लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले से जहां राजनीति का मास्टरस्ट्रोक लगाया है। वहीं मेले में राममंदिर निर्माण की सर्वाधिक चर्चा है। कुछ संत संस्कृत के सम्मान न होने से बेहद दुखी हैं। वे दुखी मन से कहते हैं कि संस्कृत और संस्कृति को बचाना है तो ‘त्रि-भाषा’फार्मूला में संस्कृत को शामिल किया जाना चाहिए। ऐसे अन्य मुद्दों को लेकर प्रख्यातविद्वान, शिक्षाविद्, बहुभाषाविद्, रचनाकार, प्रवचनकार, दार्शनिक और हिन्दू धर्मगुरुजगद्गुरु रामभद्राचार्य बहुत संवेदनशील हैं। रामानन्द सम्प्रदाय के वर्तमान चार जगद्गुरुरामानन्दाचार्यों में से एक रामभद्राचार्य जी चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांगविश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति हैं। उन्हें 2015 में केंद्र की मोदी सरकार ने पद्मविभूषण से सम्मानित किया था। उनसे विभिन्न धार्मिक विषयों पर युगवार्ता के राज्य ब्यूरो प्रमुख राजेश तिवारी ने बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश...

 

  • कुंभ पर्व का महत्व क्या है क्या यह अमृत की बूंदों के गिरने व उसका फल पाने जैसी कथा तक सीमित है?

कुंभ का मतलब है घड़ा। जब समुद्र मंथन से घड़ा आया था तो दैत्यों ने उसे छीन लिया था तो उसको फिर इन्द्र ले
गए। जिस-जिस राशि में कुंभ को जहां—जहां रखा था, वह राशियां जब वहां पड़ती हैं तो अमृत का योग बन जाता है।
प्रयाग में भी जब मकर राशि में सूर्य नारायण आते हैं और बृहस्पति का संयोग होता है, तब कुंभ होता है। 12 वर्ष में
एक बार होता है।

  • प्रयागराज का यह कुंभ है या अर्धकुंभ।

इस बार अर्द्धकुंभ को ही लोगों ने कुंभ बना दिया है। उनका इशारा था उत्तर प्रदेश के योगी सरकार की ओर।
कहा कि अमृत योग का यह छठा वर्ष तो है ही। जब हम इसका सेवन करेंगे तो आनन्दित होंगे।

  • अमृत योग का मतलब क्या है?

अमृत योग का मतलब है हमारे अन्दर सात्विक भावनापैदा हो। हमारा मन अमृतत्व की ओर जाये। ‘असतो मा
सदगमय, तमसो मा ज्योर्तिगमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय’। हमारे मन में सात्विकता आये, सतगुण आये, हमारे मन से रजो गुण चला जाये। इसलिए यह मेला उपस्थित कियाजाता है। इस धार्मिक स्थल पर भिन्न-भिन्न लोग कथा,bप्रवचन, व्याख्यान के माध्यम से अच्छी-अच्छी बातें,अर्थात अमृत का रसपान कराते हैं। उससे वातावरण सात्विक हो जाता है।

  • धर्म, पंथ, सम्प्रदाय और मजहब में साम्य और क्या अंतर है?

पहली बात तो ‘मजहब’ पंथ का पर्यायवाची है। धर्म एक ही है वह है सनातन। अपने कर्तव्य को धर्म कहते हैं।
भिन्न-भिन्न लोगों के द्वारा परिवर्तित मार्ग को ‘पंथ’ कहते हैं और ‘उपासना’ की शाखा को ‘सम्प्रदाय’ कहते हैं। हिन्दू
धर्म में कोई प्रवर्तक नहीं है, धर्म तो वही है। सिख, जैन,बौद्ध पंथ हैं। वैष्णव, शैव सम्प्रदाय है। एक ही धर्म में
भिन्न-भिन्न देवों की उपासना व भिन्न-भिन्न शाखाओं को सम्प्रदाय कहते हैं।

  • अयोध्या में भगवान राम मंदिर का निर्माण कब होगा आपके क्या विचार हैं?

मैं राम मंदिर से 1984 से जुड़ा हूं। राम मंदिर प्रकरण में सरकार की उदासीनता से प्रसन्न नहीं हूं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल रही है, उम्मीद है कि इस महीने 29 से भगवान जजो को सद्बुद्धि दे दें और सुनवाई हो सके। जब
भिन्न-भिन्न प्रकरणों में अध्यादेश लाया जा सकता है तो राम मंदिर पर क्यों नहीं। हालांकि अध्यादेश सर्वमान्य नहीं
होगा। कोर्ट ही इस मामले में जल्दी से कोई निर्णय सुना दें जो सर्वमान्य हो। मैं इतना जानता हूं की राम मंदिर पहले
बनना चाहिए सरकार रहे या न रहे।

  • राम मंदिर मामले में प्रधानमंत्री मोदी से अपेक्षा।

मैं समझ नहीं पा रहा हूं, सरकार इसे अपने मुख्य कार्यक्रमों में क्यों नहीं ले रही है। इसे उच्चतम न्यायालय भी क्यों
टाल रहा है। मेरी स्थिति दोनों ओर है, वे लोग मेरे(संघ परिवार) प्रिय हैं, मोदी से भी कोई झगड़ा नहीं है। मुझे
समझ में नहीं आ रहा कि वे श्रीराम मंदिर मामले में क्या सोच रहे हैं। उन्हें जनता की इच्छा को पूरा करना चाहिए।
गरीब सवर्णों को

  • 10 फीसदी आरक्षण देने पर आपकी प्रतिक्रिया।

10 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय बहुत अच्छा है। नरेन्द्र मोदी को समझ आ गया है कि सवर्णों को नहीं छोड़
सकते। वह बहुत चतुर राजनीतिज्ञ हैं। वे इतना संवेदनशील हो करके भी राम मंदिर के मामले में संवेदनशील नहीं हो
पा रहे हैं। मैं सोच रहा हूं कि ऐसा क्यों हो रहा है, लेकिन इसका आज तक समाधान नहीं मिला।

  • आप कहते हैं विदेशों में संस्कृत का बहुत सम्मान हो रहा है।

यह सच है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में सौ लड़के ऐसे देखे जो ईसाई थे इतनी सुन्दर संस्कृत बोलें कि मैं तो
आश्चर्यचकित हो गया। अफ्रीका का डरबन विश्वविद्यालय हो या जर्मनी हर देश में संस्कृत का बहुत सम्मान है।
खासतौर से पाणिनी के श्लोक को बहुत सम्मान देते हैं। विदेशों में हमारे धर्म ग्रन्थों की बहुत ज्यादा मांग है। लेकिन
दुर्भाग्य है कि हमलोग ही उसे नष्ट कर रहे हैं।

  • पाणिनी के ग्रन्थों पर आपने अध्ययन किया है

पाणिनी के धर्म ग्रन्थों पर मैंने काफी अध्ययन किया है। हमने पाणिनी के अष्टध्यायी पर बड़ा काम किया है। 12
हजार पृष्ठ की पुस्तक तैयार हो रही है, जो दुनिया की सबसे बड़ी पुस्तक मानी जायेगी।

  • धर्म आचार्य का मतलब क्या है?

मैं आचार्य हूं, मैं सामान्य आचार्य नहीं हूं, मैं अपनी प्रशंसा नहीं कर रहा हूं। जो तीन ग्रन्थों पर भाष्य लिखते थे, वह
आचार्य होते थे। ब्रह्मसूत्र, गीता और पुरुषसूक्त। आज के तारीख में जितने आचार्य कुंभ में आये हैं, मेरे अतिरिक्त
कोई तीनों पर भाष्य नहीं लिखा है।

  • आपके नजर में संस्कृत का उत्थान कैसे होगा?

सरकार संस्कृत के बहुत सारे विश्वविद्यालय बना डाले। सरकार सिर्फ एक गलती कर रही है। सरकार को भारतीय
संस्कृति जीवित रखने के लिए त्रि—भाषा फार्मूला में संस्कृत को लाना चाहिए। जिस दिन ‘संस्कृत’ जीविका में शामिल
हो जायेगी, उस दिन विद्यार्थी समेत सभी पढ़ेंगे।

  • लोग कहते हैं हिन्दू धर्म सिमट रहा है। आपको क्या लगता है?

ऐसा नहीं है। हिन्दू धर्म तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में देश में 100 करोड़ हिन्दू है। विदेशों में 25 करोड़ से अधिक
हिन्दू निवास कर रहे हैं। आपको यह संख्या कम लगती है। आज हिन्दू धर्म के गीता समेत कई ग्रंथों को वैश्विक
मान्यता मिल रही है। ज्योतिषशास्त्र को हर कोई मान रहा है। यहां तक की मुस्लिम भाई भी ज्योतिष मान रहे हैं।


  • सरकार ने कुंभ को दिव्य और भव्य स्वरूप दिया है। आपको क्या लगता है?

व्यवस्था अच्छी है। जो लोग मौज मस्ती करने आना चाहते हैं उनके लिए कम सुखद है। आध्यात्मिक सुख लेने वालों
को अधिक आनंद प्राप्त हो रहा है। लोगों को आप कोई संदेश देना चाहेंगे? संपूर्ण देशवासी अच्छी भावना लेकर कुंभ से जाएं। मन में द्वेष भावना न रहे। वेद ने हमें अमृत पुत्र कहा है। हम अमृत के पुत्र हैं। हमारा अमृतत्व त्याग है, हम जितना
त्यागपूर्ण जीवन व्यतीत करेंगे उतना ही कल्याण होगा। सबका मंगल हो, राम के सापेक्ष राष्ट्रवाद हो, राम हमारे आदर्श हों। सबकुछ मंगल होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here