न्नी देओल जाने-माने निर्देशक राजकुमार संतोषी की आगामी फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। यह फिल्म सिख योद्धा फतेह सिंह के जीवन पर आधारित है। यह खबर इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि संतोषी-सन्नी की जोड़ी 22 साल बाद एक साथ दर्शकों के सामने आ रही है। इस अंतराल में यह घटना भी खास है कि 16 साल पहले शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव पर बनी दो फिल्में तकरीबन साथ-साथ प्रदर्शित हुई थीं।

साल 2002 में संतोषी द्वारा निर्देशित ‘द लीजेंड आॅफ भगत सिंह‘ आयी थी और सन्नी देओल के पिता धर्मेंद्र ने ‘23 मार्च 1931: शहीद‘ का निर्माण किया था। गुड्डू धनोआ ने इसे निर्देशित किया था। संतोषी की फिल्म में मुख्य भूमिका अजय देवगन ने निभायी थी, जबकि धनोआ की फिल्म में सन्नी देओल के भाई बॉबी देओल भगत सिंह बने थे। इस फिल्म में सन्नी देओल ने स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का किरदार अदा किया था। तब प्रतिद्वंद्विता में संतोषी की फिल्म बेहद कामयाब रही थी, जबकि धनोआ की फिल्म का कारोबार औसत रहा था। उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में संतोषी और सन्नी देओल के बीच तनाव की बातें बतौर गॉसिप चर्चा में रही थीं।

22 सालों के बाद संतोषी-सन्नी की जोड़ी एक बार फिर दर्शकों के सामने आ रही है। 90 के दशक में इस जोड़ी ने कई हिट फिल्में दी थीं। अब देखना यह है कि वे अपना जलवा फिर से दिखाने में किस हद तक कामयाब होते हैं।

इस साल के शुरू में जब सन्नी देओल ने राजकुमार संतोषी के साथ एक फोटो सोशल मीडिया पर साझा किया, तभी से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि दोनों फिर से एक साथ काम कर सकते हैं। चूंकि निर्देशक-अभिनेता की यह जोड़ी ने 1990 के दशक में तीन बड़ी फिल्में दी थीं, तो ऐसा अनुमान लगाया जाना स्वाभाविक ही था। रिपोर्टों की मानें, तो 2013 में घोषित इस फिल्म में फतेह सिंह की भूमिका के लिए संतोषी की पहली पसंद संजय दत्त थे, पर तारीखों के मसले पर अड़चन के कारण उन्हें सन्नी देओल से बात करनी पड़ी। साल 1990 में आयी ‘घायल‘ में सन्नी ने पहली बार संतोषी के निर्देशन में काम किया था। इस फिल्म ने बॉक्स आॅफिस पर धूम मचाने के साथ सात फिल्मफेयर अवार्ड भी हासिल किये थे।

‘घायल‘ के साथ ही संतोषी ने निर्देशक के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। इसके बाद इन दोनों ने 1993 में ‘दामिनी‘ में साथ काम किया। इस फिल्म में ऋषि कपूर और मीनाक्षी शेषाद्रि भी मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए सन्नी देओल को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाजा गया। संतोषी और सन्नी आखिरी बार 1996 में ‘घातक‘ के लिए साथ आये थे। टिकट खिड़की पर इसे भी बड़ी सफलता मिली थी। यहां यह भी रेखांकित किया जाना चाहिए कि इन तीन फिल्मों के कारण सन्नी देओल की अदाकारी, खासकर एक्शन और तनावपूर्ण भूमिकाओं में, न सिर्फ निखार आया, बल्कि उनकी एक खास पहचान भी बनी।

इसी बीच यह चर्चा भी गर्म है कि सन्नी देओल ‘दामिनी‘ को दोबारा बना सकते हैं। हाल में इस 61 वर्षीय अभिनेता ने बयान दिया है कि उनके प्रशंसक उनकी चुनींदा फिल्मों के रीमेक के बारे में कहते रहते हैं, पर ‘गदर‘ जैसी फिल्मों को फिर से बना पाना बहुत मुश्किल है। उन्होंने ‘घायल‘ और ‘घातक‘ का उदाहरण देते हुए कहा कि दर्शकों को सिक्वल से अधिक पहली फिल्म पसंद आयी थी। इसी क्रम में ‘दामिनी‘ की अपनी यादगार भूमिका का हवाला देते हुए सन्नी ने कहा कि वे इस फिल्म के रीमेक की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं।

संतोषी ने विभिन्न अभिनेताओं के साथ ‘अंदाज अपना अपना‘, ‘चाईना गेट‘, ‘लज्जा‘, ‘पुकार‘, ‘खाकी‘, ‘फैमिली‘, ‘हल्ला बोल‘, ‘अजब प्रेम की गजब कहानी‘, ‘फटा पोस्टर निकला हीरो‘ जैसी अनेक फिल्में निर्देशित की हैं। इस महीने धर्मेंद्र और बॉबी देओल के साथ सन्नी की ‘यमला पगला दीवाना- फिर से‘ आ रही है। उनकी पिछली फिल्म ‘पोस्टर ब्वॉयज‘ बुरी तरह से असफल रही। उनकी एक फिल्म ‘भैयाजी सुपरहिट‘ अभी निर्माणाधीन है। अपने बेटे करण देओल को अभिनय की दुनिया में लाने के लिए सन्नी बतौर निर्देशक ‘पल पल दिल के पास‘ लेकर भी आ रहे हैं। अब देखना यह है कि राजकुमार संतोषी और सन्नी देओल 1990 के दशक का अपना जलवा फिर से परदे पर दिखाने में किस हद तक कामयाब होते हैं। दर्शकों और समीक्षकों को तो इस जोड़ी से उम्मीदें बहुत हैं।

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