बिहार में अररिया जिले की जोकीहाट विधानसभा सीट उपचुनाव में जदयू से छिन गयी। सीमांचल में अपनीराजनीतिक धाक रखने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं अररिया के दिवगंत सांसद तस्लीमुद्दीन के परिवार काजोकीहाट पर प्रभुत्व रहा है। खुद तस्लीमुद्दीन इस  सीट से चार बार और उनके बेटे अररिया के राजदसांसद सरफराज आलम पांच बार जीते हैं। इस बार सरफराज अपने छोटे भाई शाहनवाज को विधायक बनाने में कामयाबरहे हैं।  मुस्लिम बहुल जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र के इस उपचुनाव में राजद को इसका फायदा राजद–कांग्रेस से नाता तोड़भाजपा से सत्ता में साझेधारी के बाद जदयू को उपचुनाव में दूसरी बार हार का मुंह देखना पड़ा है। राजद के मुकाबलेपहले जहानाबाद में करारी शिकस्त हुई। इस बार जोकीहाट में भी हार का मुंह देखना पड़ा है। राजद को यादव–मुस्लिममतों की गोलबंदी के साथ भाजपा विरोधी दलों की एकजुटता का भी सीधा लाभ मिला है। 243 सदस्यीय विधानसभा मेंअकेले सबसे बड़ा दल  राजद के सदस्यों की संख्या 81 हो गयी है। विपक्ष की बढ़ती ताकत, विरोधियों की एकजुटता औरभाजपा के साथ दूसरी बार दोस्ती के बाद द्वंद्व में फंसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए आगे का रास्ता कठिन होतादिख रहा है।

महागठबंधन सरकार समाप्त होने के बाद राजद विशेष रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर लगातार तीखा हमला बोल रहा है।

लग रहा था कयास

विधानसभा के पिछले चुनाव के समय तस्लीमुद्दीन के अररिया से राजद का सांसद रहते उनके बेटे सरफराज आलमजोकीहाट से जदयू के टिकट पर जीते थे। लोकसभा के उपचुनाव में सरफराज ने जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ने कीपेशकश यह कहते हुए ठुकरा दी थी कि तब मुसलमानों का वोट उन्हें नहीं मिलेगा और वे चुनाव नहीं जीत पायेंगें। इसीकारण उन्होंने जदयू छोड़ने के साथ विधानसभा से भी इस्तीफा कर सीट खाली कर दी थी। उपचुनाव में जहां राजद जीतनेमें कामयाब रहा वहीं जदयू के उम्मीदवार मुर्शिद आलम को लेकर पार्टी की किरकिरी भी होती रही। शुरू में पूर्व मंत्री मंजरआलम बागी बन निर्दलीय चुनावी दंगल में कूद गये। बाद में वे जदयू के पक्ष में चुनावी दंगल से हटने की भी घोषणा करदी। मंजर आलम  दो बार इस सीट से जीत चुके थे और इस बार टिकट के प्रबल दावेदार थे। जदयू ने दल विरोधी कामकरने के आरोप में  मंजर आलम की विधान परिषद की सदस्यता समाप्त कराने की जब कार्रवाई शुरू करवाई तब उन्होंनेखुद परिषद से इस्तीफा कर दिया था। जदयू की ओर से उपचुनाव में जीतने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई।मुख्यमंत्री की चुनावी सभा होने के साथ पार्टी महासचिव आरसीपी सिंह सहित कई मंत्री और अन्य नेता वहां डटे रहे। परतस्लीमुद्दीन परिवार की धाक के आगे जदयू अपना चमत्कार नहीं दिखा पाया। उपचुनाव का नतीजा आते ही विपक्ष नेमुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगने की देर नहीं की। राजनीतिक घटनाक्रम में फिलहालविधानसभा में दूसरा बड़ा दल जदयू और तीसरी बड़ी पार्टी भाजपा सत्तासीन है। महागठबंधन सरकार समाप्त होने केबाद राजद विशेष रुप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर लगातार तीखा हमला बोल रहा है।

विशेष पैकेज का मुद्दा

लोकसभा चुनाव नजदीक आते देख बिहार में  विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज की मांग नये सिरे से बुलंद होनेलगी है। हालांकि यह सर्वदलीय मांग रही है। परंतु  नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जदयू की ओर से इसे विधानसभा चुनावके समय भी प्रमुख मुद्दा बना कर पटना से दिल्ली तक अभियान चलाया था। 15वें वित्त आयोग का अध्यक्ष पद परबिहारी एनके सिंह के होने से बिहार के साथ न्याय की अपेक्षा के साथ फिर यह मांग तेजी से उठने लगी है। मुख्यमंत्रीनीतीश कुमार ने खुद और पार्टी की ओर से बिहार के साथ नाइंसाफी होने की शिकायत के साथ इस मांग को लेकर वित्तआयोग को पत्र लिखा गया है। बयानबाजी तेज हो गयी है। इसको लेकर भाजपा के नेता असहज है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here