सिनेमा

आजादी के नेता और सिनेमा

भले ही 1947 के बाद से अब तक सिनेमा का रंग-ढंग बहुत हद तक बदल चुका है, पर उसकी बुनियाद में 1913 और 1930-40 के बीच के कई कारक हैं। साल 1931 में भारतीय सिनेमा ने बोलना भी शुरू कर दिया था। अब सिनेमा को भी राष्ट्र के सांस्कृतिक जीवन...

हालिया इतिहास भी हो हिंदी फिल्मों में

इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिस विट्ज की फिल्म ‘आॅपरेशन फिनाले’ की खूब चर्चा है। इस फिल्म का विषय हिटलर के शासन के एक प्रमुख अधिकारी एडॉल्फ आइकमैन के अर्जेंटीना में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंटों द्वारा अपहरण और इजरायल लाये जाने के प्रकरण पर आधारित है। जब 1930-40...

ऑस्कर में विलेज रॉकस्टार्स

इस बार आॅस्कर में विदेशी श्रेणी के लिए रीमा दास निर्देशित ‘विलेज रॉकस्टार्स‘ को भेजा गया है। कम बजट की इस फिल्म ने पहले ही तमाम फिल्म समीक्षकों-आलदुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार आॅस्कर के लिए भारतीय प्रविष्टि के रूप में रीमा दास द्वारा निर्देशित स्वतंत्र असमी फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स‘ को चुना गया...

अमिताभ-आमिर की ठगी

इस साल अनेक अच्छी फिल्में आयी हैं जिन्हें दर्शकों ने भी पसंद किया है और समीक्षकों ने भी सराहा। लेकिन आगामी आठ नवंबर को परदे पर आ रही ‘ठग्स आॅफ हिंदोस्तान‘ कई स्तरों पर न सिर्फ 2018 की सबसे बड़ी फिल्म साबित हो सकती है, बल्कि हिंदी सिनेमा के दायरे को विस्तार...

अदम्य साहस की गाथा ‘पलटन’

हिंदी सिनेमा में भारतीय सेना से जुड़ी अनेक गाथाओं पर फिल्में बनी हैं, पर वास्तविक युद्धों में साहस और पराक्रम की कहानी कहने वाली फिल्में गिनी-चुनी ही हैं। सात दशकों के स्वतंत्र भारत में पड़ोसी देशों से युद्ध, झड़पों, घुसपैठ और तस्करी आदि की अनगिनत घटनाएं हैं और ऐसी हर घटना पर...

आर के स्टूडियो जब यादें ही बचेंगी

भारतीय सिनेमा के इतिहास में विशेष महत्व रखने वाले अनेक स्टूडियो आज आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक भवनों में बदल चुके हैं। पिछले कुछ दिनों से खबर गर्म है कि 1948 में राज कपूर द्वारा स्थापित आरके स्टूडियो भी इसी नियति को प्राप्त हो सकता है। हमारे देश के आधुनिक...

संतोषी-सन्नी की जोड़ी फिर साथ

सन्नी देओल जाने-माने निर्देशक राजकुमार संतोषी की आगामी फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। यह फिल्म सिख योद्धा फतेह सिंह के जीवन पर आधारित है। यह खबर इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि संतोषी-सन्नी की जोड़ी 22 साल बाद एक साथ दर्शकों के सामने आ रही है। इस अंतराल...

कलाकार वाजपेयी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को आप अपनी विचारधारा और उनके लंबे जीवन के आकलन के आधार पर चाहे जिस तरह विवेचित करें, परंतु आप इस तत्व को अलग नहीं रख सकते कि वे एक संवेदनशील कवि और सहृदय मनुष्य भी थे। जैसे पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनके सुचिंतित एवं...

अभिव्यक्ति में भारतीय नहीं सिनेमा

आजादी की पहली दहाई भारतीय सिनेमा का सुनहरा वक्त माना जाता है। इनमें से 1957 का साल बेहतरीन फिल्मों के लिहाज से अहम है। उसी साल फिल्मकार राज कपूर कामयाब फिल्में बनाने के बाबत कहते हैं कि हीरो-हीरोइन का प्यार दिखा दो, दिल को छूने वाले संवाद डाल दो,...

दिलो-दिमाग को झकझोरती ‘मुल्क’

आमतौर पर बॉलीवुड की फिल्में समाज और सियासत से जुड़े सवालों से सीधे टकराने की जहमत नहीं उठातीं। उन फिल्मकारों से ऐसी फिल्मों की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है, जो प्यार-मोहब्बत या एक्शन को केंद्र में रखकर फिल्में बनाते रहे हों। लेकिन ‘तुम बिन’, ‘दस’ और ‘रा.वन’...