प्रयागराज कुम्भ से पहले वैचारिक कुम्भ के आयोजन की कड़ी में राजधानी लखनऊ ‘युवा कुम्भ’ की साक्षी बनी। 22-23 दिसबंर को देश के कोने-कोने से लगभग पांच हजार युवाओं की मौजूदगी ने इसे बेहद खास बनाया।

प्रयागराज कुम्भ से पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में युवा कुम्भ का आयोजन बहुत से राजनीतिक संदेश देने वाला रहा। इस आयोजन में युवाओं की बड़ी तादात में उपस्थिति ने इसे काफी खास बना दिया।

विभिन्न क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियों और वक्ताओं ने अपने सम्बोधन में युवा शक्ति को राष्ट्र शक्ति करार देते हुए दिशा प्रदान की। युवाओं को जहां राष्ट्र के नव निर्माण और विकास के लिए आगे आने का आह्वान किया गया, वहीं उन्हें उनकी ताकत का बोध कराते हुए नसीहत दी गई कि युवा शक्ति के बल पर ही देश एक बार फिर दुनिया का सिरमौर बन सकता है। युवा कंधों पर उभरते भारत की जिम्मेदारी रखी गई। एक तरह से युवा कुम्भ के इस वैचारिक मंथन से मिला ‘अमृत कलश’ राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि राम मन्दिर तो अवश्य बनेगा लेकिन राष्ट्र मन्दिर बनाना भी जरूरी है। उन्होंने युवाओं की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मन्दिर की मांग बिलकुल जायज है। इसका शीघ्र निर्माण होना चाहिए और युवाओं के हाथ से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही भारत के लिए दुनिया में एक श्रेष्ठ और सम्मानित स्थान बनाना होगा। दुनिया को नेतृत्व देने का काम भारत को ही करना पड़ेगा, कोई और देश नहीं कर सकता। युवाओं को चौकन्ना रहकर देश की आंतरिक सुरक्षा का दायित्व निभाना होगा। गांव, गरीब तक मदद पहुंचाना सही मायनों में विकास है।

हिन्दू की वजह से धर्मनिरपेक्ष

सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि देश संविधान के कारण नहीं, बल्कि हिन्दू की वजह से धर्म निरपेक्ष है। संविधान कहता है कि हम धर्म निरपेक्ष हैं, लेकिन हम कहते हैं कि देश हजारों वर्षों से धर्म निरपेक्ष है। सेक्युलरिज्म की परिभाषा हमें सविधान से नहीं मिली। हजारों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों ने अपने अध्यात्म के भाव के कारण दुनिया के प्रत्येक संप्रदाय व मत को सम्मान के भाव के साथ देखा। यह हमारे आध्यत्मिक भाव की पहचान है। इस अवसर पर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भव्य राम मन्दिर बनने को दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती है। यह हमारी प्रतिबद्धता है और इस पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा की प्रयाग में होने वाले कुम्भ के लिए किसी को अधिसूचना जारी करने की जरूरत नहीं पड़ती। बिना प्रचार के विश्व से करोड़ों की संख्या में उमड़ पड़ती है। तो डुबकी लगाने नहीं आते, बल्कि देश-विदेश के कोने-कोने से आए साधु संत, विद्वान, शोधकर्ता, चिंतन और मनन के बाद दुनिया को विचार देते हैं।

सियासत के समीकरण साधने की पहल

भले ही युवा कुम्भ कोई राजनीतिक आयोजन न होकर वैचारिक कुम्भ की कड़ी का एक हिस्सा रहा हो, लेकिन जिस तरह से इसमें देश भर से युवाओं को जुटाया गया और राष्ट्र निर्माण से लेकर मन्दिर मुद्दे पर खुलकर वक्ताओं ने अपनी बात रखी, उससे ये माना जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल और उसके समर्थक युवाओं की ताकत के बल पर एक बार फिर विरोधियों को जवाब देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले इन युवाओं के जरिए देश भर में अपने पक्ष में माहौल बनाया जाएगा। इसमें हिन्दुत्व से लेकर विकास, विजन और युवाओं की आने वाले आन्दोलन में स्पष्ट भागीदारी के संकेत मिले हैं। मन्दिर मुद्दे को जहां इससे पहले अयोध्या में विहिप की धर्मसभा के दौरान आने वाली पीढ़ी को सौंपने की बात उठी थी, वहीं इस तरह के आयोजन के जरिए उन्हें तैयार भी किया जा रहा है। दरअसल युवाओं की न सिर्फ विकास के नजरिए से बेहद अहम भूमिका है, बल्कि वोटों के गणित के लिहाज से भी वे बड़ी ताकत हैं। इसलिए वह चुनाव में एक बार फिर सत्तारूढ़ दल के लिए संजीवनी बन सकते हैं।

मन्दिर हम ही बनवाएंगे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आते ही ‘योगी-योगी’ के साथ ‘जो मन्दिर बनवाएगा-वोट उसी को जाएगा’ नारा गूंज उठा। इस पर युवाओं का जोश देख योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नारों में उलझने की आवश्यकता नहीं है। अयोध्या में जब भी मन्दिर बनेगा, तो हम ही बनवाएंगे। राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो राम-कृष्ण को मिथक मानते थे, वह अब जनेऊ पहनकर और गोत्र बताकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्रमाता के खिलाफ षड्यंत्र करने वालों को चिन्हित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने दुष्प्रचार किया कि आर्य भारत के नहीं, बल्कि आक्रांता हैं, वही लोग कुम्भ को पर्यावरण, युवा और महिला विरोधी कहते हैं। केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कुछ लोग देश की राजधानी में भारत के टुकड़े होने का नारा देते हैं। युवा कुम्भ उन्हें संकेत देने के लिए पर्याप्त है कि युवा पीढ़ी देश को हमेशा एक ध्वज के नीचे सुरक्षित रखने के लिए संकल्पित है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर ने कहा कि आजादी के बाद से युवाओं को इतिहास के काफी बड़े हिस्से से अनभिज्ञ रखा गया। हमें ऐसी कोर्ट नहीं चाहिए, जो आधी रात को आतंकवादियों के लिए खुलती हो। देश में कई अच्छे लोग भी हैं, उनको बढ़ावा देना चाहिए।

दिखेगा ऐतिहासिक परिवर्तन

राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि इस बार कुम्भ इलाहाबाद में नहीं, प्रयागराज में होगा। प्रयागराज की पुन:स्थापना की भावना में कुम्भ का विचार करना चाहिए। 2025 में सारी दुनिया में सबसे ज्यादा युवा भारत में होंगे और दुनिया को नई दिशा दिखाएंगे। दुनिया भारत की शक्ति समझने लगी है। प्रयागराज में जो कुम्भ होता है वह एक धरोहर है और इसमें परिवर्तन दिखेगा। उन्होंने कहा कि धारणा थी कि मरते समय भी मुंह में गंगा की दो बूंद डाल दो तो मुक्ति मिलेगी। आज जिंदा आदमी भी गंगा की एक बूंद नहीं पी सकता, लेकिन अब कुंभ में परिवर्तन देखने को मिलेगा।

युवा कुम्भ :सार्थक पहल

अन्तरराष्ट्रीय पहलवान व ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार ने कहा कि मैं युवाओं को ब्रांड अम्बेसडर मानता हूं। अन्तरराष्ट्रीय बॉक्सर विजेंदर ने कहा कि युवा कुम्भ बहुत ही अच्छी सोच है। हम भारत को कैसे अच्छा भारत बनाएं, यह एक अच्छी पहल है। फिल्म निर्माता व निर्देशक मधुर भंडारकर ने कहा कि मेरी फिल्म समाज की आईना होती युवा कुम्भ- नजरिया नए भारत का एक सार्थक पहल है। अपनी संस्कृति व परम्परा को साथ लेकर चलना चाहिए। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि रामलला का भव्य मन्दिर उनकी जन्मभूमि अयोध्या में जरूर बनेगा। बाबर के नाम की एक भी ईंट अयोध्या में नहीं लगने दी जाएगी। हम ही कारसेवक हैं। जब तक भगवान राम के मंदिर के शिखर का कलश नहीं स्थापित जो जाता, तबतक कोई भी रामभक्त सो नहीं सकता। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि देश की दशा-दिशा बदलने में युवा ही सक्षम है। भारत की प्राचीन परंपरा व विरासत के चलते ही यह देश विश्वगुरु बना था। भारत में तक्षशिला और नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना तब हुई थी, जब कोई धर्म जन्मे भी नहीं थे। उन्होंने युवाओं से तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने व नकारात्मक उपयोग से बचने की भी अपील की।

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