हमारे देश की तुलना किसी दूसरे देश से नहीं की जा सकती। यही देश है जहां आतंकवादियों की पकड़-धकड़ तथा हमलों की साजिशों के भंडाफोड़ पर सुरक्षा एजेंसियों की पीठ थपथपाने की बजाय उनको प्रश्नों के कठघरे में खड़ा किया जाता है। आप देखिए, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा तथा उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते या एटीएस ने राजधानी दिल्ली से उत्तर प्रदेश तक छापा मारकर जो कुछ सामने लाया है उसका सच यही है कि हम भारत के लोग देश में अनेक आतंकवादी हमलों से बचा लिए गए हैं। ये तैयारी के अंतिम चरण में थे। सबके पास हथियार पहुंचने के पहले ही ये पकड़ में आ गए इसलिए इनकी साजिशें सफल नहीं हुई।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक साथ 16 स्थानों पर छापेमारी कर आतंकी साजिश का भंडाफोड़ किया है। इस छापे में भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार बरामद हुए हैं। आईएस से प्रेरित इस नए आतंकी मॉड्यूल का सरगना 29 वर्षीय सुहैल है जो अमरोहा की एक मस्जिद का इमाम है और वह किसी विदेशी आतंकवादी के निर्देशन में पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था।

किंतु कुछ बुद्धिजीवियों और सक्रियतावादियों की नजर में यह पूरी कार्रवाई ही फर्जी है। इनका क्या किया जाए? क्या एनआईए, उत्तर प्रदेश पुलिस तथा दिल्ली पुलिस इतनी नकारा है कि बिना किसी सबूत के 16 स्थानों पर छापा मारेगी? क्या वे इतने गैर जिम्मेवार हैं कि बिना किसी आधार के 10 लोगों को आतंकवादी होने के संदेह में गिरतार कर लेंगे? ध्यान रखिए, पहले इन्होंने16 लोगों को पकड़ा था जिनमें से पूछताछ के बाद छ: को छोड़ दिया गया। एनआईए के मुताबिक गिरतार किए गए लोगों में से 5 उत्तर प्रदेश के और 5 दिल्ली के हैं। सच यही है कि छापेमारी कर आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से प्रेरित जिस मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है उसे सुरक्षा आॅपरेशनों के इतिहास की एक बड़ी सफलता के रुप में याद किया जाएगा। 26 दिसंबर की सुबह तड़के करीब 4 बजे जब लोग सो रहे थे तब एनआईए, दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा और उत्तर प्रदेश एटीएस की दर्जनों टीमें एक साथ दिल्ली और उत्तर प्रदेश में आतंकवादी मॉड्यूल से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं। ये छापेमारी दिल्ली, मेरठ, अमरोहा, लखनऊ और हापुड़ में पूरे दिन चली। इस छापेमारी में करीब 150 लोग शामिल थे। ऐसा नहीं होता कि किसी अधिकारी को रात में सपना आया और फिर ये धड़ाधड़ छापा मारने लगे। सच यह है कि पिछले काफी दिनों से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर इनमें से कुछ लोग थे। उनके एसएमएस, व्हाट्सएप चैट तथा बातचीत पकड़ में आ रहे थे। जैसा एनआईए के आईजी आलोक मित्तल ने बताया कि ये मॉड्यूल 4 महीने से तैयार हो रहा था। इसकी जानकारी थी और 20 दिसंबर को ही इस मामले में कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका था। इसका अर्थ हुआ कि यह मॉड्यूल ज्यादा पुराना नहीं है। जो लोग गिरतार हुए हैं उनकी उम्र 20 से 30 साल के बीच है। पकड़े गए आतंकवादियों में मौलवी से लेकर सिविल इंजीनियर तक शामिल हैं। इनमें सभी सामान्य परिवारों से हैं। एमिटी यूनिवर्सिटी में सिविल इंजिनियरिंग करने वाला छात्र, आॅटो ड्राइवर, मौलवी, गारमेंट्स का व्यवसाय करने वाला युवक से लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय में बीए में पढ़ने वाला छात्र, बेल्डर आदि के साथ एक महिला भी शामिल हैं।

छापेमारी में मिले विस्फोटक छापेमारी में बड़ी संख्या में विस्फोटक, सुसाइड जैकेट, रिमोट कंट्रोल, एक देसी रॉकेट लॉन्चर, 25 पिस्तौल, 100 मोबाइल फोन, 135 सिम कार्ड, लैपटॉप, 120 अलार्म घडि़यां, 150 राउंड गोला-बारूद, करीब 25 किलोग्राम बम बनाने की सामग्री, पोटैशियम नाइट्रेट, पोटैशियम क्लोरेट, सल्फर बरामद हुआ है। छापे में स्टील के पाइप भी मिले हैं, जिसका पाइप बम बनाने में प्रयोग होता है।

इनके साधारण होने के नाम पर छापा एवं गिरतारी का उपहास उड़ाने वाले एवं विरोध करने वाले जरा बरामद सामग्रियों पर एक नजर डाल लें। छापेमारी में मिली सारी सामग्रियां देश में शांति फैलाने में प्रयोग तो हो नहीं सकती थी। सर्वसामान्य ही नहीं, सुरक्षा स्थितियों को बेहतर तरीके से समझने वाले का भी कलेजा धड़क गया है। अगर ये न पकड़े जाते तो पता नहीं कहां कहां खून और विध्वंस का खेल खेला जाता, इसकी कल्पना से ही सिहरन पैदा हो जाती है। गहराई से विचार करें तो यह साफ दिखाई देगा कि इनकी साजिशों में आत्मघाती विस्फोट भी शामिल था। बुलेट प्रूफ सुसाइड जैकेट का इस्तेमाल आत्मघाती हमलों के लिए ही किया जाता है। वे रिमोट कंट्रोल बम भी बना रहे थे और आत्मघाती दस्ता भी तैयार कर रहे थे। जो जानकारी सामने आई हैं उनमें उनकी कई तरह के हमलों की तैयारी का संकेत मिलता है। दिल्ली में इन आतंकवादियों की पांच टीमें थीं, जो अगले कुछ ही दिनों में कई जगहों पर सिलसिलेवार बम धमाके या आत्मघाती हमले करने की तैयारी कर रहे थे। ये आतंकवादी भीड़-भाड़ वाली जगहों, महत्वपूर्ण कार्यालयों और नेताओं पर आत्मघाती हमले की साजिश रच रहे थे। इनसे पूछताछ में हुए खुलासे के अनुसार दिल्ली पुलिस मुख्यालय, झंडेवालान में केशवकुंज स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कार्यालय और कुछ प्रतिष्ठित व्यक्ति तथा महत्वपूर्ण स्थल उनके निशाने पर थे।

साजिश के पीछे संगठन

इस साजिस के पीछे आईएस से प्रभावित विदेश में बैठे उसके कुछ आतंकवादियों से संपर्क में रहने वाला समूह है जिसका नाम ‘‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ है। यह आतंकवाद की दुनिया में नया नाम है। इसका सामान्य अर्थ है, इस्लाम के हितों के लिए लड़ाई करना। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान कानपुर में आतंकवादियों का एक खोरासान मॉड्यूल सामने आया था। ठीक उसी के तौर-तरीके पर हरकत-उल- हर्ब-ए-इस्लाम भी काम कर रहा है। यह कहा जा सकता है कि हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम एक ऐसा संगठन है, जो आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के लिए लोगों को जोड़ता है। वस्तुत: नेटवर्किंग के जरिए हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम आम लोगों को आतंकवादी संगठन का साथ देने के लिए कई तरीकों से प्रभावित करता है। इसमें इस्लाम को सामने रखकर युवाओं को उकसाना शामिल है। आईएस अपने मुख्य केन्द्र इराक एवं सीरिया में पराजित किया जा चुका है लेकिन वह खत्म नहीं हुआ है। संगठन यदि खत्म हो जाए तो भी उसके जेहाद का विचार खत्म नहीं होता। जैसे ओसमा बिन लादेन के मारे जाने के बावजूद अल कायदा खत्म नहीं हुआ। उससे प्रभावित अलग-अलग नामों से संगठन आतंकवाद को अंजाम देते रहे हैं। उसी तरह आईएस से प्रभावित व्यक्ति, समूह आतंकवाद फैला रहे हैं। ध्यान रखने की बात यह भी है कि आईएस ने चार वर्ष पूर्व दुनिया में इस्लामी साम्राज्य का जो नक्शा तैयार किया था उसमें भारत का पश्चिमी भाग शामिल था और उसे खुरासान नाम दिया गया था। आईएस ने उस समय घोषणा किया था कि उसने भारत के लिए अपना कमांडर नियुक्त कर दिया है। वस्तुत: हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम आईएस के उन्मादी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए ही पैदा किया गया है। हालांकि अभी तक की जानकारी के अनुसार यह पुराना संगठन नहीं है। इसलिए ज्यादा संभावना इसी बात की है कि इसका विस्तार बहुत ज्यादा नहीं हुआ होगा। अभी तक की छानबीन के अनुसार इस मॉड्यूल में शामिल सभी आतंकवादी स्थानीय हैं। दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश में रहने के कारण इनको ज्यादातर जगहों की जानकारी है। इसलिए वे आराम से रेकी करके हमले का लक्ष्य तय कर सकते थे। इसीलिए इसमें स्थानीय लोगों को शामिल किया गया था।

इन्होंने दक्षिणी दिल्ली तथा नई दिल्ली के भीड़भाड़ वाले कुछ बाजारों की रेकी भी की थी। इसमें देश की राजधानी में मुंबई जैसे हमले की साजिश भी शामिल थी। इस दौरान बुलेट प्रूफ जैकेट और बम का इस्तेमाल भी किया जाना था। मुंबई की ही तरह गोलियां चलाते हुए और धमाके करते हुए लक्ष्य तक पहुंचने की योजना बनाई गई थी। इस काम के लिए हथियार और बाकी सामान भी जुटा लिया गया था। ये बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार करने पर इसीलिए काम कर रहे थे ताकि स्वयं को पुलिस से मुठभेड़ के दौरान बचाया जा सके। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि हर हाल में हमले को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सके और लक्ष्य पा लिया जाए। इन लोगों ने इंटरनेट पर मुंबई हमले और कई अन्य हमलों से संबंधित वीडियो भी कई बार देखी थी। जैसा एनआईए के प्रवक्ता आलोक मित्तल ने कहा कि ये तैयारियों के अंतिम चरण के करीब थे। वे लोग बम बनाने में सफलता मिलने का इंतजार कर रहे थे और रिमोट नियंत्रित आईईडी और पाइप बम के जरिए विभिन्न जगहों पर विस्फोट करना चाहते थे। जरूरत पड़ने पर आत्मघाती जैकेटों का प्रयोग कर आत्मघाती हमले भी करना चाहते थे।

एनआईए को जो वीडियो मिले हैं उसमें ये आतंकवादी टाइम बम बनाते देखे जा सकते हैं। एनआईए का कहना है कि यह वीडियो आतंकवादी सुहैल के घर पर शूट किया गया था।

दिल्ली के जाफराबाद से पकड़े गए एक संदिग्ध अनस के मोबाइल चैट से यह भी सामने आया है कि ये 30 नवंबर को अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि पर आत्मघाती आतंकवादी हमला करना चाहते थे जिसे अंजाम नहीं दे पाए। एनआईए को जो वीडियो मिले हैं उसमें ये आतंकवादी टाइम बम बनाते देखे जा सकते हैं। एनआईए का कहना है कि यह वीडियो आतंकवादी सुहैल के घर पर शूट किया गया था। इस वीडियो में जो आवाज है वो भी सुहैल की है। सुहैल को ही इस मॉड्यूल का प्रमुख माना गया है। इसके बारे में आगे चर्चा करेंगे। क्या इनके निशाने पर प्रयागराज कुंभ भी था? इस बारे में कुछ कहना अभी कठिन है। अगर भीड़भाड़ वाले इलाके इनके निशाने पर थे तो उसमें कुंभ भी शामिल हो सकता है। कहने का तात्पर्य यह कि इतना सब कुछ सामने आने के बाद भी यदि किसी को यह कपोल कल्पित लगता है तो वैसे लोगों को क्या कहा जाए यह आप तय कर लीजिए। अब जरा इनके संगठन को समझ लीजिए। जो यह तर्क दे रहे हैं कि गृहमंत्री तक ने बयान दिया था कि हमारे देश में अभी आईएसआईएस के प्रत्यक्ष सक्रिय होने का कोई प्रमाण नहीं हैं वे भूल रहे हैं कि एनआईए ने इस मॉड्यूल को आईएस का नहीं कहा है। एनआईए की पूछताछ में पता चला कि किसी विदेशी आतंकवादी के निर्देशन में वह पूरा नेटवर्क संचालित करता था। सुहैल ने जेहादी वेबसाइट और पेज को फॉलो करना आरंभ किया था। उसे फेसबुक पर विदेश से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। उसे स्वीकार करने के बाद वहां से सुहैल को जेहादी साहित्य व वीडियो भेजा जाने लगा। जब वह स्वयं रेडिकलाइज्ड हो गया तो अन्य लोगों को भी जोड़ना शुरु किया। विदेशी हैंडलर ने ही सुहैल को भारत का ‘अमीर’ बना दिया। ऐसे संगठनों के प्रमुखों को अरबी में ‘अमीर’ कहा जाता है।

अनस यूनुस
24 साल का अनस यूनुस नोएडा के एमिटी
यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग कर रहा है।
वह इलेक्ट्रिकल सामान जुटाकर बम और रॉकेट
लॉन्चर बनाने की तैयारी कर रहा था।
राशिद जफर
23 साल का राशिद जफर दिल्ली के जाफराबाद
का रहने वाला है और कपड़ों का कारोबार करता
है।
सईद अहमद
28 साल का सईद अमरोहा के सैदापुर इम्मा का
रहने वाला है और बेल्डिंग की दुकान चलाता है।
रईस अहमद
यह सईद का ही भाई है जो अमरोहा में ही एक
दूसरी बेंिल्ंडग का दुकान चलाता है। इन दोनों
भाइयों ने मिलकर बड़ी मात्रा में बम बनाने का
सामान इकट्ठा किया था।
जुबेर मलिक
20 साल का जुबेर मलिक दिल्ली के जाफराबाद
का ही रहने वाला है और दिल्ली विश्वविद्यालय में
बीए तृतीय वर्ष का छात्र है।
जैद मलिक
जुबेर का बड़ा भाई 22 साल का जैद मलिक
है। वह फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड, बैटरी,
कनेक्टर्स आदि इकट्ठा करने में आतंकियों की मदद
कर रहा था।
साकिब इफ्तिखार
26 साल का साकिब इितखार उत्तर प्रदेश के
हापुड़ का रहने वाला है और बक्सर के एक
मस्जिद में इमाम है। उसने सुहैल को हथियार मुहैया
करवाने में मदद की थी।
मोहम्मद आजम
मोहम्मद आजम दिल्ली के चौहान बाजार का निवासी
है और सीलमपुर में दवा का दुकान चलाता है।
मोहम्मद इरशाद
अमरोहा निवासी मोहम्मद इरशाद रिक्शा चालक है।
इसने विस्फोटकों को छिपाने में आमिर सुहैल की
मदद की है।

यह बड़ा पद होता है। अफगानिस्तान में तालिबानों के शासन का प्रमुख मुल्ला उमर को ओसमा बिन लादेन ने अमीर बनाया था। इसके अलावा दिल्ली के जाफराबाद से ही आजम, अनस, जाहिद, जुबेर मलिक और ज़ैद मलिक को गिरतार किया गया है। सभी पड़ोसी हैं और आसपास जाफराबाद की अलग-अलग गलियों में रहते हैं। अनस ने अपने घर से कुछ दिन पहले 5 लाख का सोना चोरी किया था, जिसे बेचकर हथियार खरीदे गए। हालांकि उसके घरवालों ने चोरी की कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई थी। अब ये भी पता लगाया जा रहा है कि इस मॉड्यूल के लिए क्या फंड बाहर से भी आ रहा था। जाफराबाद इलाके में छापेमारी में एनआईए को सात पिस्तौलें और तलवारें मिली हैं। सिंभावली क्षेत्र के गांव बक्सर की एक मस्जिद में बच्चों को पढ़ाने वाले मौलाना शाकिब को एनआईए और एटीएस की टीम ने हिरासत में लिया। शाकिब ने अमरोहा के मदरसे से मुती की पढ़ाई की थी। सुहैल ने समूह में सभी लोगों को हमले के लिए हथियार और विस्फोटक इकट्ठा करने की जिम्मेदारी दी थी। एनआईए के मुताबिक इस समूह के सभी लोग विदेश में बैठे एक हैंडलर के संपर्क में थे। इनके विदेशी आकाओं की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। ये वॉट्सएप और टेलिग्राम पर एक-दूसरे से बात करते थे। देश में एक बार फिर मुंबई हमले जैसी साजिश रची गई थी। इस काम के लिए विदेशी हैंडलर की ओर से इस मॉड्यूल के सदस्यों को निर्देश दिया गया था। हमले के लिए हथियार, विस्फोटक, टाइम बम से लेकर रॉकेट लांचर तक जुटाया गया। दो आॅनलाइन हैंडलर विदेश से संगठन के लोगों को बम बनाने के तरीके बता रहे थे। बम बनाने में किन-किन चीजों का इस्तेमाल होता है, कैसे पाइप से बम बनाए जाते हैं। हैंडलर ने इन लोगों को टाइमर और रिमोट कंट्रोल बम बनाना सिखाया। जो लोग यह कह रहे हैं कि एक बेंिल्डग करने वाले का आतंकवाद से क्या लेनादेना वे जरा इसे समझ लें। अमरोहा निवासी रईस बेंिल्डग का काम करता था। चूंकि बम बनाने के लिए वेल्डर की जरूरत होती है, इसलिए उसे शामिल किया गया। संगठन ने आतंकवादी हमलों के लिए सारे बम अमरोहा में ही तैयार कराए। इनमें से सिर्फ लांचर बम को ये लोग दिल्ली भेज पाए थे। बाकी बमों की आपूर्ति हमलों के मुताबिक होनी थी। संगठन ने पिस्टल और तमंचे मेरठ के रांधना से खरीदे। संगठन को असलहों की आपूर्ति करने वाले व्यक्ति के ठिकाने पर उत्तर प्रदेश एटीएस व एनआईए की टीमों ने छापेमारी की लेकिन वह उन्हें मिला नहीं। उसकी तलाश जारी है। मुती सुहैल ने आतंकवादी हमलों की योजना तो बनाई दिल्ली में रहकर लेकिन दो महीने पहले आतंक का सामान रखने के लिए अमरोहा को चुना। पुलिस और लोगों की बात पर यकीन करें तो मुती यहां आकर एक मस्जिद में जुड़ गया। नमाज पढ़ाने लगा, लेकिन लोगों से कम ही मिलता-जुलता था। अक्सर वह अकेले ही रहता था। बताया जाता है कि नमाज पढ़ने के वक्त ही लोग उसको देखते थे, लेकिन किसी को उस पर शक नहीं हुआ। मोहल्ले के लोगों के मुताबिक मुती सुहैल का परिवार दीनी तालीम से जुड़ा हुआ है। उसके दो भाई भी हैं। बड़े भाई जुनैद की दिल्ली में इंवर्टर बैटरी की दुकान है। दूसरे नंबर का भाई उबैद दिल्ली में किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हैं। मुती के साथ चाचा ताऊ हैं। ज्यादातर परिवारवाले धार्मिक शिक्षा हासिल किए हुए हैं।

उसके पिता भी एक मदरसे में पढ़ाते हैं। सुहैल से पूछताछ के बाद उसकी निशानदेही पर ही अमरोहा के सैदपुर में हबीब के यहां दबिश देकर वेल्डिंग करने वाले दोनों भाइयों को भी कब्जे में लिया गया। सुहैल को पकड़ने के बाद एनआईए की टीम ने मेरठ के परीक्षितगढ़ थाने के गांव राधना निवासी नईम के यहां छापा मारा। 14 दिन पहले ही वह भी अपने गांव लौटा था और एनआईए की टीम के गांव में दबिश देने से कुछ मिनट पहले ही निकल गया। नईम के बारे में एनआईए को पता चला कि उसके पिता हाफिज मुनकाद अली किसान हैं और धार्मिक प्रवृत्ति के हैं। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। पांच भाइयों में नईम सबसे छोटा है। बाकी भाइयों में सबसे बड़ा रियाज मेरठ में पश्चिम उत्तर प्रदेश के सिवाया टोल प्लाजा पर तैनात है। दूसरा भाई अब्दुल सलाम गाजियाबाद के मसूरी में नौकरी करता है। एक भाई नदीम मुजफरनगर और वसीम हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में निजी स्कूल में शिक्षक है। नईम किठौर के इंटर कॉलेज से पढ़ा है। फिलहाल वह गुरुग्राम में रहकर काम करता है। दो-तीन महीने में वह गांव आता है। 14 दिन पहले वह तकरीबन दो महीने बाद गांव आया था। इसमें सबसे चौंकाने वाला सूत्र लखनऊ से सामने आया है। अभी तक की छानबीन की जानकारी इतनी ही है कि सिटी स्टेशन के पास रहने वाली एक महिला ने अपने जेवर बेचकर संदिग्ध आतंकवादियों को करीब पौने तीन लाख रुपये भिजवाये थे। महिला के साथ उसका बड़ा बेटा भी संदिग्ध आतंकवदियों के संपर्क में था। दोनों फेसबुक के जरिये इनके संपर्क में आये थे। एनआईए मां-बेटे से पूछताछ कर रही है। इसका पता चलने के साथ ही एनआईए ने उप्र आतंकवाद निरोधक दस्ता से संपर्क किया था। एनआईए की टीम के पहुंचते ही संयुक्त टीम ने नबीउल्ला रोड स्थित महिला के मकान को घेर लिया। महिला (45) का पति बर्तन के थोक कारोबारी है और यहियागंज में उसकी दुकान है। वह बैट्री और टॉर्च का कारोबार भी करता है। बताया गया कि महिला का बड़ा बेटा (18) बिल्लौचपुरा स्थित मदरसा मजहरुल इस्लाम में दीनी तालीम हासिल कर रहा है। वह आठवीं कक्षा तक शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल का छात्र था। महिला ने ही अपने बेटे का नाम मदरसे में लिखवाया था। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि वह चाहती थी कि उसका बेटा दीनी तालीम हासिल करे। वह कुछ दिनों तक पिता की दुकान पर भी गया था लेकिन, वहां मन नहीं लगा। यह भी साफ हो गया है कि महिला ने अकबरी गेट स्थित जमजम ज्वैलर्स में अपने जेवर बेचे थे। एनआईए अब इस बात की जांच कर रही है कि महिला ने जेवर बेचकर मिली रकम किस जरिये से संदिग्ध आतंकवादियों तक पहुंचाई थी। महिला व उसका बेटा अपने कमरे में ही ज्यादा वक्त गुजारते थे और इधर कुछ माह से परिवार से कटे रहते थे। महिला सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती थी। परिवार को महिला के जेवर बेचने की भनक तक नहीं लगी थी, लेकिन उसका बड़ा बेटा यह सब जानता था।

पकड़े गए संदिग्ध आतंकवादी

29 वर्षीय मुफ़्ती मोहम्मद सुहैल उर्फ हजरात मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा का रहने वाला है। लेकिन वह दिल्ली के जाफराबाद में लंबे समय से रह रहा था। सुहैल के परिवार के लोग करीब तीस साल पहले दिल्ली के जाफराबाद में आकर रहने लगे थे। सुहैल ने मदरसा जामा मस्जिद अमरोहा और देवबंद के किसी मदरसे में पढ़ाई की है। अमरोहा में वह कम आता था। किंतु हाल के दिनों में अमरोहा ही उसका केन्द्र हो गया था। उसे अमरोहा से पिस्तौल और विस्फोटक सामग्री के साथ गिरतार किया गया है। इस समय वहा अमरोहा में हकीम महताबउद्दीन मदरसे में बतौर मुफ़्ती  काम कर रहा था।

संदिग्ध महिला की कथा पढ़कर यह समझ में आ जाता है कि किस तरह इस्लाम की कट्टरवादिता एक सामान्य घरेलू महिला को जेहादी आतंकवाद के प्रति समर्पित कर देता है। आधुनिक शिक्षा छोड़कर बेटे को दीनी शिक्षा लेने के लिए भेजना और बेटे का इसके लिए तैयार हो जाना आखिर क्या बताता है? महिला अगर आभूषण बेचकर आतंकवादियों की मदद कर रही थी वह भी सोशल साइट्स पर संपर्क के कारण तो सोचना चाहिए कि हमारे यहां किसी सामान्य व्यक्ति के उग्र इस्लामीकरण यानी रैडिकलाइजेशन के लिए किस तरह के तत्व व सामग्रियां उपलब्ध हैं। वे सीधे मन ही परिवर्तित करते हैं जिससे व्यक्ति जेहाद के नाम पर अपनी जिन्दगी तक बलि चढ़ाने को तैयार हो जाता है। जाहिर है, ऐसे और भी लोग न जाने कहां-कहां जेहाद की गलत व्याख्या का शिकार होकर आतंकवाद का हथियार बन रहे होंगे इसका पता करना आसान नहीं है। किंतु हालिया भंडाफोड़ के बाद यह कहना होगा कि हमारे सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद की बड़ी साजिशों को नष्ट किया है।

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