देशभर के सिनेमाघरों में रजनीकांत और अक्षय कुमार की फिल्म ‘2.0’ धूम मचा रही है। यह सब उम्मीद के अनुरूप ही है। रजनीकांत तो स्टारडम की हर हद लांघ ही चुके हैं और तीन दशक से अक्षय कुमार भी सिनेप्रेमियों की पसंद बने हुए हैं। इस कॉलम में हम रजनीकांत के बारे में चर्चा कर चुके हैं। इस बार बात करते हैं अक्षय कुमार की। इस साल फोर्ब्स पत्रिका की भारतीय सेलिब्रिटी सूची में इन्हें शीर्ष के तीन नामों में शामिल किया गया है। वैसे तो ऐसी सूची में वे सालों से हैं, पर पहली बार वे पहले तीन शख्सियतों में हैं। इनसे ऊपर क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेता सलमान खान हैं। इस 51 वर्षीय अभिनेता का फिल्मी करियर 1991 से सौगंध से शुरू हुआ था।

अक्षय कुमार एक्शन, कॉमेडी, सामाजिक यथार्थ, फंतासी आदि में कमाल दिखाने के बाद आज दावा कर सकते हैं कि वे भारतीय सिनेमा के इतिहास के उन गिने-चुने अभिनेताओं में शामिल हैं, जो किसी भी भूमिका को निभा सकते हैं और उनकी फिल्में मुनाफा भी कमा सकती हैं।

अगले साल खिलाड़ी के साथ उनके स्टारडम का सिलसिला बना, जो 1994 की मोहरा के साथ ऊंचाई पर पहुंचा। यदि हम उनकी फिल्मों की संख्या और सफलता का हिसाब देखते हैं, तो वे सुपरस्टार खान तिकड़ी से आगे दिखते हैं। परदे पर उनके द्वारा अदा किए गए किरदारों की विविधता भी आश्चर्यजनक है। उदाहरण के तौर पर हम उनकी हालिया फिल्मों- टायलेट: एक प्रेम कथा, जॉली एलएलबी 2, पैड मैन, गोल्ड- को ले सकते हैं। निर्माणाधीन मिशन मंगल साल 2014 के मंगलयान परियोजना पर आधारित है। यह उल्लेखनीय है कि इस फिल्म में पांच अभिनेत्रियां हैं, जो मुख्य भूमिकाओं में हैं। भले ही वे कुछ साल पहले की तरह ताबड़तोड़ फिल्में नहीं कर रहे हैं, फिर भी हर साल रिलीज होने वाली उनकी फिल्मों की संख्या किसी भी अन्य स्टार से ज्यादा है। अमृतसर में 1967 में जन्में अक्षय कुमार का असली नाम राजीव हरि ओम भाटिया है और उनका बचपन दिल्ली में बीता है। फिलहाल वे कनाडा के नागरिक हैं और फोर्ब्स की मानें, तो दुनिया के सबसे अधिक कमाने वाले अभिनेताओं में वे सातवें पायदान पर हैं। पद्मश्री, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर अवार्ड आदि अनेक सम्मानों से उन्हें नवाजा जा चुका है। लेकिन अक्षय कुमार की कामयाबी की कहानी में उतार-चढ़ाव के दौर भी रहे हैं और उनकी लगातार मेहनत एवं निर्माताओं तथा निर्देशकों के हिसाब से चलते रहने के कारण वे आज इस शिखर तक पहुंचे हैं। साल 1997 और 1999 के बीच उनकी 14 फिल्में एक के बाद एक बॉक्स आॅफिस पर औंधे मुंह गिरी थीं। तब यह कहा जाने लगा था कि एक एक्शन हीरो के रूप में अक्षय का जादू खत्म हो गया है। तब निर्देशक प्रियदर्शन ने 1999 में हेराफेरी में उन्हें नए अवतार में पेश किया। अक्षय कुमार ने अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कॉमेडी की और इस रूप में फिर दर्शकों के चहेते बन गए। प्रियदर्शन ने इस अभिनेता के साथ गरम मसाला, भागमभाग, खट्टा मीठा, भूलभूलैया, दे दनादन आदि अनेक सफल फिल्में बनायी हैं। निर्माताओं और दर्शकों के भरोसे ने अक्षय कुमार को अब यह अवसर दिया है कि वे सामाजिक रूप से प्रासंगिक तथा चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभा सकें। वे इस अवसर का लाभ उठा भी रहे हैं। एक्शन, कॉमेडी, सामाजिक यथार्थ, फंतासी आदि में कमाल दिखाने के बाद वे आज यह दावा कर सकते हैं कि वे भारतीय सिनेमा के इतिहास के उन गिने-चुने अभिनेताओं में शामिल हैं, जो किसी भी भूमिका को निभा सकते हैं। अब तो वे यह भी कहने लगे हैं कि वे स्क्रिप्ट देखकर फिल्में चुनते हैं और उन्हें इस बात की परवाह नहीं रहती कि उन्हें परदे पर कितना समय मिलता है। यह उनके आत्मविश्वास को भी इंगित करता है। अक्षय कुमार के सकारात्मक पेशेवर रवैये को इस बात से समझा जा सकता है कि उनके बारे में शायद ही कोई विवाद या बेमतलब बातें सुनने को मिलती हैं। स्टारडम के शिखर पर बैठकर भी वे विनम्रता से कह देते हैं कि उनकी सफलता में सत्तर प्रतिशत योगदान भाग्य का है, पर वे यह भी कहते हैं कि मेहनत करते रहना भी जरूरी है, ताकि भाग्य की मेहरबानी बनी रहे।

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