कांग्रेस के लिए किला कही जाने वाली कसौली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के राजीव सैजल ने ऐसी सेंध लगाई कि वे प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बन बैठे। सैजल ने पहली बार 2007 में भाजपा के टिकट पर कसौली (आरिक्षत) से विधानसभा का चुनाव लड़ा और लगातार जीतते ही गए। भाजपा से जुड़ने से पहले सैजल की कोई बड़ी राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी। पहचान के लिए मात्र इतना ही था कि इनके माता-पिता भाजपा से जुड़े थे। वे दोनों अपनी पंचायत के प्रधान रह चुके हैं। 2017 में जब वे कसौली से तीसरी बार विधायक बने, तो उन्हें जयराम ठाकुर की सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व सहकारिता मंत्रालय की कमान मिली। शांत व हंसमुख स्वभाव के सैजल को 2017 में भारतीय छात्र संसद के द्वारा बेस्ट युवा विधायक का सम्मान भी दिया गया। राजनीति में आने से पहले सैजल आयुर्वेद के डाक्टर थे। ब्यूरो चीफ सुनील शुक्ला ने डॉ. राजीव सैजल से लंबी बातचीत की, प्रस्तुत है यहां बातचीत के अंश।


० भाजपा की सरकार बनते ही कैबिनेट का पहला निर्णय सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए आयु सीमा कम करना था। इससे कितना लाभ लोगों को हुआ?

सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए अब आयु सीमा 80 साल से कम करके 70 साल कर दी है। इससे करीब 1.50 लाख लोगों को लाभ हुआ है। इस पर करीब 200 करोड़ का खर्च बढ़ गया है। यह मुख्यमंत्री का संकल्प था। उनका फील्ड का अनुभव था। जब हम क्षेत्र में जाते थे, तो बुर्जुग अपनी फरियाद लेकर आते थे, लेकिन हम कुछ नहीं कर पाते थे।

० सरकार बनने के बाद आपके मंत्रालय की छह महीने की क्या उपलब्धियां रही है?

विभाग की जो भी योजनाएं हैं, उनका सीधा लाभ लोगों को मिले इस दिशा में काम किया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा के तहत मिलने वाली पेंशन अब एडवांस में दी जा रही है। पहले यह तीन महीने समाप्त होने के बाद एक साथ मिलती थी। अब इसे पहले ही महीने एडवांस दे दिया जाता है। इससे लोगों को अब पेंशन का इंतजार नहीं करना पड़ता। इसके अतिरिक्त विकलांगों को भी पेंशन उनके घर पर पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। अनुसूचित जाति विवाह योजना के तहत मिलने वाली राशि की समीक्षा भी की जा रही है।

० प्रदेश में चल रहे आंगनवाड़ी केन्द्रों को अपना भवन कब तक नसीब होगें। इसके अतिरिक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी कब तक होगी?

इस दिशा में केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी के साथ बातचीत की है। आंगनवाड़ी भवन के लिए पैसा केन्द्र से आता है। विधायक भी अपनी निधि से भवन निर्माण के लिए पैसा दे सकते हैं। प्रदेश सरकार इसके लिए एक लाख तक राशि उपलब्ध करवाती है। जबकि मनरेगा के माध्यम से पांच लाख की राशि भवन निर्माण पर खर्च की जा सकती है।

० सहकारी बैंकों का एनपीए एक बड़ा मुद्दा है। इस पर नकेल कसने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

बैंकों में एनपीए न खड़ा हो, इसलिए समय-समय पर बैंकों की कार्यशैली की समीक्षा की जाएगी। बीओडी में एनपीए पर खास नजर रखने की योजना है। व्यवसायिक कौशल से जुड़े लोगों की बैंकों में सेवाएं लेने की योजना पर विचार चल रहा है। राजनीतिक आधार पर लोन स्वीकृत न हो इस पर भी कई स्तरों पर काम किया जाएगा। ऋण देना बैंक का काम है, लेकिन बैंक यह भी सुनिश्चित करें कि ऋण को वापिस किया जाए। ऋण वसूली पर सख्ती की जाएगी। राजनीतिक दबाव के कारण पिछली सरकार में कई ऋण दिए गए। भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जो पूर्व में हुआ है वह आगे न हो।

० बेरोजगारी प्रदेश में एक बड़ा मुद्दा है। सहकारिता के माध्यम से स्वरोजगार देने की कोई योजना है?

मुख्यमंत्री स्वालंबन योजना इसी दिशा में एक कदम है। जिसके तहत 40 लाख रुपये तक का ऋण देने का प्रावधान है। छोटे लोन सहकारी बैंकों के माध्यम से दिए जा सकते हैं। बैंक साथ में यह भी देखें कि जिस काम के लिए ऋण दिया जा रहा है, वो हो भी रहा है या नहीं। इसके अतिरिक्त किसी भी व्यवसाय के लिए परामर्श देना भी एक निर्णायक कदम होता है। स्वरोजगार में व्यवसाय शुरू करने से पहले परामर्श बहुत आवश्यक है।

० प्रदेश की सहकारी समितियों में कई घोटाले सामने आए हैं। ऐसा क्यों?

गांवों में सहकारी सोसाइटी अच्छा काम कर रही हैं। इनका लोगों के साथ तालमेल भी अच्छा है। जो डिफाल्टर हैं, उनके विरुद्ध सोसाइटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। आखिर यह लोगों का ही पैसा है।

सहकारिता का मूल आधार ईमानदारी है। स्वरोजगार को लेकर सहकारिता एक बड़ा योगदान कर सकती है। हमें इस दिशा में नौजवानों का रुख बदलना पड़ेगा।

० बैंक भर्ती घोटाले की जांच कहां तक पहुंची है?

शिमला, कांगड़ा और ग्रामीण कृषि विकास बैंकों की भर्ती में जो अनियमिताएं सामने आई हैं। उनकी विभागीय जांच पूरी हो गई है। विभागीय जांच में कई कमियां सामने आई हैं। अब मामला जांच के लिए विजिलेंस को गया है। जांच में पाया गया कि नाबार्ड और आरबीआई की गाइडलाइन को अनदेखा किया गया है। इसके अतिरिक्त भर्ती में धांधली और कई जगह पद के दुरुपयोग की बात पाई गई है। अगर जरूरत पड़ी तो सीबीआई जांच पर भी विचार किया जाएगा।

० कांगड़ा सहकारी बैंक का चुनाव कब तक हो पाएगा।

मामला उच्च न्यायालय में है। निदेशक मण्डल के गठन की प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा। चेयरमैन को हटाया गया था। चुनाव प्रक्रिया पर कोर्ट से कोई रोक नहीं है। जल्द ही चुनाव की घोषणा कर दी जाएगी। हाईकोर्ट ने जो भी आपत्तियां लगाई थीं। उन्हें दूर किया जा रहा है। चुनाव के बाद बीओडी का गठन कर दिया जाएगा।

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