हिमाचल में कई गुटों में बंटी कांग्रेस को जनवरी में नया प्रदेशाध्यक्ष मिला है। शिमला जिला के ठियोग विधानसभा क्षेत्र के कुमारसेन के रहने वाले कुलदीप सिंह राठौर हिमाचल कांग्रेस के नए मुखिया बने हैं। राठौर ने राजनीति की शुरुआत बतौर छात्र नेता एनएसयूआई से की थी। वे अस्सी के दशक में हिमाचल एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे हैं। पार्टी महासचिव भी रह चुके हैं। उन्हें राजनीति विरासत में नहीं मिली। पेशे से वकील कुलदीप को कांग्रेस हाईकमान ने अंतर्कलह से निपटने के लिए अध्यक्ष चुना है। वे कैसे कांग्रेस को एकजुट कर लोकसभा चुनावों में जाएंगे। इन सब पर उनसे बात की युगवार्ता के राज्य प्रतिनिधि सुनील शुक्ला ने।

आपकी पहली प्राथमिकता क्या है?
मैं उस समय पार्टी का अध्यक्ष बना हूं, जब लोकसभा चुनाव सिर पर है। पार्टी को एकजुट रखना और अनुशासनहीनता पर लगाम लगाना ही पहली प्राथमिकता है। जब मुझे कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया, तब कांग्रेस में नेता आए दिन एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे। अब इस बयानबाजी पर लगाम लगी है। कांग्रेस को एक मंच पर इकट्ठा करने में सफल रहा हूं, जो मेरी पहली प्राथमिकता थी। पार्टी को बूथ स्तर पर मजबूत करना और साधारण कार्यकर्ता तक पहुंचना ही पहला काम होगा।

लोकसभा चुनाव को लेकर आपका क्या मास्टर प्लान है?
हमारा लक्ष्य प्रदेश की सभी चार लोकसभा सीटों को जीतने का है। मैंने प्रदेश कांग्रेस के सचिवों को सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अतिरिक्त महासचिवों और पार्टी उपाध्यक्षों को भी जिम्मेदारी दी गई है, जो मास्टर प्लान को हिस्सा है।

आपकी राय में क्या कांग्रेस का संगठन कुछ समय से कमजोर हुआ है?
पहले जो हुआ उस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा। हां अपने एक महीने के कार्यकाल में मैंने अधिकतर जिलों का दौर किया है। इस दौरान संगठन को कार्यालय से निकालकर सड़कों पर लाया हूं। कार्यकर्ताओं में एक नए रक्त का संचार हुआ है।

आपने अपनी नई टीम का गठन किया है। किन लोगों को साथ लिया है?
मैंने पुरानी टीम नहीं बदली है। कुछ नए लोगों को साथ लिया है। लोकसभा चुनाव में टीम के काम का आंकलन किया जाएगा। उसके बाद नई कार्यकारिणी की ऐलान होगा। जिसनका काम सही नहीं होगा, उन्हें हटाया जाएगा।

शिमला और मण्डी जैसे संसदीय क्षेत्र जो कांग्रेस के गढ़ रहे हैं, अब भाजपा के पास हैं। कैसे जीतेंगे?
दोनों ही संसदीय क्षेत्र कांग्रेस के परंपरागत गढ़ रहे हैं। शिमला संसदीय क्षेत्र में राजनीतिक शून्यता आई थी। यहां से कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद शिमला को नेतृत्व मिला है। लोगों में उत्साह भरा है जिससे कांग्रेस संगठन एकजुट हुआ है। मण्डी में भाजपा अपने बायदे पूरे नहीं कर पाई है। प्रदेश सरकार का एक साल का कार्यकाल भी असफलता भरा है। कानून व्यवस्था और प्रशासन पर सरकार की पकड़ ढीली है। मोदी के खिलाफ देश में माहौल बना है। इन सब मुददों के लेकर जनता के बीच जाएंगे। सता विरोधी रुझान को भुनाना है।

लोकसभा के लिए प्रत्याशियों से आवेदन मांगे हैं। क्या उन्हीं में से प्रत्याशी होंगे?
पार्टी के पास चार संसदीय क्षेत्रों से 41 आवेदन आए हैं। नाम स्क्रीनिंग कमेटी में जाएंगे। हाईकमान उस पर अंतिम निर्णय लेगा। हाईकमान ने अपने स्तर पर सर्वे भी करवाया है। उसी आधार पर टिकट का निर्णय होगा। जीतने की क्षमता टिकट के लिए सबसे बड़ा मापदण्ड होगा। वरिष्ठ नेताओं पर भी सभी संभावनाएं खुली हैं।

आप अभी तक चुनावी राजनीति से दूर रहे हैं। भविष्य में क्या योजना है?
क्या शिमला या ठियोग से राजनीति करेंगे? मैंने जीवन में छीना झपटी और किसी को गिराने वाली राजनीति नहीं की है। मेरी पहली प्राथमिकता लोकसभा चुनाव है। मेरा रोल राहुल गांधी तय करेंगे। मुझे पार्टी को एकजुट करना है। शिमला और ठियोग दोनों ही महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्र हैं।

हिमाचल में कांग्रेस के बड़े नेताओं के झगड़ों से कैसे निपटेंगे?
सभी को इकट्ठा लेकर चलना है। बड़ों की मान प्रतिष्ठा और मार्ग दर्शन में संगठन को आगे ले जाना है। गैर-जिम्मेदाराना बयानों को लेकर एडवाइजरी जारी की है। साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाया हूं।

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