हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय से सांसद अनुराग ठाकुर को एचपीसीए मामलों में बड़ी राहत मिली है। यह मामला पिछली कांग्रेस सरकार में वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्री रहते सांसद अनुराग ठाकुर और उनके पिता व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल पर बनाए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से प्रेम कुमार धूमल और अनुराग ठाकुर को क्लीन चिट मिल गई है। इससे पिता-पुत्र को नई संजीवनी मिली है। यह निर्णय एचपीसीए में अनुराग को बेदाग साबित करती है। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर की बीसीसीआई में वापसी की राह खुले या न खुले, लेकिन राजनीति के क्षेत्र में उनके लिए नए द्वार जरूर खुल गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का जो यह फैसला आया है, वह धूमल गुट के धुर विरोधी व आलोचकों के मुंह पर एक बड़ा तमाचा है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो इस केस से उनके राजनीतिक करियर पर ग्रहण लगा गया था।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने अनुराग ठाकुर को एचपीसीए मामले में बड़ी राहत दी है। यह मामला प्रदेश की राजनीति में निर्णायक रहने के साथ-साथ उनके करियर में एक दाग भी था, जिसका खामियाजा भी उन्हें भोगना पड़ा था। अब अनुराग के लिए नई राहें खुल गई हैं।

उनके खिलाफ केवल यही लंबित केस था जिसने उनके केंद्रीय मंत्री बनने की राह रोकी थी। लेकिन इस केस से बरी होने के बाद उनके राजनीतिक करियर पर लगा ग्रहण भी खत्म हो गया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और उनके पिता प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ धर्मशाला के एचपीसीए स्टेडियम के जमीन आवंटन के मुद्दे पर दाखिल की गई एफआईआर को खारिज कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में दर्ज इस एफआईआर में इन दोनों पर स्टेडियम के लिए गलत तरीके से जमीन देने के आरोप थे। इस मामले में अनुराग ठाकुर और उनके पिता दोनों पर एक रजिस्टर्ड सोसायटी को कथित रूप से कंपनी में तब्दील करने के अलावा राज्य की क्रिकेट इकाई को ज्यादा जमीन मुहैया कराने के लिए खेल विभाग की जमीन पर बने सरकारी क्वॉर्टर तोड़ने के आरोप भी शामिल थे। यही नहीं, 2013 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार ने स्टेडियम की लीज को खत्म कर दिया था और संपत्ति पर कब्जा भी ले लिया था। इसके एक साल बाद, उच्च न्यायालय ने ठाकुर और उनके पिता के खिलाफ एफआईआर को खारिज करने से मना कर दिया था। इसके बाद ठाकुर ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का फैसला किया। अनुराग ठाकुर का कई विवादों से नाता जुड़ता रहा है। पहले वे बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवासन के साथ मतभेद होने के कारण काफी चर्चा में रहे। इसके बाद बुकीज विवाद में नाम आने से उनकी खूब किरकिरी हुई थी। लेकिन यह सिलसिला यही नहीं थमा। अनुराग ठाकुर ने सबसे कम उम्र में बीसीसीआई के अध्यक्ष पद पर बैठने का रिकार्ड भी तोड़ा। लेकिन दो जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और बोर्ड सचिव अजय शिरके को भारतीय क्रिकेट बोर्ड में पारदर्शिता में विफल होने और कोर्ट से जारी अनुपालनों को लागू करने में असफल रहने के चलते पदों से हटा दिया। जनवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग को बोर्ड के किसी भी पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को मंजूर करते हुए बीसीसीआई को 6 महीने के अंदर सभी आधारभूत बदलाव करने का निर्देश दिया था। जानकारों की माने, तो अनुराग ठाकुर की बीसीसीआई में वापसी की संभावनाओं से अभी भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

खेल और राजनीति दोनों साधते रहे!

अनुराग ठाकुर तीसरी बार हिमाचल के हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं। बीजेपी में उनकी गिनती वरिष्ठ नेताओं में की जाती है। अनुराग ठाकुर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। अपने तेज-तर्रार स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। लेकिन बदकिस्मती से कुछ विवाद उनके साथ जुड़ गए। क्रिकेट प्रेमी अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बनें। अनुराग ठाकुर ने महज 25 साल की उम्र में हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष पद संभाला था। खेल के साथ-साथ ही वह राजनीति में भी सक्रिय रहे। जिसका प्रमाण यह था कि हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष और बीसीसीआई के सेक्रेटरी होते हुए भी उनकी लोकसभा में उपस्थिति 90 फीसदी दर्ज की गई थी।

अनुराग ने खुद को बीसीसीआई के अधिकारी के तौर पर अयोग्य घोषित करने वाले आदेश को वापस लेने की अर्जी दाखिल की है। पिछले लोकसभा चुनाव के बाद अनुराग ठाकुर बिना वजह विवादों से घिरे हुए थे। हिमाचल किक्रेट एसोसिएशन में कथित अनियमितता के आरोप ने सबसे पहले उनके केंद्रीय मंत्री बनने की राह रोकी, तो इसके बाद इनके पिता प्रेम कुमार चंद वोटों चुनाव हार गए। इस वजह से वह मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित होने के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। अनुराग ठाकुर के परिवार के लिए यह भी एक बड़ा झटका था। अब परिस्थितियां फिर बदली हैं और अगले लोकसभा चुनावों के लिए अनुराग की राह फिर आसान होती दिख रही है। धूमल के विधानसभा चुनाव हारने के बाद अनुराग ठाकुर को लेकर दो बडे घटनाचक्र हुए हैं। पहला, अनुराग ठाकुर को कम उम्र में ही लोकसभा में पार्टी का चीफ व्हिप बनाया गया है। जोकि साफ संकेत देता है कि उनकी पार्टी के अंदर के कितनी मजबूत पकड़ है। दूसरा, एचपीसीए मामले में राहत मिलने के बाद उनके विरोधियों के लिए साफ संदेश गया कि उनको घेरने की लाख कोशिशें के बावजूद राजनीति में उनका दामन बिल्कुल साफ है। इन दो उपलब्धियों के साथ वे चार महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में एक नई उर्जा के साथ मैदान में उतरेंगे।

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