्यनाथ और अशोक सिंघल की गैरमौजूदगी में विश्व हिंदू परिषद की अयोध्या में हुई धर्म सभा कई मायनों में बेहद खास रही। इन तीनों बड़े नेताओं के निधन के बाद वीएचपी के इससे पहले बड़े कार्यक्रम को काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन जिस तरह से लाखों राम मंदिर समर्थकों को अयोध्या लाने में परिषद सफल रही, उससे जनता का इस मुद्दे को लेकर जुड़ाव स्पष्ट हो गया। सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त के बीच भक्तमाल की बगिया परिक्रमा मार्ग पर आयोजित धर्म सभा में तीन लाख से राम भक्तों ने पहुंच कर मंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया। विपक्ष की तमाम शंकाओं के बावजूद राम भक्त अनुशासित बने रहे और पूरा आयोजन शान्तिपूर्वक सम्पन्न हुआ। विश्व हिंदू परिषद ने 26 वर्ष बाद कोई बड़ा आयोजन किया। इससे पहले 6 दिसम्बर 1992 को वीएचपी ने लाखों लोगों को अयोध्या बुलाया था। परिषद ने उसके बाद भी कई कार्यक्रम अयोध्या में आयोजित किए, लेकिन धर्मसभा सबसे बड़ा विराट आयोजन था। कार्यक्रम स्थल पर 80 फीट लंबा और 40 फीट चौड़ा विशाल मंच बनाया गया था। बड़ा मैदान होने के कारण कई जगह स्क्रीन लगाए गए थे, ताकि मंच से दूर रहने वाले लोगों को भी कोई दिक्कत ना हो। पूरा आयोजन स्थल लगातार जय श्रीराम के जयकारे से गूंजता रहा।

धर्मसभाओं के जरिए संघ परिवार और विश्व हिंदू परिषद यह संदेश देने में सफल रहे कि अयोध्या विवाद में अब मंदिर नर्माण के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। इन धर्मसभाओं के आयोजन से ये भी स्पष्ट हो गया कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण का मुद्दा शांत नहीं हुआ है और देश की आस्थावान जनता इस मुद्दे पर कभी भी कोई समझौता नहीं करने वाली है। दुनिया भर के सवा सौ करोड़ हिन्दुओं के लिए ये उनकी आस्था का मसला है और वे इसे शांत नहीं होने देंगे। धर्मसभा के सफल आयोजन ने उत्तर प्रदेश के साथ ही पूरे देश के राजनीतिक समीकरण पर भी काफी असर पड़ने वाला है। संभवत: इसी वजह से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है।

तेज हुई जन्मभूमि आंदोलन की तपिश

संजय सिंह…रामनगरी अयोध्या फिर सुर्खियों में है। विश्व हिन्दू परिषद द्वारा आयोजित धर्मसभा ने गली, चौराहों में मंदिर निर्माण के मुद्दे को चर्चा का विषय बना दिया है। धर्म सभा में प्रदेश के 48 जनपदों के लोगों को बुलाया गया था और जिस तरह इसमें महिलाओं व युवाओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया, उससे स्पष्ट हो गया कि अयोध्या में मंदिर निर्माण का मुद्दा लोगों के दिलो-दिमाग में कायम है। कार्यक्रम में जिस तरह से राम भक्तों ने मंदिर निर्माण के प्रति आस्था प्रदर्शित की, उससे जाहिर हो गया कि भव्य मंदिर निर्माण उनकी प्रबल आकांक्षा है। धर्मसभा में यद्यपि लिखित प्रस्ताव नहीं लाया गया, लेकिन संतो और रामभक्तों ने जैसे मंदिर निर्माण को लेकर अध्यादेश लाने का समर्थन किया, उससे स्पष्ट हो गया कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं होगी। संतो और राम भक्तों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले को प्राथमिकता में नहीं लेने पर नाराजगी भी दिखाई दी। वहीं मंदिर निर्माण में देरी के लिए वक्ताओं ने विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। उनकी ओर से संदेश दिया गया कि हिंदू समाज की प्राथमिकता जन्मभूमि पर रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण है। अगर धर्मसभा के औचित्य की बात करें तो वीएचपी ने शुरूआत में ही साफ कर दिया कि धर्मसभा का उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना है। जिस तरह से लाखों रामभक्त अयोध्या पहुंचे और आन्दोलन का समर्थन किया, उससे आयोजन की सफलता का साफ पता चलत है। वीएचपी इस अयोध्या के मुद्दे को प्राथमिकता पर नहीं लेने वाले सर्वोच्च न्यायालय को भी यह सन्देश देने में सफल रही कि अब मामले को टालना जनहित में नहीं है। यह महज जमीनी विवाद का नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और संवेदनाओं से जुड़ा मुद्दा है। इसकी सामान्य विवाद से तुलना नहीं की जा सकती। अयोध्या मुद्दे को जन-जन का मुद्दा बनाने में महंत अवैद्यनाथ, रामचंद्र परमहंस और अशोक सिंघल जैसे दिग्गज नेताओं ने अपना पूरा जीवन लगा दिया। इन प्रमुख चेहरों को खोने के बाद इस आन्दोलन को अंजाम तक पहुंचाने के लिए इसे नई पीढ़ी को सौंपना जरूरी समझा जा रहा था। धर्मसभा इस लिहाज से सफल रही और इसमें 95 प्रतिशत युवाओं ने भागीदारी की। इस मौके पर आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के आंदोलन को लेकर संघ को अब युवाओं पर ही भरोसा है। विश्व हिन्दू परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अम्बरीश के मुताबिक धर्मसभा में लगभग 3,75,000 हजार से अधिक रामभक्तों ने भाग लिया और संतों के मार्गदर्शन में भव्य मंदिर निर्माण को लेकर प्रतिबद्धता जतायी।

हिन्दुत्व के ज्वार को महसूस करने की वजह से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद को ब्राह्मण साबित करने की कोशिश में जुटे हैं, ताकि हिन्दू मतदाताओं को वे अपने साथ जोड़ सकें। वहीं उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी किसी भी हद तक जाकर गठबंधन करने की कोशिश में हैं, ताकि वे हिंदुत्व के उभार का सामना कर सकें। बहरहाल, इतना तो स्पष्ट है कि विश्व हिंदू परिषद एक बार फिर राम मंदिर के नाम पर हिन्दुओं में गर्मी भरने में सफल रही है। जिस तरह धर्मसभाओं में राम भक्तों की भीड़ी उमड़ रही है उससे लगने लगा है कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की राह में आने वाली बाधाएं जल्द ही समाप्त हो सकती हैं और भव्य मंदिर का निर्माण जल्द ही शुरू हो सकता है। इसी बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में सरयू तट पर भगवान राम की 221 मीटर ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित करवाने की घोषणा कर रामभक्तों को एक बड़ी सौगात दी है। इस योजना के मुताबिक करीब 64 एकड़ में स्थापित होने वाली इस भव्य प्रतिमा पर 800 करोड़ रुपये का खर्च आयेगा। यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी और इसे बनाने में तीन से साढेÞ तीन साल का वक्त लगेगा।

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