देवभूमि हिमाचल जहां अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है, वहीं कई साहसिक खेलों को पसंद करने वालों की भी यह पसंदीदा जगह है। यह जगह रिवर राटिंग, पर्वतारोहण और पैराग्लाइडिंग जैसे खेलों के लिए देश-विदेश में जाना जाता है। आसमान में उड़ने की चाहत रखने वाले सैलानियों के लिए यहां का सबसे मशहूर पर्यटन स्थल है बीर बिलिंग। यहां आसमान नापने के लिए हर साल हजारों की संख्या में सैलानी आते हैं। मंडी और कांगड़ा जिला की सीमा पर स्थित यह पैराग्लाइडिंग साईट पिछले कुछ सालों में इंटरनेशनल पैराग्लाइडिंग की मुख्य जगह बनकर उभरा है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2015 से यहां पर इंटरनेशनल पैराग्लाइडिंग प्री वर्ल्ड कप का आयोजन किया जा रहा है। भारत पैराग्लाइडिंग विश्व कप की मेजबानी करने वाला दक्षिण एशिया का पहला देश बन गया है। नि:संदेह कांगड़ा घाटी में स्थित यह सुंदर पर्यटन स्थल एक श्रेष्ठ ग्लाइडिंग गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है। लेकिन पिछले कुछ समय से यहां हो रही दुर्घटनाओं की वजह से खेल प्रेमियों के लिए यह मौत का स्थान साबित हो रहा है। इसी साल अक्तूबर माह में पैराग्लाइडिंग के दौरान दो पायलट अपनी जान गंवा चुके हैं। जहां एक हादसे में भारतीय मूल के एनआरआई संजय की मौत हो गई, वहीं सिंगापुर के पायलट ने अपनी जान गंवाई। सिंगापुर के इस पायलट का नाम कोक चांग था। यह पायलट सिंगापुर आर्मी में कमांडो भी रह चुका है। पिछले कुछ सालों की बात करें, तो अब तक लगभग 250 पैराग्लाइडिंग के शौकीनों के साथ हादसे हो चुके हैं, साथ ही आठ-दस पायलट मौत का ग्रास बन गए। हर साल पैराग्लाइडिंग के सीजन में दस से 15 पायलट दुर्घटनाग्रस्त होते रहते हैं, इस बार पैराग्लाइडिंग करने वाले 15 के करीब पायलट दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। दो पायलटों को जान से हाथ भी धोना पड़ा। कुछ साल पहले तक यहां 100 से 150 तक पायलट आते थे। लेकिन इस बार यह आंकड़ा 200 पार कर गया है। इस स्थल की लोकप्रियता और पायलटों की संख्या में तो इजाफा हो रहा है, मगर सुरक्षा व्यवस्थाओं और सुविधाओं में नहीं।

प्रशासन मात्र एक सप्ताह के लिए 500 रुपए फीस लेकर उड़ने की इजाजत दे देता है। गौरतलब है कि क्रास कंट्री पर आधारित इस प्रतियोगिता में पायलटों की सुरक्षा के लिए हेलीकाप्टर और इंटरनेशनल लेवल की तकनीकी कमेटी का होना आवश्यक है। इन सब सुरक्षा इंतजामों को अपनाने की प्रशासन दुहाई तो दे रहा है, इसके बावजूद आए दिन पायलटों के साथ हो रही दुर्घटनाएं इस पर्यटन स्थल की साख पर बट्टा लगा रही हैं। पैराग्लाइडिंग के जानकारों की मानें, तो इस बार ज्यादा मानसून होने के कारण हवा का रुख ठीक नहीं है। हवा में नमी बहुत ज्यादा है, जो दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बन रहा है। जो भी विदेशी पायलट आ रहे हैं, उन्हें सही गाइड लाइन नहीं मिल पा रही है। उन्हें पता नहीं चल पा रहा है कि कौन से क्षेत्र सुरक्षित है। यही कारण है कि विदेशी पायलट ही दुर्घटनाओं का सबसे अधिक शिकार हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि प्रशासन को लोकल पायलटों की कमेटी गठित करनी चाहिए। जो हर रोज विदेशी पायलटों को उड़ान भरने से पहले उन्हें इस घाटी के वातावरण से अवगत करवाए। वर्तमान में बीर बिलिंग घाटी हजारों लोगों के लिए रोजी-रोटी का सहारा बन चुकी है। ऐसे में इसके महत्व को बचा कर रखना जरूरी है।

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