देश में राजे-महराजाओं से जुड़े अनेक किस्से कहानियों का जिक्र होता रहा है। इसी तरह की एक प्रचलित कथा है, हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान की। जिन्होंने लगभग पांच हजार किलोग्राम सोना भारत सरकार को देकर मिसाल कायम की थी। इस तथ्य की पड़ताल के लिए एक संवाददाता ने आरटीआई के जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया। प्रधानमंत्री कार्यालय जिसके तहत राष्ट्रीय रक्षा कोष कार्य करता है। सूचना के अधिकार की एक श्रृंखला के तहत मिले जवाब ने प्रचलित तथ्य को अनुत्तरित छोड़ दिया है। एक शहरी कथा है कि हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान ने पाकिस्तान युद्ध के बाद राष्ट्रीय रक्षा कोष में 5,000 किलोग्राम सोना दान में दिया था।

तत्कालीन पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए निजाम को स्वर्ण बांड में 4.25 लाख ग्राम सोने के निवेश पर बधाई दी थी।

एक संवाददाता की आरटीआई पूछताछ में प्रधानमंत्री कार्यालय ने जवाब दिया कि इस तरह के किसी भी दान की कोई जानकारी नहीं है। गौरतलब है कि वर्ष 1965 में पाकिस्तान से युद्ध में विजय के बाद भारत की आर्थिक स्थिति कमजोर हो चुकी थी। इस खतरे को भांपते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने रेडियो द्वारा देश के राजे-रजवाड़ों एवं व्यापारियों से राष्ट्रीय रक्षा कोष में खुलकर सहयोग की अपील की थी। लेकिन कोई भी इस मुश्किल वक्त में सामने नहीं आया। कहा जाता है कि तब लाल बहादुर शास्त्री ने देश भ्रमण के दौरान हैदराबाद का रुख किया और आशानुरूप निजाम मीर उस्मान अली खान ने दिल खोलकर सहयोग भी किया। निजाम ने लगभग पांच टन सोना राष्ट्रीय रक्षा कोष में दिया। यह सहयोग भारतीय इतिहास में अद्वित्तीय है। प्रचलित तथ्य के अनुसार निजाम मीर उस्मान अली खान ने लगभग पांच टन सोना दान करने के बाद, केवल इतना पूछा कि बहुमूल्य धातु वाले बक्से वापस आ जाएंगे। जबकि वास्तव में राष्ट्रीय रक्षा स्वर्ण योजना में निजाम ने 4.25 लाख ग्राम (425 किलोग्राम) सोने का निवेश किया, जो आर्थिक संकट से जूझने के लिए अक्टूबर 1965 में 6.5 फीसदी ब्याज के साथ जारी हुआ था। हालांकि आरटीआई ने पांच टन सोना दान करने के बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार कर दिया। लेकिन हैदराबाद से 11 दिसंबर, 1965 की हिंदू समाचार पत्र की एक रिपोर्ट निजाम और गोल्ड के कम ग्लैमरस संस्करण से पुष्टि होती है।

निजाम मीर उस्मान अली खान

निजाम मीर उस्मान अली खान हैदराबाद रियासत के आखिरी निजाम थे। उनका जन्म 6 अप्रैल 1886 को हुआ था। उनके पिता का नाम महबूब अली खान था। बताया जाता है कि किसी जमाने में उस्मान अली खान दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक थे। प्रचलित कथा के अनुसार उनके पास लगभग 200 मिलियन का सोना और चांदी था। 400 मिलियन के गहने थे। कहा जाता है कि गाडि़यों के शौकीन उस्मान अली खान के पास एक समय कई दर्जन रोल्स रॉयस गाडि़या थी। दिल खोलकर दान करने वाले हैदराबाद के आखिरी निजाम ने 29 फरवरी 1967 को आखिरी सांस ली। …- राम जी तिवारी तत्कालीन पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए निजाम को स्वर्ण बांड में 4.25 लाख ग्राम सोने के निवेश पर बधाई दी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री निजाम मीर उस्मान अली खान 30

हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और हैदराबाद के निजाम के बीच हवाईअड्डे पर कुछ बातचीत हुई। उसके बाद शाम को सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए शास्त्री ने निजाम को स्वर्ण बांड में 4.25 लाख ग्राम सोने के निवेश पर बधाई दी। जिसका मूल्य लगभग 50 लाख रुपये था। निवेश में पुराने सोने के मोहरें (सिक्कों) शामिल थीं। जिनका मूल्य उनकी प्राचीनता के आधार पर अधिक था। उन्होंने कहा कि हम इन सोने के मोहरों को पिघलाना नहीं चाहते हैं, लेकिन उच्च मूल्य प्राप्त करने के लिए उन्हें विदेशों को भेजना चाहते हैं। इससे हमें एक करोड़ रुपये मिल सकते हैं। रिपोर्ट में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम से 1.25 लाख ग्राम सोने का दान और तेलगू फिल्म सितारों से सरकार को नकद में 8 लाख रुपये का पर्स भी दान में मिला था। बता दें कि अक्टूबर 1965 में राष्ट्रीय रक्षा स्वर्ण बांड में आम माफी होने का अतिरिक्त लाभ था। सरकार की विज्ञप्ति में था कि इसके तहत बांड की सदस्यता लेने पर किसी पर भी किसी रूप में कोई कार्यवाई नहीं की जाएगी। इसी क्रम में जहां जहां इस तरह के सोने का अधिग्रहण किया गया उसका आयकर अधिनियम के तहत खुलासा नहीं किया गया है। वहीं निजाम उस्मान अली खान के पोते नजाफ अली खान ने कहा कि यह मेरे लिए केवल एक समाचार है।

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