रेन्द्र मोदी सरकार में कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने साल 2019-20 के अंतरिम बजट प्रस्तावों से मिडिल क्लास, किसान, सेना, रेलवे और अन्य सभी संभव क्षेत्रों के लिए दिल खोलकर आवंटन किया है। इस तरह से उन्होंने सबको खुश कर कर दिया है। अगर बात मिडिल क्लास के लिए टैक्स स्लैब की करें तो अब 5 लाख रुपये तक की आय पर किसी तरह का आयकर नहीं लगेगा। यह सीमा पहले 2.5 लाख रुपये तक की थी। इस तरह देश के करोड़ों नौकरी पेशा लोगों को एक बड़ी राहत मिली है। दरअसल, मिडिल क्लास कहीं न कहीं ये मानने लगा था किसरकारें उनसे टैक्स तो कसकर लेती हैं, पर उन्हें राहत कभी नहीं देतीं। अब कम से कम इस वर्ग को शिकायत करने का कोई मौका नहीं रहा है। अब सालाना 5 लाख तक की व्यक्तिगत आय वालों को इनकम टैक्स से मुक्त कर दिया गया है। मतलब जिसकी सालाना आय 5 लाख से कम है उसे कोई भी टैक्स देना नहीं पड़ेगा। बेशक, हमारे देश के एक बहुत बड़े नौकरी पेशा वर्ग को इस कदम से राहत मिलेगी।

अंतरिम बजट प्रस्तावों में सरकार ने हर वर्ग का ध्यान रखा है। नौकरी पेशा मध्यम वर्ग को राहत देने के साथ ही छोटे किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव कर देश के बड़े वर्गका दिल जीतने की कोशिश की है। इसके साथ ही अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव भी राहत देने वाला है।

भारत की आत्मा तो गांवों में बसती है। किसानों के हितों का ख्यालरखे बिना देश आगे बढ़ ही नहीं सकता है। इस सोच की अभिव्यक्तिहोती है इस बजट में। सरकार ने किसानों के लिए बजट में कई बड़े फैसले लिए हैं, जिससे 12 करोड़ किसान परिवारों को फायदा होगा। अंतरिम बजट में प्रधानमंत्री किसान योजना शुरू करने की घोषणा की गई है, जिसके तहत 2 हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसानोंको सालाना 6000 रुपये मिलेंगे। ये राशि सीधे किसानों के खाते मेंआएगी। इस योजना पर सालाना 75हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा,जिसका पूरा पैसा केंद्र सरकार देगी। येएक इस तरह का फैसला है, जिससे विदर्भ से लेकर पंजाब और देश केसभी भागों के किसान खुश होंगे।पिछले काफी समय से श्रमिकों केहितों को सही से देखा नहीं जा रहाथा। इस बार देश के करोड़ों श्रमिकोंके चेहरे पर भी मुस्कान ला दी गई है।अंतरिम बजट में श्रमिकों का बोनस बढ़ाकर 7 हजार रुपये और 21 हजाररुपये तक के वेतन वालों को बोनस दिए जाने की घोषणा की गई है। इससे10 करोड़ श्रमिकों को लाभ मिलेगा। जैसी की उम्मीद थी, बजट मेंदेश के रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं पर पूरा ध्यान दिया गया है। सरकार ने बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 3 लाखकरोड़ रुपये के बजट का आवंटनकिया है। बेशक, भारत को अपनेदो धूर्त पड़ोसी देशों से अपनी रक्षा करनी होती है। इसके लिए आवश्यकहै कि हम अपने रक्षा क्षेत्र पर लगातारफोकस करें। वित्त मंत्री ने बताया कि वन रैंक, वन पेंशन के तहत सरकारने रिटायर्ड सैनिकों को 35 हजार करोड़ रुपये दिए हैं। सबको पता है कि सैनिकों की यह बहुत पुरानी मांग थी। पिछले बजट में रक्षाक्षेत्र के लिए 2,95,511 करोड़ रुपये रखे गए थे । यानी इस बारके बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए कुछ इजाफा किया गया है। भलेही हम अपने रक्षा बजट को बढ़ा रहे हों, पर चीन के मुकाबले हमारा रक्षा बजट तीन गुना कम है। अमेरिका अपनी जीडीपी का 4 फीसदी, रूस 4.5, इजराइल 5.2, चीन 2.5 और पाकिस्तान 3.5फीसदी रक्षा बजट के लिए आवंटित करता है। पाकिस्तान के साल 2018-19 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 9.6 अरब डॉलर रखेगए थे। जाहिर है, इतने भारी-भरकम धन का इस्तेमाल मुख्य रूप से हथियारों की खरीद पर होगा। यदि इसे पिछले साल के घोषित बजट से तुलना की जाए तो यह बढ़त करीब 20 फीसदी अधिक बैठती है। पाकिस्तान को हमेशा भारत से बराबरी करने का रोग लग चुका है।वो भारत से क्षेत्रफल, आबादी और अर्थव्यवस्था के स्तर पर मीलों-दशकों पीछे है। पर वो भारत से मुकाबला करने के फेर में अपनी जनताके साथ अन्याय करता है। भारत को अपना रक्षा बजट इसलिए बढ़ानापड़ता है, क्योंकि हमें भीमकाय चीन की सेना से भी खतरा है। ये बातपाकिस्तानी सरकार को समझ नहीं आती है। दरअसल पाकिस्तान मेंचुनी सरकारें भी सेना के इशारों पर चलती हैं। वहां सरकारों की कोई हैसियत नहीं है। पाकिस्तान में सेना का वर्चस्व हर जगह दिखता है। इस बीच, ये अच्छी बात है कि अंतरिम बजट में भारतीय रेलवे को सम्मानजनक 1.58 लाख करोड़ का बजट दिया गया है। बता दें,2018-19 में रेलवे को 1.48 लाख करोड़ और उससे पहले 2017-18में 1.31 लाख करोड़ आवंटित कियागया था। सरकार को रेलवे के चारप्रमुख क्षेत्रों-यात्री सुरक्षा, पूंजीगतएवं विकास कार्यों, स्वच्छता और वित्त एवं लेखांकन संबंधी सुधारों पर निरंतर ध्यान देते रहना होगा। इसके साथ ही सरकार रेल पटरियों का तेजी से विस्तार कर रही है। इस लिहाज से दो स्तरों पर काम होना चाहिए। पहला, उन जगहों में रेल लाइनें बिछाई जाएं, जहां पर रेलवे ने अबतक दस्तक ही नहीं दी है। दूसरा, अबदेश के रेल नेटवर्क को आपको दो की बजाय तीन-चार पटरियों पर दौड़ाना होगा। तब ही देश का रेल यातायात सुगम होगा और हादसे कम हो सकेंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार पूर्वोत्तर के राज्यों में रेलवे नेटवर्क का विस्तार करेगी, ये जरूरी है। कौन नही चाहता कि उसकी अपनी छत हो। इसी विचार कोध्यान में रखते हुए अंतरिम बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा दियागया है। देश में सस्ते घर बनाने कीतरफ ठोस ध्यान होना चाहिए। अभी तक इस लिहाज से बड़ी-बड़ी बातें ही होती रही हैं। फिलहाल तो किसी नौकरीपेशा इंसान के लिएकिसी मेट्रो या टियर टू या थ्री शहर में घर बना पाना नामुकिन है।सरकार को बजट से हटकर भी ‘अफोर्डेबल हाउसिंग’ के लिए हरसंभव प्रयास करने होंगे। इस लिहाज से सरकार पर्याप्त जमीन उपलब्ध करवाए। अगर बिल्डरों को सस्ती जमीन उपलब्ध करवा दीजाए तो वे फिर मंहगे घर नहीं बेच सकेंगे। उनके काम काज पर नजर भी रखी जाए। अभी तो उन्होंने अपने लालच के कारण रियल एस्टेट सेक्टर को तबाह करके रख दिया है। हालांकि दोषियों पर चाबुक भी चलनी शुरू हो गई है। खैर, कोई भी इस अंतरिम बजट से संतुष्ट हुए बिना नहीं रह सकता। ये सबको प्रसन्न करता है।

(लेखक राज्यसभा सदस्य एवं बहुभाषी न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार के अध्यक्ष हैं)

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श्री सिन्हा ने अपने कैरियर की शुरुआत पत्रकार के रूप में की। खोजी पत्रकार की उन्हें ख्याती मिली। इन दिनों वे राज्यसभा सांसद एवं हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषीय न्यूज एजेंसी के अध्यक्ष हैं। सिक्योरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विसेज के संस्थापक होने के साथ-साथ वे अनेक सामाजिक और कल्याणकारी संस्थाओं के भी अध्यक्ष हैं।

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