स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में आपने भी शिक्षकों को यह कहते सुना होगा कि बेहतर परिणाम पाना चाहते हैं तो प्लान करके चलें। यही बात कॉरपोरेट जगत में बॉस और विशेषज्ञ भी कहते पाए जाते हैं। किसी खास समय जैसे कि परीक्षा के वक्त हर विद्यार्थी आम दिनों से कुछ ज्यादा प्लान करके चलताहै। बुद्धिमान और अच्छा रिजल्ट करने वाले तो सामान्य तौर पर बराबर ही प्लान करके चलते हैं। सच कहें तो प्लानिंग उनके दैनंदिन जिन्दगी का अभिन्न अंग हो जाता है; आदत का हिस्सा बन जाता है। वे इसके लिए हमेशा जागरूकरहते हैं। कल कौन-कौन से काम कब और कैसे करना है, उसे वे पहले से ही सूचीबद्धकर लेते हैं और कमोबेश उसी के अनुसार कार्य संपादित करते हैं। उन्हें आप कदाचित हीफायर फाइटिंग मोड में देखेंगे। जब कि प्लान करके नहीं चलने वालों को आप अधिकतरसमय फायर फाइटिंग मोड में ही पायेंगे अर्थातघर में आग लग जाने पर उसे बुझाने के लिए भागमभाग करना, हो-हल्ला मचाना, अस्त-व्यस्तरहना। ऐसे लोग कम सफल और कम उत्पादक तो होते ही हैं, अनावश्यक तनाव में भी रहते हैं।अन्तरिक्ष वैज्ञानिकों की प्लानिंग से बहुतकुछ सीखा जा सकता है। कैसे सब कुछनिर्धारित समय में पूरी सूक्ष्मता एवं गुणवत्ताके उच्चतम मानकों के साथ होता है।

बनाए गए प्लान को पहले दो-तीन दिन तक अमल में लाने के बाद आपकी शारीरिक घड़ी एवं मन-मानस इस प्लानसे एडजस्ट हो जाती है। फिर तो आगे उस प्लानके अमल से होने वाले फायदे आपको खुद पताचलने लगते हैं।

जिससे काउंट डाउन खत्म होते ही अन्तरिक्ष यान अपने गंतव्य की ओर चल पड़ता है। वास्तवमें, हर प्रोजेक्ट की प्लानिंग अपने आप में एकअनोखी एवं विचार समृद्ध प्रक्रिया होती है।बेंजामिन फ्रैंकलिन कहते हैं, ‘अगर आपप्लान करने में असफल रहते हैं तो आप वाकई असफल होने का प्लान कर रहे हैं।’ सपनों को साकार करने के लिए तथा अपने लक्ष्यों को हासिलकरने के लिए हमारे युवा जितनी मेहनत औरलगन से लगे रहते हैं, उन्हें फ्रैंकलिन की बात कीअहमियत अच्छी तरह समझने की आवश्यकताहै। हम यह सब जानते और मानते हैं कि जहांभी संसाधनों की किल्लत रहती है, चाहे वह समय, उर्जा, धन, अवसर, मशीन, श्रमिक आदिही क्यों न हो, वहां प्लान करके चलना निहायतजरूरी है। लेस्टर राबर्ट बिटल तो कहते हैं कि‘अच्छी योजना अच्छे निर्णय का द्योतक है जिससे सपनों को साकार करना आसान हो जाता है।’युवाओं के साथ-साथ यह बात नौकरी पेशा लोगों सहित उन सब पर लागू होती है, जो सहज और सुचारू ढंग से अपने दैनंदिन जीवनमें अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं। यहतब और अहम हो जाता है जब प्रतिस्पर्धा के इसयुग में युवाओं को कई बार मल्टी-टास्किंग सेरूबरू होना पड़ता है यानी एक साथ एकाधिककार्य करने का प्रेशर होता है।

तभी तो प्रसिद्धफुटबॉल कोच पॉल ब्रायंट कहते हैं, योजना बनायें, उसे ईमानदारी से अमल में लायें औरफिर देखें कि आप कितने सफल हो सकतेहैं। अधिकतर लोगों के पास कोई योजना नहींहोती। इसी कारण उन्हें हराना आसान होता है।तो प्रश्न यह है कि विद्यार्थी इम्तिहान के इसमौसम में कैसे प्लान करें कि वे अपेक्षा के अनुरूपपरीक्षा में परफॉर्म कर सकें? परीक्षा से पहले अबजितना दिन बचा है और किसी दो विषयों की परीक्षाके बीच जो अंतराल है, उस दौरान जितना घंटामिलता है, सबको जोड़ लें। अब उसमें से सोने केऔसतन 7-8 घंटे तथा अन्य दैनिक दिनचर्या केलिए 3-4 घंटे रोज के हिसाब से निकालने के बादजितने घंटे बचते हैं, उसे विषय विशेष की जरूरतके मुताबिक आवंटित कर उस प्लान पर अमलकरना शुरू करें। इस प्लान में कुछ घंटे खाली भी रखें यानी प्लान में थोड़ा लचीलापन रखें जिससेकि सभी विषयों पर यथोचित ध्यान दिया जा सके।ऐसे बनाए गए प्लान को पहले दो -तीन दिन तक अमल में लाने के बाद आपकी शारीरिक घड़ी एवंमन-मानस इस प्लान से एडजस्ट हो जाती है। फिरतो आगे उस प्लान के अमल से होनेवाले फायदेआपको खुद पता चलने लगते हैं और आपके उर्जा,उत्साह और उमंग में उछाल स्वत: आता रहता है।नि:संदेह, प्लान करके चलने की मानसिकता परीक्षा हॉल में भी आपको बहुत लाभ पहुंचाती है। लेखक- मोटिवेशनल स्पीकर, स्ट्रेस मैनेजमेंट कंसलटेंट हैं।

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