रद ऋतु जैसी मनोहर ऋतु का आगमन हो गया। आकाश साफ, धूप मध्यम और हवा कुछ ठंडी बह रही है। फूला हुआ कास झूम रहा है। ऐसे ही समय में त्योहारों का आगमन होता है। शारदीय नवरात्र के साथ विजय दशमी की तैयारियां चल रही हैं। सुबह से शाम तक भक्तिमय संगीत के कार्यक्रम हो रहे हैं। जगह-जगह रामलीला मंचन से लोग उत्साहित और आनंदित हो रहे हैं। इस भक्तिमय माहौल से देश की राजधानी दिल्ली भी अछूती नहीं है। लव कुश रामलीला समिति की ओर से दिल्ली के लालकिले के पास 10 अक्टूबर की शाम शोभा यात्रा निकाल कर रामलला की पूजा अर्चना के साथ रामलीला का मंचन शुरू हो चुका है।

दशहरे पर रावण का पुतला सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहता है। कई लोग पीढ़ियों से इन पुतलों के निर्माण में लगे हैं। वे अपनी कला के माध्यम से इस त्योहार को जीवंत बना रहे हैं।

इन रामलीलाओं के भव्य आयोजनों के बीच रावण के पुतलों का निर्माणकार्य भी प्रगति पर है। हरियाणा के रहने वाले मनोज कहते हैं कि हम वर्षों से दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रामलीला में रावण के पुतले बनाने का कार्य करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि जब से यहां रामलीला शुरू हुई है, तब से हमारे परिवार के लोग ही रावण का पुतला बनाते रहे हैं। पहले हमारे दादा-बाबाओं ने बनाया और अब हम बना रहे हैं। हमारे बच्चे भी इस काम में आगे आए हैं। मनोज का बेटा मुकेश कहता है कि हम लोगों ने दिल्ली के प्रीतमपुरा में रावण के पुतलों को बनाने का कार्य एक महीने पहले से शुरू कर दिया था।

इस बार हमने 35 से 40 पुतले बनाए हैं। हमारे पुतले दिल्ली सहित हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल के अनेक हिस्सों में जाते हैं। विशेष आर्डर पर हम वहां जाकर पुतले बना आते हैं। इस बार अब तक हम लोगों ने सबसे महंगा रावण का पुतला देहरादून के लिए बनाया है। इस पुतले को आप देहरादून के परेड ग्राउंड में देख सकते हैं। इस पुतले को हम लोगों ने 3 लाख 50 हजार में बेचा है। इसकी लागत के बारे में पूछने पर मुकेश ने बताया कि अब पहले जैसी बात नहीं रही। सारे सामान महंगे हो चुके हैं। वहीं इन पुतलों को खरीदने वाले बहुत अधिक पैसा देना नहीं चाहते। वर्षों के संबंध के कारण हम लोग भी नफा-नुकसान के बारे में कम ही सोचते हैं। हमारा उद्देश्य रहता है कि बेहतर कलाकारी दिखाएं।

दिल्ली के परेड ग्राउंड में हो रही रामलीला के लिए रावण बना रहे हरीयाणा के  मनीष कहते हैं कि रावण का पुतला बनकर तैयार हो चुका है। वह कहते हैं कि बचपन से ही हम लोगों ने यह कार्य शुरू कर दिया था। हमारे परिवार के लोग भी यही करते आ रहे हैं। मनीष कहते हैं कि मेरे पिता मोहनलाल अभी हिमाचल प्रदेश गए हैं, वहां भी रावण का पुतला बनाने का कार्य हम लोग ही करते हैं। लव कुश रामलीला समिति के आयोजकों का कहना है कि हर साल हम रामलीला में कुछ न कुछ अलग और बेहतर करने की कोशिश करते हैं। यहां रावण दहन के दिन काफी भीड़ होती है और हमारे कारीगर बहुच अच्छे से रावण के पुतले का निर्माण करते हैं। पूरे मैदान में यह पुतला आकर्षण का केंद्र रहता है। खासकर बच्चों के लिए यह पुतला देखना और फोटो खिंचवाना आकर्षण का केंद्र रहता है। पहले दिन रामलीला देखने पहुंचे रोहित सुसत्या का कहना है कि रामलीला मैदान और लालकिले की रामलीला सबसे अच्छी है। हम वर्षों से इसे देखने अपने परिवार और बच्चों के साथ आते हैं। यहां का रावण दहन जरूर देखते हैं। बहुत बड़ा रावण लाया जाता है। कारीगर रावण को इतने अच्छे तरीके से बनाते हैं  कि जैसे सच का रावण मैदान में उतर आया हो।

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