अट्ठाइस नवंबर को होने जा रहे मिजोरम विधानसभा चुनाव में राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी सत्ता वापसी के लिए ईसाइयत का सहारा ले रही है। कांग्रेस की कोशिश है कि किसी भी तरह से मिजोरम की सत्ता में वापस आकर अगले लोकसभा चुनाव के लिए यहां से एक जमीन तैयार किया जा सके। उल्लेखनीय है कि पूर्वोत्तर के एकमात्र राज्य मिजोरम में ही कांग्रेस का शासन बचा हुआ है। शेष राज्यों में एक के बाद एक कांग्रेस का सफाया हो चुका है। चुनाव प्रचार के शुरुआती दिनों से ही कांग्रेस बीजेपी पर आरोप लगाती आ रही है कि यदि राज्य में बीजेपी की सरकार बनती है, तो ईसाइयत पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

28 नवंबर को राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस का पूरा जोर अपनी सत्ता बनाए रखने में हैं। इसके लिए वह कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है।

कांग्रेस के छोटे से लेकर बड़े स्तर तक के नेता पूरे चुनाव के दौरान इसी मंत्र का जाप करते देखे जा रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का राजधानी आइजोल व चम्फाई में कार्यक्रम आयोजित हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान राहुल आरएसएस और बीजेपी पर एक के बाद एक आरोप लगाते रहे। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के इन कार्यक्रमों का संचालन स्थानीय चर्च द्वारा गठित संगठन मिजो पीपुल्स फोरम (एमपीएफ) के स्थानीय अध्यक्ष ने किया। अपने संबोधन में भी परोक्ष रूप से तारीफ कर राहुल गांधी ने सिविल सोसायटी तथा स्थानीय संगठनों के साथ ही चर्च की जमकर वाहवाही बटोरी। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 10 वर्षों के शासन काल में राज्य में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हो चुकी है। 2008 में जहां यह आमदनी 57 हजार थी, वहीं आज मिजोरम में प्रति व्यक्ति आय 1.15 लाख रुपये हो चुकी है। जो राष्ट्रीय औसत से 20 फीसदी अधिक है। उन्होंने इस विकास के लिए कांग्रेस की सरकार के साथ ही सिविल सोसायटी और चर्च की भी तारीफ की। राहुल गांधी का पूरा का पूरा कार्यक्रम चर्च और ईसाइयत के इर्द-गिर्द घूमता देखा गया। इधर, कांग्रेस की ईसाइयत कार्ड के विरुद्ध बीजेपी विकास का कार्ड खेलने में लगी हुई है। चुनाव के दौरान बीजेपी नेतृत्व वाली केंद्र और अन्य राज्यों की सरकार के कार्यकाल में हुए विकास संबंधी कार्यों से लोगों को अवगत कराने में लगे हुए हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यदि मिजोरम में भी बीजेपी की सरकार बनती है, तो यहां उद्योग-व्यापार का एक नया अध्याय शुरू हो सकेगा। साथ ही दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ बढ़ने वाले व्यापारिक संबंधों का सीधा लाभ मिजोरम को प्राप्त होगा। मिजोरम के सड़कों की खस्ता हालत, राज्य में बेरोजगारी की गंभीर समस्या, भुखमरी, ढांचागत विकास की कमी आदि को बीजेपी नेता मुद्दा बनाकर कांग्रेस के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार पर निशाना साध रहे हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दो बार, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कई केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय स्तर के बीजेपी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य में चुनाव प्रचार कर चुके हैं। अपने संबोधन में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की जनता को यह आश्वस्त कराया कि बीजेपी के शासनकाल में सबका साथ सबका विकास के लिए काम करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिजोरम के लोगों को यह दिखाया कि उनकी सरकार किस तेजी के साथ काम कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पूर्वोत्तर और खासकर मिजोरम के प्रति बीजेपी तथा उनकी सरकार का किस प्रकार का झुकाव रहा है। राज्य में बीजेपी की सरकार बनी तो राज्य के अवरुद्ध हो चुके विकास कार्यों में तेजी आएगी। इसी बीच चुनाव आयोग चुनाव की तैयारियां पूरी कर चुका है। मतदान कर्मियों को प्रशिक्षण, ईवीएम मशीनों की जांच के साथ ही अन्य सभी प्रकार की चुनावी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण तरीके से मतदान करवाने के लिए चुनाव आयोग व्यापक पैमाने पर सुरक्षाबलों की तैनाती की भी व्यवस्था कर चुका है। इसी बीच स्थानीय चर्च एवं सिविल सोसायटी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे इस बात का भी ध्यान रखते हुए चुनाव आयोग अपने स्तर पर कार्य कर रहा है। राज्य में 28 नवंबर को मतदान एवं 11 दिसंबर को मतगणना होना है। देखना यह है कि अंतिम समय तक राजनीति क्या रुख अख्तियार करती है।

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