श्रीदेवी
फिल्मी दुनिया की लंबे समय तक सुपरस्टार रहीं श्रीदेवी की असमय मौत फिल्म उद्योग और करोड़ों प्रशंसकों के लिए बहुत बड़ा झटका रही। दुबई में एक पारिवारिक शादी के दौरान हुई दुर्घटना में 24 फरवरी को वे चल बसीं। कुल जमा 54 साल की आयु रही उनकी और इसमें से 50 साल उन्होंने सिनेमा को दिए। ग्लैमर और आकर्षण को बनाये रखने के साथ फिल्मों की सफलता की गारंटी की चुनौती आसान मामला नहीं होता। इस कारण भी श्रीदेवी का स्टारडम उल्लेखनीय बन जाता है।

रीता भादुड़ी
इस साल 17 जुलाई को चरित्र भूमिकाएं करने के लिए मशहूर अमिनेत्री रीता भादुड़ी का देहांत हुआ। भले वे कोई स्टार नहीं थीं, परंतु 1970, 1980 और 1990 के दशकों की हमारी फिल्मों में तथा टेलीविजन धारावाहिकों और टेलीफिल्मों में उनकी विशिष्ट उपस्थिति रही। पुणे के फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान से 1970 के दशक के प्रारंभिक वर्षों में रीता भादुड़ी ने अभिनय का प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

अर्जुन हिंगोरानी
इस साल पांच मई को 92 साल की उम्र में हिंदी सिनेमा के नामचीन निर्माता-निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी का देहांत हो गया। हिंदी सिनेमा को धर्मेंद्र और साधना जैसे कलाकारों का परिचय कराने का श्रेय उन्हें ही है। सिंधी भाषा की पहली फिल्म भी उन्हीं के खाते में है।

शम्मी
दो सौ से अधिक फिल्मों में काम कर चुकीं शम्मी का देहांत छह मार्च को हो गया। नर्गिस रबादी को शम्मी नाम से ही जाना गया और प्रशंसकों की अनेक पीढि़यों का प्यार उन्हें मिला। उन्होंने अनेक फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं भी कीं, लेकिन उनकी मुख्य पहचान कॉमेडी भूमिकाओं से बनीं।

नरेंद्र झा
मात्र 55 साल की आयु में दुनिया को अलविदा कहने वाले नरेंद्र झा ने अनेक फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। उनकी मौत कला जगत के लिए भारी क्षति है। उनके अभिनय के कई आयाम अब खुलने ही शुरू हुए थे।

विवादों से भी घिरा रहा बॉलीवुड

  • बंबईया सिनेमा उद्योग के साथ विवादों का नाता उतना ही पुराना है, जितना पुराना यह उद्योग है। साल 2018 भी कोई अपवाद नहीं रहा। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ पर देश के अनेक हिस्सों में आंदोलन हुए और कुछ जगहों पर हिंसक घटनाएं भी हुईं। रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी की कहानी पर आधारित इस फिल्म पर राजस्थान का एक संगठन करनी सेना ने कई सवाल उठाए। बाद में फिल्म का नाम पद्मावती से बदलकर पद्मावत किया गया और कुछ दृश्यों में बदलाव किए गए, तब यह फिल्म प्रदर्शित हुई। 
  • साल 2019 में रिलीज होने वाली ‘मणिकर्णिका: द क्वीन आॅफ झांसी’ से जुड़े विवाद भी खासा चर्चा में रहे। इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहीं कंगना रानौत के कथित हस्तक्षेप से परेशान होकर निर्देशक राधा कृष्ण जागरालामुदी ने फिल्म छोड़ी और फिर सोनू सूद और स्वाति सेमवाल ने भी खुद को इससे अलग कर लिया। अब एक अंग्रेज अभिनेता ने पैसा नहीं मिलने का आरोप लगाया है। 
  • सलमान खान की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘भारत’ शूटिंग की शुरूआत से ठीक पहले प्रियंका चोपड़ा का अलग हो जाना भी चर्चा में रहा। प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास की शादी भी बड़ी खबर रही, तो एक अमेरिकी पत्रिका में चोपड़ा के प्रति अपमानजनक टिप्पणी पर भी आपत्ति जतायी गयी। 
  • केदारनाथ फिल्म भी अनेक कारणों से पूरे साल चर्चा में रही। पहले निमार्ता प्रेरणा अरोड़ा ने फिल्म के निर्माण अधिकार तीन लोगों को बिना बताए बेच दिया। कुछ दिन के हील-हवाल के बाद यह मसला सुलझा, तो निर्देशक अभिषेक कपूर द्वारा अभिनेत्री सारा अली को फिल्मों की डेट किसी और को देने के मामले में कचहरी ले जाने की खबरें आ गयीं। खैर, जब फिल्म पूरी होकर रीलीज के लिए तैयार हुई तो कुछ लोग प्रतिबंध की मांग करते हुए अदालत चले गए। 
  • इस साल जनवरी में राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कुख्यात अपराधी लॉरेंस विश्नोई द्वारा सलमान खान को जान से मारने की धमकी देना भी सुर्खियों में रहा। यह अपराधी अभी जेल में है।

अवा मुखर्जी
जब 2000 में 70 साल की उम्र में वे बड़े परदे पर पहली बार आयीं, तो दर्शकों के लिए वे अपरिचित नहीं थीं। वे दशकों से विज्ञापनों में मां, दादी और नानी के रूप में दिखती रही थीं। उनके खाते में बहुत कम फिल्में हैं, पर उनका चेहरा बहुत जाना-पहचाना रहा।

परदे पर दिखाया दम
साल 2018 में ऐसे अनेक अभिनेताओं और अभिनेत्रियों का कौशल, प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन शानदार रहा। ‘मुक्काबाज’ में विनीत सिंह ने कस्बाई सीमाओं और उनसे पार जाती आकांक्षाओं के बीच झूलते खिलाड़ी युवक की भूमिका में जान डाल दी थी, तो ‘स्त्री’ में पंकज त्रिपाठी ने जलवा बिखेरा। त्रिपाठी ने बीते तीन सालों में हिंदी सिनेमा के सबसे महत्वपूर्ण अभिनेता के रूप में अपने को स्थापित किया है, पर वे ठहरे नहीं हैं। अभिषेक बच्चन की चाहे जितनी आलोचना कर ली जाए, पर ‘मनमर्जियां’ में उन्होंने बता दिया कि यदि उन्हें सही अवसर और निर्देशन मिले, तो वे अपनी भूमिकाओं को नयी उंचाई देने का दम रखते हैं। पंकज त्रिपाठी की तरह यह दौर आयुष्मान खुराना का भी है। ‘अंधाधुन’ की जटिल भूमिका को वे बहुत सहजता से निभा गए हैं। इसी फिल्म में अनुभवी तब्बू ने अपनी प्रतिभा की व्यापकता को प्रदर्शित किया है। इन दोनों के कारण यह फिल्म साधारण कहानी पर आधारित होने के बावजूद लंबे समय तक याद रखी जाएगी। ‘बधाई हो’ भी खुराना की क्षमता का एक उदाहरण है। ऐसे अभिनेताओं की कड़ी का एक नाम नवाजुद्दीन सिद्दीकी है। ‘मंटो’ में उनकी मुख्य भूमिका इस साल की एक बड़ी सिनेमाई उपलब्धि है।

छोटे बजट का धमाल
साल 2018 में करोड़ों-अरबों की कमाई करने वाली फिल्मों के बारे में पूरे साल चर्चा होती रही, पर असली मौजूदगी छोटे बजट की बड़ी फिल्मों की रही। इन्होंने आम कहानियों पर शानदार प्रस्तुति दी और इसके लिए उन्हें न तो किसी स्टार की जरूरत पड़ी और न ही प्रचार पर बेतहाशा खर्च करने की। ‘पटाखा’ में सुनील ग्रोवर, ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ में प्रियांशु पैनयूली, ‘राजी’ में आलिया भट्ट, ‘अक्टूबर’ में वरुण धवन, ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ में कार्तिक आर्यन, ‘कुछ भीगे अल्फाज’ में गीतांजली थापा, ‘लव पर स्केवेयर फूट’ में अंगिरा धर आदि ने यह जता दिया है कि आगामी सालों में इनके अभिनय के अनेक आयाम परदे पर दिखायी देंगे।

उद्योग के स्तर पर बदलाव नहीं
यदि बीते कुछ सालों से 2018 की तुलना की जाए, तो बतौर उद्योग इसमें ठहराव ही रहा। बड़े सितारों की चमक से बॉक्स-आॅफिस पर भीड़ जुटाने की कोशिश ह्यठग्स आॅफ हिन्दोस्तानह्ण में औंधे मुंह गिरी, तो छोटे बजट की फिल्में भी खास नयापन नहीं दे सकीं। फिल्म वितरण और थिएटर एवं परदे जुटाने में खेमेबाजी और गिरोहबंदी का ही बोलबाला रहा। कोई फिल्म कितना कमा सकी, उसका सही ब्यौरा जानने का अब भी कोई भरोसेमंद हिसाब नहीं है। नेटिलक्स, हॉटस्टार और आमेजन प्राइम वीडियो जैसे प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें और थिएटरों में संतुलन बनाकर दर्शकों तक पहुंचना और कमाई करना निमार्ताओं और निवेशकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। ये डिजिटल मंच बहुत सी ऐसी फिल्मों को भी अपने यहां जगह दे रहे हैं, जो गुणवत्ता के स्तर पर बेहद निराशाजनक हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले साल में इस मोर्चे पर क्या तब्दीली आती है।

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