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नाव में पारदर्शिता लाने के लिए आईसीएआई का यह दिशा निर्देश  है कि राजनीतिक दलों के आॅडिट रिपोर्ट की इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा छानबीन की जानी चाहिए किन्तु इसका पालन नहीं होता है। लोकतंत्र के उत्सव चुनाव                  में पारदर्शिता और पार्टियों की जवाबदेही के लिए आए दिन चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और सरकार सभी स्तर पर पहल होती रहती है। इसी क्रम में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म की रिपोर्ट काफी कुछ बयां करती है। राजनीतिक दल विभिन्न स्रोतों से दान प्राप्त करते हैं इसलिए जवाबदेही और पारदर्शिता उनके कामकाज का महत्वपूर्ण पहलू होना चाहिए। व्यापक और पारदर्शी लेखा प्रणाली के लिए आवश्यक है कि पार्टियां सही वित्तीय स्थिति प्रदर्शित करें। भारत निर्वाचन आयोग (ई.सी.आई.) ने 19 नवंबर 2014 को राजनीतिक दलों के अध्यक्षों/ महामंत्रियों को संबोधित करते हुए अपने पत्र में लिखा कि सभी दलों को उनकी अंकेक्षित रिपोर्ट का विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इस रिपोर्ट में 5 राष्ट्रीय दलों (भाजपा और कांग्रेस को छोड़कर) के कुल आय और व्यय का विश्लेषण है जो उन्होंने वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए अपने आयकर में भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया।

राष्ट्रीय दलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), इंडियन नेशनल कांग्रेस (आईएनसी), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), नेशनल कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया (सीपीआई), कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया (मार्क्सिस्ट), (सीपीएम) और आॅल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) है।

प्रस्तुत आॅडिट रिपोर्ट

दलों द्वारा वार्षिक आॅडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने की नियमित तिथि 30 अक्टूबर 2017 थी। इसमें एआईटीसी, सीपीएम और बसपा तीनों पार्टियों ने ही अपने आॅडिट रिपोर्ट्स अपने समयसीमा से पहले प्रस्तुत की। वहीं सीपीआई ने अपनी आॅडिट रिपोर्ट निर्धारित समयसीमा के लगभग 22 दिनों के बाद 23 नवंबर 2017  को जमा किया। इसके बाद एनसीपी ने अपनी आॅडिट रिपोर्ट निर्धारित समयसीमा के लगभग 2 महीने 19 दिन बाद 19 जनवरी 2018 को जमा किया। लेकिन बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी आॅडिट रिपोर्ट निर्धारित समयसीमा के लगभग 3 महीने बाद भी (7 फरवरी तक) जमा नहीं किया है। जिसमें वित्तयी वर्ष 2016-17 के दौरान बसपा ने कुल रु 173 .58 करोड़ का आय घोषित किया है। जिसमे से पार्टी ने केवल रु 51.83 करोड़ यानी कुल आय का 30 फीसदी ही खर्च किया है। सीपीएम ने कुल रु 100.256 करोड़ का आय घोषित किया है। जिसमें से पार्टी ने रु 94.056 करोड़ यानी कुल आय का 94 फीसदी खर्च किया है। इसी क्रम में एनसीपी ने अपने कुल आय से 45 फीसदी अधिक खर्चा किया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान पार्टी ने रु 17.235 करोड़ की आय घोषित की है। लेकिन पार्टी का कुल खर्च रु 24.967 करोड़ था।

राष्ट्रीय दलों की आय का अधिकांश हिस्सा अज्ञात स्त्रोतों से मिलता है। इसके चलते चुनाव में पारदर्शिता और  चंदों की जांच संभव नहीं हो पाती। हालांकि इस दिशा  में पहल
हो रही है लेकिन उसकी सुस्त चाल से लक्ष्य अभी मीलों दूर है।

राष्ट्रीय दलों की आय पूरे भारतवर्ष से विभिन्न स्त्रोतों से संकलित की गयी है जैसा कि उन्होंने आॅडिट रिपोर्ट में प्रस्तुत किया है। 5 राष्ट्रीय दल जिनके आईटीआर सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं उनके कुल आय रु 299.54 करोड़ (पूरे भारतवर्ष से) है। कुल आय रु 173.58 करोड़ के साथ राष्ट्रीय दलों में से बसपा ने सबसे अधिक आय घोषित की है जो इन 5 दलों के कुल आय का 57.95 फीसदी है। वहीं दूसरे स्थान पर सीपीएम ने रु 100.256 करोड़ घोषित किया है जो राष्ट्रीय दलों के पूरे आय का 33.47 फीसदी है।

 

सभी राष्ट्रीय दलों में से वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान बीजेपी ने सबसे अधिक राष्ट्रीय आय घोषित किया था। पार्टी ने रु 570.86 करोड़ की कुल आय घोषित किया लेकिन वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए अपना आॅडिट रिपोर्ट अभी तक चुनाव आयोग में जमा नहीं किया है। वहीं बात की जाए कांग्रेस की तो उसने वित्तीय वर्ष 2015-16 में रु 261.56 करोड़ की आय घोषित किया लेकिन पार्टी ने अभी तक अपना आॅडिट रिपोर्ट वित्तीय वर्ष 2016-17  के लिए चुनाव आयोग को प्रस्तुत नहीं की है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 के बीच बसपा की आय में 266.32 फीसदी ( रु 126.195 करोड़) की वृद्धि हुई जबकि एनसीपी की आय में 89 फीसदी (रु 8.098) करोड़) की वृद्धि हुई। इसके साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में, वित्तीय वर्ष 2016-17 में, एआईटीसी की आय रु 28.188 करोड़ (-81.52 फीसदी) घटा है जबकि सीपीआई की आय में रु 0.097 करोड़ (-4.46 फीसदी) कमी देखी गयी है।

आय के प्रमुख 3 स्त्रोत

राष्ट्रीय दलों के शीर्ष तीन मुख्य आय स्त्तोतों में दलों ने दान से अधिक धन प्राप्त किया है। बसपा को रु 75.26 करोड़, सीपीएम को रु 36.727 करोड़, एनसीपी को रु 6.62 करोड़ और तृणमूल कांग्रेस को रु 2.17 करोड़ मिला है। इस आय से सीपीएम ने रु 41.23 करोड़ का खर्च प्रशासनिक और सामान्य व्यय में और रु 29.91 करोड़ कर्मचारी लागत में घोषित किया है। वहीं बसपा ने सबसे अधिक व्यय चुनाव खर्च में ( रु 40.97 करोड़)  और प्रशासनिक व सामान्य खर्च में रु 10.809 करोड़ खर्च घोषित किया है।

एडीआर के सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर 2013 को यह घोषित किया कि उम्मीदवारों के शपथपत्र का कोई भी हिस्सा खाली नहीं रहना चाहिए। इसी के तर्ज पर फोर्म 24 ए, ( जोकि राजनीतिक दलों द्वारा रु 20,000 से ज्यादा दान देने वाले लोगों के लिए प्रस्तुत किया जाता है) का भी कोई हिस्सा खाली नहीं रहना चाहिए। क्योंकि राजनीतिक दलों की आय का अधिकतम प्रतिशत (80 प्रतिशत) अज्ञात स्त्रोतों से आता है, दानदाताओं की पूरी जानकारी, सार्वजनिक जांच के लिए आम जनता को उपलब्ध होनी चाहिए। दूसरे देश जैसे भूटान, नेपाल, जर्मनी, फ्रांस, इटली, ब्राजील, बुल्गारिया, अमेरिका और जापान में ऐसा किया जाता है। इन देशों में से किसी भी देश में राजनीतिक दलों की आय स्त्रोत का 80 अज्ञात रहना असंभव होगा। चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए आईसीएआई का यह दिशा निर्देश  है कि राजनीतिक दलों के आॅडिट रिपोर्ट का इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा छानबीन की जानी चाहिए किन्तु इसका पालन नहीं होता है। राजनीतिक दलों को सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत नियमित तौर  पर जानकारी प्रदान करनी चाहिए। ऐसा करने से ही राजनीतिक दल चुनाव प्रक्रिया एवं लोकतंत्र सशक्त होगा।

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अवध विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक। आईआईएमसी से पत्रकारिता में डिप्लोमा, कुरुक्षेत्र विवि से पत्रकारिता में परास्नातक। श्यामा प्रसाद मुखर्जी फाउंडेशन, डीडी किसान एवं वैश्य भारती पत्रिका सहित कई संस्थानों संपादकीय विभाग में कार्य किया है। इन दिनों हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी न्यूज एजेंसी से जुड़े हैं। फिलहाल ‘युगवार्ता’ साप्ताहिक के उप-संपादक हैं।

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