विनय के पाठक

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रांची विश्वविद्यालय से स्नातक। वर्ष 1988 में रांची में ही फील्ड रिपोर्टर के रूप में रांची एक्सप्रेस से जुड़े। उसके बाद साप्ताहिक रविवार, प्रभात खबर, सेंटिनल, पांचजन्य, राजस्थान पत्रिका, टेलीग्राफ, इकोनॉमिक्स टाइम्स, अमर उजाला, बीएजी फिल्म्स, न्यूज 24, इंडिया टीवी, जी न्यूज जैसी संस्थाओं के लिए उप संपादक से लेकर विशेष संवाददाता, सहायक फीचर एडिटर, समन्वय संपादक, एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। टीवी की दुनिया में ‘पोलखोल’ और ‘सनसनी’ जैसे कार्यक्रमों का भी प्रोडक्शन किया है।

झटकों से उबरी अर्थव्यवस्था

भारत को आर्थिक मोर्चे पर साल 2018 में लगातार झटकों का सामना करना पड़ा। इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था ने जहां लंबी छलांग लगायी, वहीं रुपये की गिरती कीमत और कच्चे तेल की कीमत में आयी उछाल ने देश की अर्थव्यवस्था को लगातार तनाव में बनाये रखा। आर्थिक अपराध के...

ग्रोथ रेट पर विवाद

कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान जीडीपी के संशोधित आंकड़े जारी होने के बाद से ही विवाद की स्थिति बनी हुई है। विवाद की चपेट में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) और नीति आयोग भी आ गये हैं। जीडीपी की बैक सीरीज के जो आंकड़े जारी...

मंदड़ियों की गिरफ्त में शेयर बाजार

अर्थव्यवस्था के संकेतको में से एक शेयर बाजार लगातार गोते लगा रहा है। 28 सितंबर को कारोबार बंद होने के साथ ही सितंबर का महीना शेयर बाजार के लिए पिछले ढाई वर्षों के दौरान सबसे बुरा महीना बन गया। महीने के आखिरी शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का...

घटा कर्ज, बढ़ी वसूली

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ओर से अच्छी खबर आ रही है। केन्द्र सरकार की सख्ती की वजह से अब बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में कमी आने लगी है, जबकि बैड लोन की रिकवरी तेजी से बढ़ी है। बैंकों के फंसे कर्ज को वसूलने की सरकार की कोशिश...

बैंकों के गुनहगार

बैंकों के बैड लोन का मसला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) साढ़े ग्यारह लाख करोड़ के स्तर को भी पार कर गयी हैं। इस वक्त सरकारी और गैर सरकारी दोनों क्षेत्रों के बैंक एनपीए की समस्या से जूझ रहे हैं। दिसंबर 2017...

विषम परिस्थिति परवान पर उम्मीदें

आर्थिक मोर्चे पर रुपये की कीमत में हुई गिरावट और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में हो रही बढ़ोतरी की वजह से देश विषम आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रहा है। लेकिन इसी बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए नये साल की पहली तिमाही के विकास दर के आंकड़ों के...

गिरता रुपया, चढ़ता तेल

देश के सामने आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक ओर रुपये में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है, दूसरी ओर पेट्रोलियम उत्पादों के दाम दिन ब दिन चढ़ते जा रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले केंद्र सरकार के सामने आर्थिक चुनौतियां विकराल होती जा रही...

बढ़ेगा ब्याज का बोझ

अक्टूबर 2013 के बाद पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक ने दो लगातार बैठकों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रीपो रेट और रिवर्स रीपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि महंगाई की संभावना को...

जीएसटी से सधेगी जनता

गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स काउंसिल की 28वीं बैठक में उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए जिस तरह से राहत का ऐलान किया गया है, उससे यही लगता है कि सरकार पूरी तरह से जीएसटी के सहारे देश की जनता को साधने की जुगत में लगी है। जुलाई 2017 में जब...

रो रहा हूं मैं…

भारतीय रुपया मुद्रा बाजार में लुढ़कने का नया रिकॉर्ड बना रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया बार-बार 70 के स्तर को पार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये की कीमत में मुख्य रूप से वैश्विक कारकों की वजह से गिरावट आ रही...