कहते हैं लगन हो तो कुछ भी असंभव नहीं है यह सिद्ध कर दिखाया दिल्ली के 17 वर्षीय माधव लवकरे ने। उनको भरोशा है कि जो काम बड़ी से बड़ी डिवाइस नहीं कर पायी वह काम उनका इनोवेशन करेगा। यह सब माधव ने किया अपने एक दोस्त के लिए जो सुन नहीं सकता है। उनका दोस्त न सुनने की समस्या के चलते स्कूल जाना छोड़ दिया। इस से आहत होकर माधव ने ट्रांसक्राइब नाम से एक स्मार्ट ग्लास बनाया। जो लोग सुन नहीं सकते हैं उनके लिए यह स्मार्ट ग्लास आवाज को टेक्स्ट के रूप में दिखाता है। ट्रांसक्राइब को साल 2018 में नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन द्वारा डॉ एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट अवॉर्ड मिला। फिलहाल अभी ट्रांसक्राइब का इस्तेमाल केवल पढ़े-लिखे लोग कर सकते हैं। ट्रांसक्राइब बनाने में लगभग 2500 रुपये का खर्च आया। माधव ने कहा कि इस डिवाइस से मुनाफा कमाना लक्ष्य नहीं है। यह डिवाइस सस्ते माइक्रोचिप के जरिए बनाई है। इसे यूजर के स्मार्टफोन के साथ ब्लूटूथ से जोड़ा जा सकता है। वहीं गूगल के एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस के जरिए यह 132 भाषाओं में आवाज को टेक्स्ट में बदलने की क्षमता रखती है। बदला हुआ डेटा ब्लूटूथ के जरिए ग्लास पर दिखता है। इस ट्रांसक्राइब को किसी भी चश्मे के फ्रेम के साथ अटैच किया जा सकता है।

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