मनोज मोहन

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ग्रामीण बाबा: नागार्जुन कवि

‘नागार्जुन दिल्ली में’ संस्मरणों की एक दिलचस्प किताब है। जवाहरलाल नेहरू, विश्वविद्यालय के शोधार्थी जाहिदुल दीवान ने इसका संपादन किया है। इस पुस्तक की विशेषता यह है कि पूर्व प्रकाशित सामग्री से बचा गया है। बाबा नागार्जुन के दिल्ली से जुड़े टटके संस्मरणों को जुटाने के लिए जाहिदुल ने...

अनुभव के स्पंदन से रचे नोट्स

अरविंद दास एक संवेदनशील पत्रकार हैं। ‘बेखुदी में खोया शहर: एक पत्रकार के नोट्स’ उनकी पहली किताब है। इसे बेहद सुरुचि के साथ अनुज्ञा बुक्स ने प्रकाशित किया है। इस किताब में दर्ज हैं समाज, प्रकृति, लोकरंग, कला-साहित्य और यात्राओं आदि में जीवन के स्पंदन जिन्हें वे अपनी जीवन...

बदलते दौर में किताबों की उपस्थिति

कृष्णा सोबती के साक्षात्कारों के संग्रह 'लेखक का जनतंत्र' एक ऐसी ही किताब है। इसमें दर्ज संस्मरणों और विचारों को पढ़ते हुए पाठक इतिहास के प्रति सिर्फ सहृदय ही नहीं होता बल्कि वह भारतीय संस्कृति के घनत्व वजहों को भी समझ पाता है। इसी तरह समाजशास्त्री और पत्रकार रामशरण...