मोदी सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती को दो साल तक मनाने की योजना बनाई है। यह कार्यक्रम 2 अक्टूबर, 2018 से शुरू होकर 2 अक्टूबर, 2020 तक चलेगा। बताते चलें कि ‘गांधी-150’ नामक यह आयोजन न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी होगा। 18 सितंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस कार्यक्रम के लिए ‘लोगो’ और ‘वेबसाइट’ (gandhi.gov.in) का लोकार्पण किया। जिसमें संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा और संस्कृति मंत्रालय के सचिव अरुण गोयल भी उपस्थित थे। वेबसाइट पर गांधीजी के विचार और दर्शन से जुड़े साहित्य का 100 खंडों में विशाल भंडार है। इसका नाम ‘गांधीपीडिया’ दिया गया है। इसी वेबसाइट में ‘कार्यांजलि’ भी है जिसमें लोग व्यक्तिगत या संस्थागत रूप से गांधीजी की श्रद्धांजलि स्वरूप किये गए कार्यों के फोटो और वीडियो अपलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें वेबसाइट पर लॉग इन करना पड़ेगा।

मोदी सरकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर अगले दो साल तक गांधी पर्व मनाएगी। खास बात यह है कि ‘गांधी-150’ नामक यह आयोजन न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार साल पहले 2 अक्टूबर, 2014 को गांधीजी की 150 वीं जयंती मनाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था। और भारत के आम जन से इस अभियान में जुड़ने की अपील की थी। इस अभियान के लिए उन्होंने लोगों को प्रतिवर्ष सौ घंटे श्रमदान के लिए प्रेरित किया था। इस अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष में महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करना था ताकि गांधी की 150 वीं जयंती को इस लक्ष्य प्राप्ति के रूप में मनाया जा सके।

महात्मा गांधी का मानना था कि साफ-सफाई, ईश्वर की भक्ति के बराबर है। इसलिए उन्होंने लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा दी थी और देश को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि गांधी ने ‘स्वच्छ भारत’ का सपना देखा था, और वे चाहते थे कि भारत के सभी लोग एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने का कार्य करें।

महात्मा गांधी के उसी सपने को साकार करने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के पास झाडू लगाकर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। उसके बाद वे वाल्मीकि बस्ती पहुंचे और वहां भी साफ-सफाई की। वहीं उन्होंने इस अभियान को जन आंदोलन बनाने के लिए देश के लोगों को मंत्र दिया था- ‘ना गंदगी करेंगे, ना करने देंगे’। विडंबना यह है कि मोदी सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद स्वच्छ भारत अभियान सार्वजनिक जीवन को साफ-सुथरा बनाने में उतना सफल नहीं हुआ जितना होना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो महात्मा गांधी के प्रति लोगों की श्रद्धा है लेकिन यह अभियान जन आंदोलन या जन अभियान का रूप नहीं ले सका। इसका कारण है कि भारत के लोग बुनियादी साफ-सफाई के मामले में बहुत पीछे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, जनसंख्या के हिसाब से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश भारत में बुनियादी साफ-सफाई के बिना रहने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। वाटर एड्स की स्टेट आॅफ द वर्ल्ड टॉयलेट्स 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में स्वच्छ भारत अभियान के तहत व्यापक प्रगति हुई है। इसके बावजूद 73.2 करोड़ से अधिक लोग खुले में शौच करते हैं या फिर अस्वच्छ शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं।

भारत सरकार के आंकड़ों के हवाले से यह रिपोर्ट बताती है कि स्वच्छ भारत अभियान के जरिये भारत में साफ-सफाई में निसंदेह बहुत प्रगति हुई है। भारत सरकार ने अक्टूबर 2014 से नवंबर 2017 के दौरान 5.2 करोड़ घरों में शौचालयों का निर्माण कराया है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि खुले में शौच को कम करने और बुनियादी साफ-सफाई की स्थिति में सुधार के मामले में भारत अब 10 शीर्ष देशों में शामिल हो गया है।

हालांकि देश के 434 शहरों में भारत सरकार के जरिये कराए गए स्वच्छता सर्वेक्षण के अनुसार, 83 प्रतिशत से अधिक लोगों का मानना है कि उनका क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में अधिक स्वच्छ हुआ है। वहीं 82 प्रतिशत से अधिक जनता का मानना है कि स्वच्छता बुनियादी ढांचा और कूड़ेदान की उपलब्धता तथा घर-घर जाकर कूड़ा एकत्रित करने वाली सेवाओं में सुधार आया है। जबकि 80 प्रतिशत लोगों ने सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था बेहतर होने की बात कही है।

हालांकि पिछले चार सालों में देश में साफ-सफाई के इस अभियान में समाज के हर वर्ग के लोगों और संस्थाओं ने यथासंभव साथ दिया। आम लोगों के अलावा सरकारी- गैरसरकारी अधिकारियों से लेकर देश की रक्षा में जुटे जवानों तक, बॉलीवुड कलाकारों से लेकर प्रसिद्ध खिलाड़ियों तक, बड़े उद्योगपतियों से लेकर चर्चित आध्यात्मिक गुरुओं तक, सभी इस अभियान से जुड़ते चले गए। इसमें साधु गुरु जग्गी वासुदेव, गुरु माता अमृतानंदमयी, अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, सचिन तेंदुलकर, रटन टाटा, सानिया मिर्जा और मैरी कॉम जैसी शख्सियतों के योगदान उल्लेखनीय हैं।

स्वच्छता अभियान की इस कड़ी में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 सितंबर 2018 से ‘स्वच्छता ही सेवा’ आंदोलन की शुरुआत की है। इसे स्वच्छता अभियान का दूसरा चरण कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने इस आंदोलन को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि बताया। साथ ही उन्होंने लोगों से ‘स्वच्छता ही सेवा’ आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए अपील की जिससे गांधीजी के ‘स्वच्छ भारत’ के सपने को साकार किया जा सके।

बताते चलें कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने के लिए सचिवों की पहली बैठक अप्रैल में हुई थी। उसके बाद 2 मई को रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गांधी 150 के आयोजन की रूपरेखा के लिए राष्ट्रीय समिति की बैठक हुई। लेकिन गांधी के नाम पर राजनीति करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी इस बैठक में पहुंचे ही नहीं। हालांकि इस राष्ट्रीय समिति की बैठक में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद व भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित कई केंद्रीय मंत्री  शामिल हुए। इस बैठक में 23 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। इसके बाद 5 जून को राज्यपालों के साथ बैठक में इस समारोह के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। फिर 18 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति की बैठक हुई जिसमें पंद्रह मंत्रालयों को शामिल करते हुए छह उप-समिति बनाई गई। प्रत्येक उप-समिति को अगले दो वर्षों तक अपने मंत्रालयों के अधीन आयोजित होने वाली गतिविधियों और कार्यक्रमों का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं संस्कृति मंत्रालय किसी भी उप-समिति का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह सभी गतिविधियों और कार्यक्रमों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी।बीते पांच महीने में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक के बाद सभी समितियों की तरफ से गांधी-150 के आयोजन के लिए 92 सुझाव आए हैं। इनमें से कुल 33 सुझावों को कार्यकारी समिति ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

गांधी-150 के अवसर पर होने वाले आयोजन कार्यकारी समिति से जिन सुझावों को स्वीकृति मिली हैं वे इस प्रकार हैं

० गांधी कथा- साधु गुरु जग्गी

वासुदेव, श्रीश्री रविशंकर, मोरारी बापू जैसे आध्यात्मिक गुरुओं के  जरिए।

० शांति और सद्भाव पर

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन।

० गांधी-150 पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी करना।

० नाटक, प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी-राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, साहित्य अकादमी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, संगीत नाटक अकादमी जैसे संस्थानों के जरिए।

० ‘खगोल विज्ञान पर गांधी’ दिखाएगा नेहरू तारामंडल।

० ‘गांधी-150’ नाम से 150 प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लेखों का संग्रह।

० ‘गांधी ब्लैक बेल्ट’ से स्कूल-कॉलेजों के बच्चों का परिचय करना।

० पद यात्रा- 150 दिनों तक 150 युवाओं द्वारा 10 किलोमीटर की पद यात्रा।

० साइकिल यात्रा-16 अक्टूबर, 18 से 27 जनवरी, 19 तक 150 युवाओं के जरिए पूरे भारत में साइकिल यात्रा।

० रेडियो पर चर्चित धर्मगुरु ‘महात्मा की बात’ करेंगे तो दूरदर्शन पर ‘गांधी दर्शन’ शुरू किया जाएगा।

० लघु फिल्मों और एनिमेशन फिल्मों की प्रतियोगिता।

० गांधी के प्रिय भाजन ‘वैष्णव जन’ के वीडियो विदेशों के गायकों को शामिल कर बनाया जाएगा और पूरे देश में उसका व्यापक प्रदर्शन होगा।

० नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्तिओं द्वारा महात्मा गांधी पर संगोष्ठी।

० स्वच्छ भारत, कुष्ठ रोग उन्मूलन और मैला ढ़ोने के खिलाफ अभियान।

० गांधी- 150 के लोगो के साथ प्रमुख ट्रेनों और राजमार्गों पर ब्रांडिंग।

० गांधी के जीवन से जुड़े सभी रेलवे स्टेशनों पर उन घटनाओं की पेंटिंग।

० राष्ट्रीय राजमार्गों पर गांधी के संदेशों के साथ साइनबोर्ड और पोस्टर।

० कुंभ मेलों में ‘गांधी ग्राम’ का निर्माण कर गांधी के बारे में बताना।

० गांधी की 150वीं जयंती पर कैदियों को विशेष माफी देते हुए कैदियों को जेलों से रिहा किया जाएगा।

० स्कूलों-कॉलेजों से जुड़कर गांधी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।

० सोशल मीडिया का उपयोग कर छात्रों को गांधी की आभासी दुनिया को दिखाना।

० बच्चों के बीच चित्रकला और पेंटिंग की प्रतियोगिता आयोजित करना।

गांधी-150 के लिए जिन 33 सुझावों को कार्यकारी समिति की हरी झंडी मिली है, उनमें से एक यह है कि जनवरी 2019 में गणतंत्र दिवस परेड में राजपथ पर इस बार सभी झांकियां महात्मा गांधी पर केंद्रित होंगी। इस बाबत गत 28 जुलाई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को बता दिया गया है। राज्यों को चंपारण सत्याग्रह और दांडी मार्च जैसी घटनाओं को आधार बनाकर झांकियां तैयार करने की सलाह दी गई है। अन्य मंत्रालयों को भी कुछ इसी तरह की झांकियां तैयार करने को कहा गया है।

अन्य सुझावों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गांधीजी की 150 वीं जयंती को शांति एवं मेल-मिलाप वर्ष के रूप में मनाने का सुझाव दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुझाव दिया कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर विश्व शांति सम्मेलन का आयोजन करना चाहिए। साथ ही अगले वर्ष को सांप्रदायिक सद्भाव के रूप में मनाना चाहिए। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार सरकार ने गांधी के संदेशों को घर-धर पहुंचाने के लिए पहले ही ‘बापू आपके द्वार’ कार्यक्रम शुरू कर दिया है।

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