हरियाणा के हिसार जिले के जाट समुदाय में अति पिछड़ा कुंडू खाप में जन्मी और नारी सशक्तिकरण का उदाहरण बन चुकी पर्वतारोही अनिता कुंडू की। छोटी आयु में ही सिर से पिता का साया छिन जाने और तीन बहनों-एक भाई में सबसे बड़ी होने की वजह से अनिता की जिंदगी में कई मुश्किलें आयीं, लेकिन उन्होंने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी, पढ़ाई और एडवेंचर का लक्ष्य मेहनत और लगन से पूरा किया। खुद को बाल विवाह से बचाने वाली 33 वर्षीय पर्वतारोही अनिता कुंडू ने 2011 में माउंट सतोपंथ (गंगोत्री उत्तराखंड) और अक्टूबर 2011 में माउंट कोकस्टेट लेह लद्दाख पर चीन बॉर्डर से फतह हासिल की। 2013 में नेपाल की आइस लैंड चोटी, 18 मई 2013 को नेपाल की तरफ से माउंट एवरेस्ट फतह किया। 2017 को चीन की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने में सफल हुईं। 2018 से सेवन समिट यानी सातों महाद्वीपों की सात ऊंची चोटियों को फतह करने की शुरुआत की। इस क्रम में वे अब तक पांच चोटियों को विजित कर चुकी हैं। ऐसी जांबाज और जुझारू खिलाड़ी अनिता कुंडू से चंदा सिंह ने युगवार्ता के लिए बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।

आपने एडवेंचर को ही जीवन में क्यों चुना?
मुझे दुनिया में अपनी अलग पहचान बनानी थी। इसलिए कुछ अलग करनी की ठानी। शुरू से बॉक्सिंग में करियर बनाना चाहती थी। लेकिन जीवन में कुछ ऐसे मोड़ आये जिसने मेरा लक्ष्य बदल दिया। एडवेंचर की प्रेरणा मुझे अपने पिताजी से मिली। जब मैं 13 वर्ष की थी, तभी मेरे पिताजी गुजर गये। मैंने घर की परिस्थितियों को देखते हुए बॉक्सिंग का सपना छोड़ दिया। एडवेंचर में जी जान से जुट गयीं। जीवन में असफलता को आप किस रूप में देखती हैं। असफलता से ही सफलता मिलती है। जीवन में सबसे बड़ी चुनौती असफलता होती है। इससे हमें अपनी कमी जानने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। सफलता से आप कुछ नहीं सीख सकते है। जीवन में असफलता का भी उतना ही महत्व है जितना सफलता का। सफलता की खुशी में आपको अपनी कमी नहीं दिखती, जो असफलता में दिखाती है।

इस संबंध में आपकी कुछ यादगार यादें क्या हैं?
2013 में नेपाल के रास्ते और 2017 में चीन के रास्ते मैंने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया। लेकिन सबसे डरावना समय 2015 का रहा जब भूकंप आया था। उस समय मैं एवरेस्ट पर चढ़ रही थी। साढ़े 22 हजार फीट की ऊंचाई पर थी। अचानक भूंकप आया और ग्लेसियर के टूटने की आवाज लगातार आ रही थी। आवाज इतनी तेज थी कि मैं काफी सहम गयी। भगवान का नाम ले रही थी। मैं जहां थी उस समय सभी से मेरा संपर्क टूट गया था। इस कारण यह अभियान रद्द भी कर दिया गया था, जिसे मैंने 2017 में पूरा किया।

एडवेंचर में आपका लक्ष्य क्या है?
दुनिया की सेवन समिट के तहत सात ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराने का मेरा लक्ष्य है। 2011 से मुझे एडवेंचर के क्षेत्र में कामयाबी मिली। लेह- लद्दाख की 22 हजार फीट उंची चोटी और उत्तराखंड की सतोपंथ की 23 हजार फीट उंची चोटी पर चढ़ाई की। इसके बाद 2013 में माउंट एवरेस्ट को नेपाल और 2017 में चीन को फतह किया। 2018 में इंडोनेशिया, रूस और किलिमंजारो फतह की। इसके बाद वर्ष 2019 के शुरूआत में मैंने विंसर शिखर फतह किया।

महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण के बारे में आप क्या कहेंगी?
मैं तो बोलती हूं कि महिलाओं को 33 नहीं, 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए, क्योंकि पुरुषों की तुलना में महिलाएं हर काम को अच्छी और पूरी जिम्मेदारी से करती हैं।

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