डायनासोर की प्रजाति कैसे खत्म हुई। कब हुई। यह अभी भी एक रहस्य है। इस पर नित नए शोध में नयी बातें सामने आती रहती हैं। इसी क्रम में एक अध्ययन में साइंस पत्रिका में प्रकाशित शोध में एक नया तथ्य सामने आया है। इसके मुताबिक दक्कन ट्रैप में ज्वालामुखी से लावा बहने की ज्यादा स्पष्ट तारीख हासिल हुई। इस शोध में पृथ्वी के इतिहास में भारी मात्रा में लावा बहने के कारणों पर प्रकाश पड़ा है। इससे यह आकलन किया गया कि लगभग 6.6 करोड़ वर्ष पहले जिस क्षुद्रग्रह के प्रभाव से पृथ्वी से डायनासोर की प्रजाति नष्ट हुई थी। संभव है कि क्षुद्रग्रह के टकराने से डैक्कन ट्रैप के सुप्त ज्वालामुखी जाग्रत हो गए और भारतीय उपमहाद्वीप में बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी फटना फिर से शुरू हो गया। अध्ययन अनुसार वर्षों की हलचल के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में लावा कम से कम 500 किलोमीटर की दूरी तक फैल था। जिससे दक्कन ट्रैप का निर्माण हुआ। कुछ जगहों पर इसकी मोटाई करीब दो किलोमीटर तक रही। और इस अप्रत्याशित घटना की वजह से पृथ्वी से डायनासोर की प्रजाति लुप्त हुई।

 

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