स्वामी निरंजनानंद सरस्वती दुनिया के एकमात्र ऐसे योग मनीषी हैं जिन्होंने अपने गुरु स्वामी सत्यानंद सरस्वती के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कभी सत्ता या ग्लैमर का सहारा नहीं लिया। आज मुंगेर दुनिया की प्रमुख योग नगरी है, तो इसका श्रेय उन्हें ही जाता है। अपने मिशन में जुटे स्वामी निरंजनानंद सरस्वती को जब पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा हुई, तो वे इसे लेने दिल्ली नहीं गए। मुंगेर स्थित बिहार योग विद्यालय के परिसर में ही उन्हें यह सम्मान जिलाधिकारी ने सौंपा था। स्वामी बार-बार कहते भी हैं, ‘योगी-संन्यासी का सत्ता के चकाचौंध से क्या वास्ता?’ ऐसे योगी से कुमार कृष्णन ने बातचीत की। पेश हैं इसके महत्वपूर्ण अंश।

योग क्या है?

मेरी दृष्टि में योग के चार मुख्य सोपान हैं जिनमें पहला है योग का अभ्यास। आपकी कोई अपेक्षा, कामना या महत्वाकांक्षा रहती है, जिसकी पूर्ति के लिए आप योग सीखते हैं। यह कामना तनाव से मुक्ति पाने, शरीर को लचीला बनाने, एकाग्रता बढ़ाने या पीठ दर्द से छुटकारा पाने की हो सकती है। जब आप अपनी किसी कामना या आवश्यकता को पूरा करने के लिए योग की शरण में जाते हैं, तो यह योगाभ्यास कहलाता है।

योग का वैज्ञानिक आधार क्या है?

विज्ञान समझने का प्रयास करता है जबकि योग अनुभव दिलाता है, दोनों में यही अंतर है। आप आसमान में डूबते हुए सूर्य की लालिमा को देखते हो, जो बादलों को विभिन्न रंगों में लाती है और आप सूर्यास्त के सौंदर्य का बखान करते हैं, लेकिन वैज्ञानिक विज्ञान के दायरे में सौंदर्य की कल्पना एटोमिक स्तर के प्रखंडों और प्रक्रिया में की जाती है। सौंदर्य का आभास होता नहीं है, लेकिन विज्ञान के द्वारा इस बात को समझ पाते हैं कि सूर्यास्त का क्या कारण है? विज्ञान के द्वारा जान पाते हैं कि योग की उपयोगिता क्या है? बिहार योग विद्यालय के माध्यम से बहुत से चिकित्सात्मक और वैज्ञानिक अनुसंधान हुए हैं। कौन सा अभ्यास किस रोग में सहायक हो सकता है? योग के आसन और प्राणायाम से शरीर को किस प्रकार ऊजार्वान बना सकते हैं? इस तरह के प्रश्न खोजे जाते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में योग को लेकर कई विश्वविद्यालय खुल गए हैं। बिहार योग विद्यालय उनसे किस रूप में अलग है?

यहां तीन परंपराओं का समावेश होता है। एक परंपरा है योग की, जिसके लिए बिहार योग विद्यालय या बिहार योग पद्धति विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। भारत और विश्व के विभिन्न योग केन्द्रों को देख लें तो पाएंगे कि अधिकांश योग केन्द्र केवल आसन और प्राणायाम की शिक्षा देकर योग का प्रचार करते हैं। एक अभ्यास को करते समय चाहे आसन हो या प्राणायाम हो, क्रिया योग हो, कुंडलिनी हो, अंतर्मौन हो, चाहे धारणा हो, इन सभी अभ्यासों में शरीर का, मन का और प्राणों का संबंध स्थापित करना जरूरी रहता है। कोई भी अभ्यास यंत्रवत नहीं रहता है। केवल सिखलाने के दृष्टिाकोण से नहीं बल्कि आपकी प्रगति और आवश्यकता को देखते हुए जो उपयुक्त है, बताया जाता है।

देश-दुनिया में योग को लेकर जागरुकता देखने को मिल रही है। इस पर आपकी क्या राय है?

योग की विभिन्न शैलियों और किस्मों का बहुत तेजी से प्रचार हुआ है। आज दुनिया भर में 75 से अधिक योग ब्रांड हैं जिनमें डाग योगा, कारेयोकी योगा, हिल्ली बिल्ली योगा और एरियल योगा जैसे नाम प्रचलित हैं। योग की ये शैलियां केवल आसनों पर आधारित हैं। ऐसे आसन जो बिना किसी पारंपरिक श्रोत या समझ के बेतरतीब ढंग से इस्तेमाल किए जाते हैं। समय के साथ योग ने बृहत और आंदोलन का रूप ले लिया, पर साथ ही इसके विशुद्ध स्वरूप में कुछ विकृतियां भी प्रवेश कर गयी हैं। अमेरिका में योग पर सालाना 27 अरब डालर खर्च किए जाते हैं। वहां के छह फीसदी से अधिक नागरिक यानी दो करोड़ लोग योग का अभ्यास करते हैं। यही रफ्तार रही तो 2032 तक वहां का हर नागरिक योग कर रहा होगा। पिछले पांच सालों के दौरान योग पर हुए खर्च में 87 फीसदी वृद्धि हुई है। भारत में योगाभ्यासियों की संख्या में 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।

इन दिनों आप किस प्रयोग में जुटे हैं?

यौगिक विधियां किस प्रकार लोगों की जरूरतों को पूरा कर सकती है। योग प्रशिक्षण का अगला चरण कैसा होना चाहिए। यौगिक अनुभव को गहन बनाना, यही मुख्य ध्येय बिंदु के रूप में उभर कर समाने आया है। लोगों की भावी अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मैंने योगपीठ में प्रचलित पाठ्यक्रमों को संशोधित और संवर्द्धित किया। इस बात का ख्याल रखा गया है कि योग का मूल लक्ष्य और उद्देश्य दृष्टि से ओझल न हो जाए। हमारा प्रयोजन योग का विकास है।

बिहार योग विद्यालय का लक्ष्य क्या है?

बिहार योग विद्यालय ने अपने संकल्प के पहले अध्याय में योग का हर

देश, हर धर्म, जाति, समाज और समुदाय में प्रचार किया। भावी

कार्यक्रम के तहत बिहार योग विद्यालय द्वारा पूरे देश में 450 योग केंद्र खोले

जायेंगे। इन योग केंद्रों के प्रशिक्षकों के संरक्षण व देखरेख में स्कूलों में योग कार्यक्रम चलाया जायेगा।

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