धर्म

शक्ति संचय का पर्व

नवरात्र शक्ति के आवाहन का पर्व है। शक्ति के अवतरण के लिए आधारभूमि तैयार करने का साधना काल है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार त्रेता युग में श्रीराम ने भी शक्ति की अराधना की थी और अंतत: आदिमाता भगवती के आशीर्वाद से विजयादशमी के दिन जनपीड़क रावण का वध कर...

श्राद्ध परंपरा- आत्मा के अनश्वर अस्तित्व की परिचायक

मानवीय चेतना को उसके पूर्ण विकास तक ले जाना ही हमारी ऋषि संस्कृति का एकमात्र उद्देश्य रहा है। मरणेत्तर श्राद्ध-तर्पण की क्रियाएं इसी का एक प्रखर प्रमाण हैं। वर्ष में पितृपक्ष के पंद्रह दिन विशेष तौर से इसी के लिए नियत किये गये हैं, जिसकी मिसाल अन्य किसी देश-संस्कृति में...

वास्तुशास्त्र के जनक देवशिल्पी विश्वकर्मा

प्राचीनकाल में विश्वकर्मा नाम के एक मूर्धन्य वास्तुविद थे जिन्हें चिरपुरातन वास्तुशास्त्र का जनक माना जाता है। ऋग्वेद में इन्हें लोकमंगल की दृष्टि से सदैव वास्तु विद्या के अनुसंधानों में निरत रहने वाला आदि शिल्पी बताया गया है। ऋग्वेद के दशम मंडल के 81वें व 82वें सूक्त में दिव्य...

शुभत्व के पर्याय विघ्नहर्ता गणेश

गजानन गणेश भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। हिन्दू समाज का कोई भी कार्य गणपति को नमन के बिना शुरू नहीं किया जाता क्योंकि वे सुख-समृद्धि, वैभव एवं आनंद के अधिष्ठाता हैं। वे विघ्नहर्ता हैं। शुभत्व का पर्याय हैं। श्री विनायक की अनूठी काया में मानवीय प्रबंधन के ऐसे अनूठे...

आध्यात्मिकता के सर्वोच्च शिखर

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की अर्धरात्रि को कारागृह के भीतर विशिष्ट ग्रहीय दशाओं में शिशु रूप में जन्मे लीलाधर श्रीकृष्ण का समूचा जीवन एक युगांतकारी अवतरण माना जाता है। यदा-यदा हि धर्मस्य…संभवामि युगे-युगे का उद्घोष करने वाले युग नायक कृष्ण ने असुरत्व के विनाश और...

सांस्कृतिक चेतना कांवड़ यात्राएं

सावन का महीना शुरू होते ही हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष चहुंओर सुनायी पड़ने लगते हैं और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना की वाहक कांवड़ यात्राएं गुरू पूर्णिमा के बाद देश के प्रमुख शिव तीर्थ के लिए आरंभ हो जाती हैं। चूंकि सावन के पहले पखवाड़े में त्रयोदशी...

सद्गुरु के पांच दिव्य स्वर

भारतीय संस्कृति की सर्वाधिक गौरवशाली परम्परा है गुरु-शिष्य परम्परा। हमारी देवभूमि की यह परम्परा ही आदिकाल से ज्ञान-संपदा का संरक्षण कर उसे श्रुति के रूप में क्रमबद्ध करती आई है। इसी पावन परम्परा ने हमारी देवभूमि को ‘विश्वगुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित किया था। जिज्ञासु शिष्यों ने ज्ञानी गुरु...

जगतपालक की दिव्य लोकयात्रा

पुरी के सागर तट पर निकलने वाली जगन्नाथ रथयात्रा के समय आस्था का जो विराट वैभव देखने को मिलता है, वह और कहीं दुर्लभ है। इसीलिए यह दस दिवसीय महामहोत्सव न केवल भारत अपितु विदेशों से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।...