स साल अनेक अच्छी फिल्में आयी हैं जिन्हें दर्शकों ने भी पसंद किया है और समीक्षकों ने भी सराहा। लेकिन आगामी आठ नवंबर को परदे पर आ रही ‘ठग्स आॅफ हिंदोस्तान‘ कई स्तरों पर न सिर्फ 2018 की सबसे बड़ी फिल्म साबित हो सकती है, बल्कि हिंदी सिनेमा के दायरे को विस्तार देने के लिहाज से भी अहम होगी। यश राज फिलम्स के बैनर तले बन रही दो अरब रुपये से ज्यादा के भारी-भरकम बजट की इस फिल्म का निर्देशन विजय कृष्ण आचार्य ने किया है। अरोड़ा कई कामयाब टेलीविजन धारावाहिकों के साथ हिंदी सिनेमा की अनेक बड़ी फिल्मों- धूम सीरिज, ब्लफमास्टर, गुरु, रावण आदि का लेखन और निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म में हिंदी सिनेमा के बड़े नाम अमिताभ बच्चन, आमिर खान और कैटरीना कैफ एक साथ दिखेंगे। ब्रिटिश अभिनेता लॉयड ओवेन और गेविन मार्शल के साथ फातिमा सना शेख और रोनित रॉय भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आयेंगे। इसके संस्करण हिंदी, तमिल और तेलुगू भाषा के अलावा थ्रीडी और आईमैक्स रूप में भी होंगे। डिजिटल आईमैक्स में आने वाली यह हिंदी की पांचवी फिल्म होगी। बजट, कैनवास और स्टारकास्ट के बड़ा होने के आधार पर यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि इसी के साथ हिंदी सिनेमा में चार सौ करोड़ रुपये के क्लब का उद्घाटन भी होगा।

‘ठग्स आॅफ हिंदोस्तान’ दर्शकों के लिए बहुप्रतीक्षित फिल्म बन गई है। इसके ट्रेलर के बाद फिल्म से दर्शकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। नवंबर में आने वाली इस फिल्म को देखने के बाद ही पता चलेगा कि यह दर्शकों को कितना पसंद आती है।

‘ठग्स आॅफ हिंदोस्तान‘ 1839 में प्रकाशित फिलिप मीडोज टेलर के उपन्यास ‘कन्फेशंस आॅफ ए ठग‘ पर आधारित है जिसमें आजाद नामक एक ठग सरगना की कहानी है। टेलर हैदराबाद की निजामशाही में अधिकारी थे। उन्नीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में देश के कई इलाकों में ठगों के गिरोह सक्रिय थे। ये अपराधी लंबी यात्राएं करने वाले काफिलों में शामिल हो जाते थे और धनी लोगों से दोस्ती बना लेते थे। फिर किसी सराय में या रास्ते में मौका देखकर उनकी हत्या कर उनका धन और सामान लूट लेते थे। यह समस्या ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के लिए बड़ी मुसीबत बन गयी थी। इसलिए इनसे छुटकारा पाने के लिए उन्हें बहुत मशक्कत करनी पड़ी थी। विभिन्न आकलनों की मानें, तो ठगों ने पांच लाख से बीस लाख के बीच हत्याएं की थीं। इन पर 1830 के दशक में काबू पाया जा सका था।

हालांकि फिल्म की कहानी एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में वास्तविक समस्या के इर्द-गिर्द घूमती है, पर यह इतिहास का चित्रण नहीं करती है। इस तरह की गिनी-चुनी फिल्में ही हिंदी में बनती हैं। हाल में ऐसी कुछ फिल्में आयीं भी, तो कुछ सेट लगा कर और अजीबो-गरीब कपड़े पहना कर ऐतिहासिकता का निर्वाह कर दिया गया। लेकिन ‘ठग्स आॅफ हिंदोस्तान‘ के बारे में जानकारियां हैं कि कथानक फिल्म के केंद्र में होगा। ऐसी उम्मीद दो वजहों से की जा सकती है- एक, निर्देशक अरोड़ा स्थापित कथानक और संवाद लेख हैं, दूसरा, फिल्म एक मजबूत उपन्यास पर बनी है जिसका लेखक खुद भी ठगों के दौर में जिम्मेदार पद पर था और जिसकी कहानी असली घटनाओं को लेकर बुनी गयी है।

ठगी को लेकर इतिहासकारों में अनेक मान्यताएं हैं। एक मान्यता है कि इसे छह-सात सदी पहले दिल्ली से किसी नामी चिकित्सक की हत्या कर भागे सात मुस्लिम कबीलों ने शुरू किया था। यह भी कहा जाता है कि अकबर के नजदीकी गुलाम को मार कर भागे सात मुस्लिम परिवारों ने ठगों का गिरोह बनाया। कुछ का कहना है कि ठग मुगल शाही शिविरों में काम करने वालों के वंशज हो सकते हैं। कई लोग यह भी कहते हैं कि ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रभुत्व बढ़ने के साथ ही रियासतों की सेनाएं भंग कर दी गयीं या उनमें कटौती कर दी गयी, और इससे बेरोजगार हुए लड़ाकों ने ठगी का धंधा अपना लिया।

चौदहवीं सदी में लिखी गयी जियाउद्दीन बरनी की किताब में पहली बार लिखित रूप में ठगों का उल्लेख आता है। 18वीं सदी के मध्य से ठगों का रिकॉर्ड मिलना शुरू होता है। ठगों को फांसीगर भी कहा जाता था क्योंकि वे अपने पीड़ित को ज्यादातर गले में रस्सी बांधकर मारते थे। उनका दूसरा मुख्य हथियार छुरी-कटारी होते थे। कंपनी के शासन में ठगों का आतंक इस कदर बढ़ गया कि विलियम बेंटिक की गवर्नरी में बाकायदा ठगी और डकैती का विभाग बनाना पड़ा। उम्मीद है कि ‘ठग्स आॅफ हिंदोस्तान‘ के जरिये हमारे इतिहास के एक रोमांचक खूनी अध्याय से गुजरने का हमें मौका मिलेगा।

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