डॉ.एच.आर. नागेन्द्र योग के क्षेत्र में आज एक महत्वपूर्ण नाम है। सातवें दशक में नासा से इस्तीफा देकर योग की तरफ मुड़े। उसके बाद योग में ऐसा रमे कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इनके प्रशंसक हैं। वे स्वामी विवेकानन्द योग विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। इन दिनों वे विश्व योग दिवस के विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष और भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे कई योग कार्यक्रमों के भी कर्ताधर्ता हैं। डॉ. नागेन्द्र से यह बातचीत कृष्णमोहन सिंह ने की है। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश-

आपकी नजर में योग दिवस की तीन वर्ष की उपलब्धियां क्या हैं?

सबसे बड़ी उपलब्धि है कि योग पूरे विश्व में भारत और इसकी संस्कृति का अनमोल प्रतीक बन गया है। इसके अद्भुत ज्ञान, विरासत, धरोहर का सटीक वाहक बन गया है।

योग दिवस मनाने का जो मूल उद्देश्य था, उसमें कितनी सफलता मिली?

सफलता तो उत्साहवर्धक है, लक्ष्य बहुत बड़ा है। मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग, मोटापा, तनाव इन सब पर इसके जरिये नियंत्रण करना है। यह तभी संभव है जब इस देश का हर परिवार योगमय जीवन जीने लगे। योग-आसन, प्राणायाम, संयम को अपने दिनचर्या का अति आवश्यक हिस्सा बना लें।

आपकी संस्था द्वारा चलाए जा रहे केन्द्र को, सरकार के प्रोजेक्ट मधुमेह मुक्त भारत के डाटा के आधार पर, मधुमेह रोग के उपचार का मानक बनाया जाना था। क्या प्रगति है?

हां, इस प्रोजेक्ट के जरिये विश्व में अब तक इकट्ठा किए गए सबसे अधिक नमूनों की गणना, परीक्षण, विश्लेषण चल रहा है। इससे अमेरिका व अन्य देशों के मधुमेह के बड़े-बड़े डॉक्टर भी जुड़े हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सहयोग कर रहा है। इस पर एक सर्वमान्य मानक तैयार हो जाएगा। उसके आधार पर उपचार का एक प्रोटोकाल तैयार होगा।

ऐसी प्रक्रिया किसी और रोग के लिए अपनाई जाएगी?

हां, कैंसर के उपचार के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जायेगी। इस वर्ष से इसके लिए शिविर लगाने, नमूना लेने का कार्य शुरू हो गया है।

क्या आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योग गुरु हैं?

नरेन्द्र मोदी जी जब ‘विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान’ (व्यासा), प्रशांति में शेषाद्री जी से मिलने आते थे, तो मुझको वैज्ञानिक तरीके से योग पढ़ाते, योग पर शोध करते देखते थे। उसमें वह रुचि लेते थे। जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो मैं उनसे मिला और मंत्रियों, विधायकों और अफसरों के लिए योग का शिविर कराने का सुझाव दिया। वह राजी हो गये। उसके बाद मैं वहां हर साल शिविर लगाने लगा। मिलने पर मोदी जी योग पर नया क्या शोध चल रहा है? इसके बारे में पूछते थे। मेरी योग पर लिखी पुस्तकें पढ़ते थे। वह खुद भी योग करने लगे। अब तो वह नियमित रूप से सुबह एक घंटे योग करते हैं। दिन में भी कार्य के दौरान बीच-बीच में कुर्सी पर बैठे-बैठे ही कुछ आसन, प्राणायाम कर लेते हैं। लंबी हवाई यात्रा के समय भी वह प्रणायाम आदि करते रहते हैं। वह योग में हो रहे हर नये शोध के बारे में जानकारी लेते रहते हैं। इस तरह उन्होंने योग को अपने जीवन में उतार लिया है। इसलिए लगातार बिना थके इतनी मेहनत कर पाते हैं।

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