पूनम नेगी

13 POSTS0 COMMENTS

महाशिवरात्रि शिवत्व का अनुभव

स्वयं में शिव तत्व के होने का उत्सव मनाना ही महाशिवरात्रि है। ‘रात्रि’ का अर्थ है रात, अर्थात विश्राम का समय। जब सब कुछ शांत और स्थिर होता है। विश्राम केवल शरीर के लिए ही नहीं, मन और स्व के लिए भी है। हि न्दू दर्शन में शिव को ह्यलोकमंगल...

कुंभ में किन्नर अखाड़ा

छ ह जनवरी को कुंभ मेला क्षेत्र में यज्ञशाला पूजन व ध्वजारोहण के बाद आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी की अगुवाई में किन्नर अखाड़े ने भव्य पेशवाई कर प्रयाग कुंभ के इतिहास में नया अध्याय रच दिया। प्रयागराज के प्राचीन शिव मंदिर तथा अलोपी बाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में विधि-विधान...

प्रयागराज की बोलती दीवारें

वि श्व के सबसे बड़े धार्मिक समागम कुंभ पर्व कोयूनेस्को से विश्व धरोहर की मान्यता मिलने केबाद मानवता की इस अमूर्त विरासत को समूचीदुनिया में लोकप्रिय करने की मंशा से उत्तर प्रदेश की योगीसरकार ने प्रयागराज के वर्तमान अर्द्ध कुंभ को वैश्विकरूप प्रदान करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी...

अभय प्रदान करते काल भैरव

काल भैरव को तंत्र का प्रमुख देवता माना जाता है। भगवान शंकर के अवतारों में काल भैरव का विशिष्ट महत्व है। शिव पुराण में काल भैरव का देवाधिदेव महादेव शिवशंकर के अंशावतार रूप में विस्तृत वर्णन मिलता है। तंत्राचार्यों की मान्यता है कि जिस प्रकार अपौरुषेय वेदों में आदि...

श्रीराम के आदर्शों को विस्तार देतीं रामलीलाएं

उत्तर भारत की सबसे लोकप्रिय रामलीला का उदय बनारस से माना जाता है। बनारस के निकट रामनगर की रामलीला अपनी अलग शैली के लिए विख्यात है। रामलीला के दर्शक और माहौल समय के साथ भले ही बदल गया हो, लेकिन रामलीला का मंचन बिल्कुल नहीं भी बदला है। विशाल मुक्ताकाश...

शक्ति संचय का पर्व

नवरात्र शक्ति के आवाहन का पर्व है। शक्ति के अवतरण के लिए आधारभूमि तैयार करने का साधना काल है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार त्रेता युग में श्रीराम ने भी शक्ति की अराधना की थी और अंतत: आदिमाता भगवती के आशीर्वाद से विजयादशमी के दिन जनपीड़क रावण का वध कर...

श्राद्ध परंपरा- आत्मा के अनश्वर अस्तित्व की परिचायक

मानवीय चेतना को उसके पूर्ण विकास तक ले जाना ही हमारी ऋषि संस्कृति का एकमात्र उद्देश्य रहा है। मरणेत्तर श्राद्ध-तर्पण की क्रियाएं इसी का एक प्रखर प्रमाण हैं। वर्ष में पितृपक्ष के पंद्रह दिन विशेष तौर से इसी के लिए नियत किये गये हैं, जिसकी मिसाल अन्य किसी देश-संस्कृति में...

वास्तुशास्त्र के जनक देवशिल्पी विश्वकर्मा

प्राचीनकाल में विश्वकर्मा नाम के एक मूर्धन्य वास्तुविद थे जिन्हें चिरपुरातन वास्तुशास्त्र का जनक माना जाता है। ऋग्वेद में इन्हें लोकमंगल की दृष्टि से सदैव वास्तु विद्या के अनुसंधानों में निरत रहने वाला आदि शिल्पी बताया गया है। ऋग्वेद के दशम मंडल के 81वें व 82वें सूक्त में दिव्य...

शुभत्व के पर्याय विघ्नहर्ता गणेश

गजानन गणेश भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। हिन्दू समाज का कोई भी कार्य गणपति को नमन के बिना शुरू नहीं किया जाता क्योंकि वे सुख-समृद्धि, वैभव एवं आनंद के अधिष्ठाता हैं। वे विघ्नहर्ता हैं। शुभत्व का पर्याय हैं। श्री विनायक की अनूठी काया में मानवीय प्रबंधन के ऐसे अनूठे...

आध्यात्मिकता के सर्वोच्च शिखर

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की अर्धरात्रि को कारागृह के भीतर विशिष्ट ग्रहीय दशाओं में शिशु रूप में जन्मे लीलाधर श्रीकृष्ण का समूचा जीवन एक युगांतकारी अवतरण माना जाता है। यदा-यदा हि धर्मस्य…संभवामि युगे-युगे का उद्घोष करने वाले युग नायक कृष्ण ने असुरत्व के विनाश और...