राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने जब 28 नवम्बर 2016 को उदयपुर में स्थापित प्रताप गौरव केन्द्र का लोकार्पण किया था, तो युवाओं ने भारतमाता और प्रताप-शिवा के जयकारों से गगन गुंजा दिया था।  संयोग ही रहा कि इस स्थल का शिलान्यास भी 18 अगस्त 2008 को भागवत ने ही किया था, तब वे संघ के सरकार्यवाह थे। मेवाड़ की धरा पर मेवाड़ की भक्ति और शक्ति के इतिहास का जीवंत अहसास कराने वाला यह केन्द्र आज राष्ट्रीय तीर्थ के समान श्रद्धा पा रहा है। इसका विशेष कारण यहां स्थापित भारतमाता की प्रतिमा है। मेवाड़ के इतिहास को जानने का यह बड़ा केंद्र बन गया है। यहां की सकारात्मक, संकल्पित और देश को समर्पित शक्ति ही है जो सभी को यहां खींच लाती है। राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह हों, राजनेता अमर सिंह हों, मीडिया के जाने माने नाम सुभाष चन्द्रा हों, और विशेष रूप से राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यह फेहरिस्त काफी लम्बी है। पिछले ही साल 29 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने उदयपुर प्रवास के दौरान प्रताप गौरव केन्द्र का अवलोकन किया।

मेवाड़ की स्थापना के जनक हारित ऋषि और बप्पा रावल की गाथा से लेकर पन्नाधाय के बलिदान की याद दिलाते हुए हल्दीघाटी के युद्ध में हाथी की चिग्घाड़ और घोड़ों की टापों की गूंज को यह स्थल अपने में समेटे हुए है। यह स्थल मेवाड़ का पहला ऐसा केन्द्र बन गया है जहां पर्यटक मेवाड़ की शौर्यगाथा से न केवल परिचित हो रहे हैं, बल्कि इसकी अनुभूति उनके लिए यादगार बन रही है। गौरव केन्द्र सिर्फ मेवाड़ तक ही सीमित नहीं है, यहां भक्त शिरोमणि मीरा बाई और  छत्रपति शिवाजी के भी दर्शन हो रहे हैं।

हल्दीघाटी विजय युद्ध दीर्घा में 100 प्रतिमाएं लगाई गईं हैं, जो महाराणा प्रताप के शस्त्रागार मायरा की गुफा में गुप्त मंत्रणा से लेकर पूरे हल्दीघाटी युद्ध तक के दृश्य बताती हैं। राजस्थान गौरव दीर्घा में राजस्थान के 24 महापुरुषों की आदमकद प्रतिमाएं लगाकर उनका व्यक्तित्व और कृतित्व लिखा गया है।

फतहसागर झील से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर अरावली की पहाड़ी ‘टाइगर हिल’ पर इतिहास और भारतीय संस्कृति के मूल्यों के दर्शन के साथ हजारों पौधे भी पर्यटकों को सुकून का अहसास कराते हैं। इसे पूरा देखने में पर्यटक को कम से कम तीन घंटे का समय लगता है। दर्शकों का सामान सुरक्षित रहे इस के लिए क्लॉक रूम, चाय व अल्पाहार का प्रबंध भी है। दर्शकों को इतिहास की जानकारी के लिए पुस्तकें, चित्र, मोमेन्टो, सी.डी. आदि सामग्री खरीदने का केन्द्र भी है।

प्रतिदिन 100 से अधिक पर्यटक

केन्द्र पर पर्यटकों के मार्गदर्शन का कार्य कर रहे मनीष मेघवाल बताते हैं कि यहां प्रतिदिन का औसत 100 के आसपास है। शनिवार और रविवार को राजकीय अवकाश होने के कारण यह संख्या बढ़कर 500 तक भी हो जाती है। विशेष अवसरों पर यह आंकड़ा दो हजार तक को पार कर चुका है। गत वर्ष महाराणा प्रताप जयंती पर यह संख्या 3000 तक पहुंच गई। इसी तरह 26 जनवरी और 15 अगस्त को भी यह आंकड़ा हजार के पार रहा। राजस्थान के विभिन्न जिलों सहित बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, पंजाब, असम, झारखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, कर्नाटक, तमिलनाडु सहित कई राज्यों से भी पर्यटक यहां आ रहे हैं। गत दिनों विशाखापट्टनम से लगभग 450 पर्यटक यहां पहुंचे और उन्होंने यहां पर दिखाए जाने वाले विभिन्न शो को देखा और अभिभूत हुए। इसी प्रकार गत दिनों स्वामीनारायण मंदिर अक्षरधाम से आए युवा साधक साधिकाओं ने इस प्रताप गौरव केंद्र को राष्ट्रीय धरोहर बताया, साथ ही कहा कि हर भारतवासी को एक बार यहां आकर प्रताप गौरव केंद्र के दर्शन अवश्य करने चाहिए।

25 बीघा में बने प्रताप गौरव केन्द्र को एक सड़क दो हिस्सों में बांटती है। एक हिस्से में ऊंची पहाड़ी है जिस पर महाराणा प्रताप की बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की गई है। यह प्रतिमा 57 फीट ऊंची, 40 टन वजनी अष्ट धातु की बनाई गई है। केन्द्र से जुड़े कार्यकर्ता बताते हैं कि महाराणा प्रताप 57 वर्ष की आयु तक जीवित रहे, इसलिए इस प्रतिमा की ऊंचाई 57 फीट रखी गई है और बैठी हुई मुद्रा के पीछे उनके संघर्षपूर्ण जीवन को दर्शाया गया। प्रतिमा के नीचे से निरंतर जल प्रवाह रखा गया है। इस जल प्रवाह को गंगा मैया के प्रतिरूप में दशार्या गया है। प्रतिमा के समीप ही 500 दर्शकों की क्षमता वाला कुंभा सभागार बनाया गया है जिसमें सेमिनार आयोजन के साथ फिल्म का भी प्रदर्शन भी किया जा सकता है। महाराणा प्रताप की प्रतिमा के सामने वाले हिस्से में मेवाड़ दर्शन दीर्घा सहित हल्दीघाटी विजय युद्ध दीर्घा, मेवाड़ स्फूर्ति दीर्घा, भारत दर्शन दीर्घा, राजस्थान गौरव दीर्घा बनाई गई है। इसी तरह मेवाड़ स्फूर्ति दीर्घा में मैकेनिकल झांकियां सजाई गई हैं। इसी हिस्से में 250 दर्शकों की क्षमता का आधुनिक सभागार बनाया गया है, जहां पर्यटक मेवाड़ के इतिहास से जुड़ी 35 मिनट की फिल्म देख सकते हैं।

रोबोट देता है जानकारी

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन, प्रताप गौरव केंद्र में स्थित हल्दीघाटी युद्ध दीर्घा, मैकेनिकल शो में मेवाड़ की लगभग 9 घटनाओं को रोबोट के माध्यम से 18 मिनट में जाना जा सकता है।

लाइट एंड साउंड शो

इस शो के माध्यम से पर्यटक 18 मिनट में संपूर्ण भारत के दर्शन एवं 140 महापुरुषों के जीवन से रू-ब-रू होते हैं। यही नहीं भारत के तीर्थ, पवित्र नदियां व पर्वतों के बारे में भी जानकारी मिलती है।

6 माह में 11 करोड़ एकत्र

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वर्ष 2002 में इस केन्द्र की परिकल्पना पर आरंभिक कार्य शुरू किया था। अहमदाबाद के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा एवं उदयपुर के इंजीनियर गोविन्दसिंह टांक ने इसकी रूपरेखा तैयार की। संघ के वरिष्ठ प्रचारकों सुरेशचंद्र, प्रकाशचंद्र और दुर्गादास ने इस केन्द्र को मूर्तरूप देने में निरंतर कार्य किया। राजस्थान के स्वयंसेवकों ने इसके लिए धनसंग्रह का बीड़ा उठाया और उस वक्त छह माह की अवधि में 11 करोड़ रुपये का संग्रहण एक कीर्तिमान बन गया।

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