पार्टियों का किसानों पर फोकस

भारत की कुल जनसंख्या में 70 करोड़ 20 लाख ग्रामीणों की आय का पहला श्रोत कृषि है। ये जनसंख्या किसी की भी सरकार बना और गिरा सकती है। तमाम मतभेद के बाद भी ये कृषि के मुद्दे पर एकजुट हो जाते हैं। इसीलिए देश के किसानों को खुश करने के लिए सभी पार्टियां उनकी फसलों और उत्पादों के अधिक दाम देने, सस्ते दर पर कृषि ऋण मुहैया कराने, ऋण माफ करने आदि की बातें करने लगी हैं। अब किसान संगठन हर किसान को प्रति माह 18 हजार रुपये दिये जाने की मांग करने लगे हैं। उनका कहना है कि जैसे सरकारी कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी होती रहती है, वैसे ही किसानों को भी कुछ हद तक कर्मचारियों वाली सुविधाएं दी जानी चाहिए। किसान नेताओं का कहना है कि देर से ही सही, लेकिन अब किसानों की समस्याएं राजनीति के केन्द्र में आ गयी हैं।

नोटिस से परेशान डीके शिवकुमार

कर्नाटक कांग्रेस के नेता व संकटमोचक डीके शिवकुमार का दर्द पार्टी आलाकमान भी दूर नहीं कर पा रहा है। राज्य में पार्टी विधायकों को विपक्षी दल से बचाकर कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डीके शिवकुमार को इन दिनों केन्द्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई, इंकम टैक्स व ईडी से रोजाना लगभग दो नोटिस मिल रहे हैं। नोटिसों का जवाब देने के लिए उन्होंने 40 कर्मचारी लगा रखे हैं। उनसे 10 से 15 वर्ष पहले के विदेश दौरे तक का विवरण मांगा जा रहा है। इसी तरह कर्नाटक में उनके रिजार्ट में कई वर्षों से आने वाले लोगों के भुगतान आदि का विवरण मांगा जा रहा है। जिससे डीके शिवकुमार बहुत परेशान हैं। लेकिन उनके आका भी उनकी कोई मदद नहीं कर रहे हैं।

क्या कर पाएंगे झडफिया

सुनील भाई ओझा गुजरात के भावनगर के रहने वाले हैं। उनको 2014 के बाद बदले परिवेश में उत्तर प्रदेश बीजेपी का सह प्रभारी बनाया गया था। अभी 26 दिसम्बर उत्तर प्रदेश का प्रभारी गोवर्धन भाई झडफिया को बनाया गया है। वो भी गुजरात के भावनगर जिले के ही हैं। उनको ओम माथुर की जगह उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। वहीं ओम माथुर को गुजरात का प्रभारी बना दिया गया है। ओम माथुर कई महीने से यूपी में निष्क्रिय थे। क्योंकि यहां सब कुछ पार्टी अध्यक्ष और उनके चहेते भूपेन्द्र यादव तथा संगठन मंत्री सुनील बंसल देखते थे। ऐसे यूपी में सर्वेसर्वा द्वारा नियुक्त किये गये झडफिया क्या कर पाते हैं, इस पर सबकी निगाह है।

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