पंचायती श्रीनिरंजनी अखाड़ा के महामण्डलेश्वर स्वामी महेशानन्द गिरि ‘चर्म रोग मुक्तभारत’ की संकल्पना को लेकर कार्य कर रहे हैं। उनका आयुर्वेद पर गहन अध्ययन है। वेभारतीय चिकित्सा पद्धति को नष्ट किये जाने से दुखी हैं। स्वामी महेशानन्द गिरि से युगवार्ताके उत्तर प्रदेश प्रतिनिधि राजेश तिवारी ने बातचीत की।

  •  अखाड़ा और अखाड़े की परम्परा क्या है?

अखाड़ा आद्य शंकराचार्य के आह्वान से बना। जब इसकी रचनाहुई उस समय सनातन धर्म बहुत संकट में था। सभी सनातन धर्मी बौधिष्ठ बन रहे थे। अखाड़े का मतलब होता है- कुश्ती लड़ने का स्थान। पूज्य शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाड़ों का गठन किया।

  • अखाड़े का संगठनात्मक ढांचा क्या है?

अखाड़े में भी प्रशासनिक संगठनात्मक ढांचा की तरह हीव्यवस्थाएं हैं। जैसे पुलिस में कांस्टेबल की व्यवस्था है, वैसे ही हमारे यहां नागा संन्यासी हैं। अखाड़े में क्रमश: नागा संन्यासी,कोतवाल, थानापति, सेनापति, महन्त, श्रीमहंत, मण्डलेश्वर,महामण्डलेश्वर, आचार्य महामण्डलेश्वर तथा शंकराचार्य की पदोन्नति परम्परा है। नागा शस्त्र लेकर चलता है, कोतवाल चांदी की छड़ी लेकर चलता है, जिसे धर्मध्वजा कहते हैं। थानापति का काम है, सभी की देखरेख करना और सेनापति को रिपोर्ट करना।

  •  शाही स्नान में अखाड़े के नहाने की परम्परा क्या है?

प्रयागराज के शाही स्नान में पहले श्री महानिर्वाणी, हरिद्वार में श्रीनिरंजनी, उज्जैन में जूना तथा नासिक में उदासीन अखाड़ेके संन्यासी पहले स्नान करते हैं। 13 अखाड़ों की व्यवस्थामें शैव के सात अखाड़े पहले तथावैष्णव के छह अखाड़े बाद में स्नान करते हैं।

  •  पंचायत श्रीनिरंजनी अखाड़े की परम्परा क्या है?

हमारे ईष्टदेव भगवान कार्तिकेय महाराज हैं। हमारेयहां नागा संन्यासी भी अनपढ़ नहीं, शिक्षित होताहै। विद्वता में निरंजनी अखाड़ा सबसे आगे है।हमारे यहां सभी महामण्डलेश्वर आचार्य होते हैं।

  • आपके अखाड़े की कुछ विशेषताएं?

हमारे अखाड़े में सभी संत विशेष रूप से आचार्य नई-नई खोज करते हैं। जैसे मैं ‘चर्मरोग मुक्तभारत’ अभियान चला रहा हूं। हमने यूनानी औरआयुर्वेद को जोड़कर इस रोग के निदान ढूढा है,जो बड़ा ही कारगर है। मैं भारत के 40 प्रतिशतभू-भाग में इसका उपचार करता हूं। उत्तराखण्ड के सहस्त्र धारा- हरिद्वार, ग्वालियर, उज्जैन,इंदौर, जबलपुर, रीवा तथा नासिक में उपचार करता हूं।

  •  प्रयागराज में चर्म रोगियों के उपचार के लिए कोई योजना?

अब प्रयागराज में भी हर माह के 18 व 19तारीख को पंचायती श्रीनिरंजनी अखाड़ा, दारागंजमें बैठूंगा और पूर्वांचल के सभी जिलों के रोगियोंका उपचार करूंगा।

  •  अब-तक कितने चर्म रोगियों का उपचारकिया होगा?

मैं इस कार्य को 1980 से कर रहा हूं। मेरे पास कोई आंकड़ा नहीं है, फिर भी मैं कह सकता हूंकि लाखों रोगियों का उपचार किया है।

  • इस रोग के कारण क्या है?

इसके होने में पहला कारण, माता का गर्भाशय। जब गर्भ में भ्रूण की उत्पत्ति प्रथम दिन होती है और माताओं को कब्ज, पेट फूलना या गैसकी शिकायत के साथ उल्टी होती है, तो बहनें परम्परानुसार खटाई खाने लगती हैं, जिसका बच्चेपर बड़ा दुष्प्रभाव पड़ता है। उसके जन्म के एकसाल के भीतर ही उसे खसरा निकलने लगताहै। दूसरा कारण कुपोषण, समय से भोजन नकरना है। भोजन विधिवत खाना चाहिए। हमारी दिनचर्या खराब होने पर चर्मरोग होता है। तीसरा कारण विपरीत आहार है। पानी का दूषित होना। केमिकलयुक्त खाद्य सामग्री खाना भी शामिल है।

श्रीराम मंदिर पर कोई विचार?

श्रीराम मंदिर अखिल भारतीय सनातन धर्म कामुद्दा है। सभी जानते हैं कि अयोध्या में श्रीराम काजन्म हुआ। वहां उनका किला है, खुदाई में सारेसाक्ष्य व तथ्य पाए गए। वहां राम मंदिर बननाचाहिए। मेरा मत है कि श्रीराम मंदिर अवश्यबनेगा, हम ही बनायेंगे।

 

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