चुनाव डायरी में हम बिहार के लोकसभा क्षेत्रों के बारे में क्रमश: जान रहे हैं, इस बार जानते हैं महाराजगंज, गोपालगंज और सीवान के बारे में। यहां 12 मई को वोट डाले जायेंगे। यह देश में पहली बार हुआ कि सीतामढ़ी से वरुण कुमार को जेडीयू ने टिकट दिया, जिसे उन्होंने वापस कर दिया और जेडीयू ने भाजपा के एक नेता सुनील कुमार पिन्टू को जेडीयू की सदस्यता दिलाकर टिकट दिला दिया।

सैय्यद महमूद ने 1952 और 1957 का चुनाव लड़ा था। उन्हें नेहरू मंत्रिमंडल के विदेश मंत्रालय में उप-मंत्री बनाया गया था। आज लड़ते तो क्या वे सैय्यद शहाबुद्दीन से जीत पाते। यह प्रसिद्ध चुनाव क्षेत्र सीवान है, जहां से बाहुबली शहाबुद्दीन पर उनके आपराधिक कृत्यों के कारण प्रतिबंध है। 2009 से वह नहीं लड़ पा रहे हैं। सीवान का जीरादेई प्रथम राष्ट्रपति का जन्म स्थल भी है। और यहीं से 1996 से लेकर 2004 तक लगातार शहाबुद्दीन जीतते रहे। उसके पहले वह बिहार विधान सभा के लिए 1990 में निर्दल जीते थे। उनकी जीत का रहस्य यह था कि वह जमींदारों के पक्ष में माओवादियों को मारते थे। सीवान से निर्दलीय ओमप्रकाश 2009 में और 2014 में भी भाजपा के टिकट पर जीते। मगर इस चुनाव में उनका पत्ता कट चुका है।
यह क्षेत्र अब जदयू को मिल गया है। जदयू ने कविता सिंह को खड़ा किया है। वह विधायक भी हैं और एक बाहुबली अजय सिंह की पत्नी भी। शहाबुद्दीन की पत्नी हिना साहब 2009 से राजद से चुनाव लड़ रही हैं और इस लोकसभा में भी वहीं राजद की प्रत्याशी हैं। अब सीपीआई (माले) के अरविंद यादव भी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। इनके त्रिकोणीय संघर्ष में कौन जीतेगा, कहना मुश्किल है। गंगा के इस पार और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ तीन लोकसभा के चुनाव क्षेत्र हैं- महाराजगंज, गोपालगंज (सुरक्षित) और सीवान। अभी तो ये सभी क्षेत्र भाजपा के पास हैं। लेकिन सीटों के बंटवारे ने सीवान और गोपालगंज को जदयू के खाते में डाल दिया।
यहां 12 मई को वोट डाले जायेंगे। कभी गोपालगंज मुस्लिम बहुल था, 2009 से सुरक्षित सीट हो गयी है। दो बार जीतने वाले अब्दुल गफूर, राजीव गांधी लहर में 1984 के विजेता काली प्रसाद पांडे का क्षेत्र 2014 में भाजपा के जनक राम का हो गया। लेकिन 2009 में जदयू के पूर्णमासी राम यहां से जीते। उनमें इतना साहस था कि सामान्य क्षेत्र वाल्मिकीनगर से 2014 में चुनाव लड़े और दूसरे नंबर पर रहे। अभी गोपालगंज से जनक राम का पता कट चुका है। जदयू से डॉ. आलोक सुमन मैदान में हैं। महागठबंधन ने सुरेन्द्र राम को अपना उम्मीदवार बनाया। महाराजगंज बिहार की राजनीति में दोस्ती-दुश्मनी के अंतर को मिटाने वाला क्षेत्र है।
2009 में जब नीतीश कुमार का बोलबाला था, तो उनके दोस्त प्रभुनाथ िस् ा ं ह यहां से हार गए। जीतने वाले थे राजद के उमाशंकर सिंह, पर उनका निधन हो गया और हुआ उप चुनाव। अब तक प्रभुनाथ सिंह और नीतीश कुमार की दोस्ती खत्म हो चुकी थी। प्रभुनाथ सिंह की दोस्ती लालू प्रसाद से हो चुकी थी। इस उप चुनाव ने भी भाजपा से दोस्ती खत्म करने का रास्ता नीतीश कुमार के लिए बनाया। यहां से उन्होंने अपने एक मंत्री प्रशांत कुमार शाही (भूमिहार) को खड़ा किया, जो प्रभुनाथ सिंह से हार गए। नीतीश कुमार के प्रभामंडल और बूथों के आंकड़ों ने समझाया कि उन्हें भाजपा समर्थकों का वोट नहीं मिला है। उसके बाद ही नीतीश कुमार ने कुछ महीनों के बाद भाजपा का साथ छोड़ दिया। अभी भाजपा के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल यहां से सांसद हैं। उनका मुकाबला रणधीर सिंह से होगा।

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