जैसी अपेक्षा की जा रही थी, अंतरिम बजट काफी हद तक वैसा ही रहा। केंद्र की मोदी सरकार ने अपने अंतरिम बजट में जिस संतुलन का परिचय दिया है, उसे सराहनीय कहा जाना चाहिए। समाज के हर वर्ग को केंद्र से राहत के अपेक्षा थी। पड़ोसी चुनौतियों के कारण रक्षा क्षेत्र में भी आवंटन बढ़ाने का दबाव लगातार बना हुआ था। वहीं राजकोषीय घाटे को लक्ष्य तक सीमित रखने का दबाव भी सरकार पर था। ऐसे में सरकार ने लोगों की अपेक्षाओं और अर्थव्यवस्था की सेहत दोनों के बीच संतुलन साधने में निश्चित रूप से सफलता पाई है। यह बजट राजकोष की सेहत को नुकसान पहुंचाए बिना हर वर्ग को राहत पहुंचाने वाला है। इसीलिए इसकी मुक्त-कंठ से सराहना की जा सकती है। बजट में नौकरीपेशा लोगों, करदाताओं, किसानों, मजदूरों तथा लगातार मंदी का दबाव झेल रहे रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत दी गयी है।

आमलोगों के लिए क्या

  •  5 लाख तक की सालाना आय पर कोई आयकर नहीं
  •  स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार की गयी
  •  टैक्स फ्री गे्रच्युटी की सीमा दोगुनी होकर 20 लाख हुई
  •  पीएफ सदस्यों की मृत्यु पर 6 लाख का मुआवजा मिलेगा
  •  21 हजार तक की आय वालों को 7 हजार का बोनस मिलेगा
  •  फिक्स डिपॉजिट के ब्याज पर 40 हजार रुपये की राशि पर कोई कर नहीं
  •  अगले पांच सालों में एक लाख से ज्यादा डिजिटल गांव बनाने का लक्ष्य
  •  सौभाग्य योजना में मार्च की समाप्ति तक सभी घरों को बिजली का कनेक्शन
  •  एससी-एसटी वर्ग के लिए बजट आवंटन में 35 फीसदी की बढ़ोतरी

महिलाओं के लिए क्या खास

  • उज्जवला योजना में दो करोड़ मुत गैस कनेक्शन और दिए जाएंगे।
  • बजट में महिलाओं के लिए 26 सप्ताह के मातृत्व अवकाश की शुरूआत की गयी।
  • आंगनबाड़ी और आशा योजना के मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
  • महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए 1,330 करोड़ का आवंटन।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बजट में 20 फीसदी की बढ़ोतरी।

सबसे पहले बात किसानों की करें, तो लगातार बदहाली का सामना कर रहे छोटे और सीमांत किसानों को इस बजट में बड़ी राहत दी गयी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से किसानों को हर साल अकाउंट में 6,000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। ठीक है कि इससे सरकार पर सालाना 75,000 करोड़ रुपये का भार आएगा, लेकिन इससे किसानों की स्थिति में सुधार होने की संभावना बनेगी। इसी तरह पशुपालकों और मछुआरों को किसान का दर्जा देकर सरकार ने इस वर्ग को भी किसानों को मिलने वाली तमाम सुविधाओं का लाभ उपलब्ध करा दिया है। बजट में एससी-एसटी वर्ग का भी विशेष ध्यान रखा गया है, जबकि खरीद नियमों में बदलाव कर पूरी तरह से मंदी की चपेट में आ चुके हाउसिंग सेक्टर में भी जान फूंकने की कोशिश की गयी है। ऐसा होने से घर बनाने वाली कंपनियों के साथ ही खरीदारों को भी राहत मिल सकेगी। पहली बार बजट में देसी गायों के संरक्षण के लिए कामधेनु आयोग बनाने की घोषणा की गयी है। यह गोवंश के विकास सहित उनके खिलाफ होने वाली क्रूरता के खिलाफ काम करने वाला एक स्वतंत्र निकाय होगा। टैक्स रिबेट की सौगात आयकरदाताओं को काफी राहत पहुंचाने वाली है। बड़ी बात तो यह है कि बजट में राजकोषीय अनुशासन का कड़ाई के साथ ध्यान रखा गया है। यही वजह है कि पीएम किसान योजना के लिए 75,000 करोड़ की भारी- भरकम धनराशि का प्रावधान होने के बावजूद राजकोषीय घाटा का लक्ष्य 3.3 फीसदी से बढ़कर 3.4 फीसदी हुआ है। बजट में साल 2030 तक स्वस्थ भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस इरादे से स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट आवंटन में 16 फीसदी की बढ़ोतरी की गयी है।

पेंशन योजना के प्रस्ताव

  • सरकारी कर्मचारियों के लिए सरल की जाएगी पेंशन योजना
  • रिक्शा चालकों और कचरा चुनने वालों को पेंशन योजना का लाभ मिलेगा
  • 15 हजार से कम वेतन पर एक हजार की पेंशन फिक्स की गयी
  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए 3 हजार रुपये मासिक पेंशन
  • 500 करोड़ के प्रावधान से प्रधानमंत्री मानधन पेंशन योजना

किसानों के लिए खास बजट

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत छोटे किसानों को दो हजार की तीन किस्तों में सालाना छह हजार की मदद
  • योजना से देश के 12 करोड़ किसानों को मिलेगी आर्थिक सहायता
  •  गाय के लिए कामधेनु योजना के तहत 750 करोड़ रुपये का आवंटन
  • पशुपालक किसानों को कर्ज पर ब्याज में दो फीसदी की छूट
  • बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और पॉल्ट्री जैसे उद्यमों को भी कृषि क्षेत्र की सुविधा

जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 31,745 करोड़ रुपये का भारी-भरकम आवंटन किया गया है। खेलों को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने खजाने का मुंह खोला है और खेल और युवा कार्य मंत्रालय के लिए बजटीय आवंटन में संशोधित अनुमान की तुलना में 10 फीसदी से कुछ अधिक की बढ़ोतरी की है। बजट आवंटन में एससीएसटी वर्ग के लिए 35 फीसदी की बढ़ोतरी की गयी है। इसके तहत अनुसूचित जाति के लिए कुल 76,801 करोड़ रुपये तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50,086 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना तैयार की गयी है। इसके साथ ही लाखों घुमंतू परिवारों और खानाबदोश जीवन बिताने वालों के लिए भी सरकार ने एक कल्याण बोर्ड के गठन की घोषणा की है। यह बोर्ड घुमंतू और खानाबदोशों के कल्याण की योजना बनाएगा और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगा। पूर्वोत्तर भारत की बात की जाए तो क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार ने बजट आवंटन में 21 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के साथ ही सरकार ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि वह पूर्वोत्तर में विकास के लिए प्रतिबद्ध है। महिलाओं की बात की जाए तो महिला सशक्तीकरण तथा महिला सुरक्षा के लिए केंद्र ने 1,330 करोड़ का बजट आवंटित करके अपनी प्रतिबद्धता जताई है। महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बजट में 4,856 करोड़ की बढ़ोतरी का प्रस्ताव सरकार की वचनबद्धता को दशार्ता है।

इसी तरह प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का बजट दोगुना से ज्यादा बढ़ाकर 2,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। रेलवे के लिए भी केंद्र सरकार ने 11 हजार करोड़ रुपये का बजटीय समर्थन बढ़ाया है। बजट के अतिरिक्त प्रावधान से आॅटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम की शुरूआत की जाएगी। साथ ही 44 हजार किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण का काम पूरा किया जाएगा। बजट समर्थन बढ़ने से डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और बुलेट ट्रेन के काम में भी तुलनात्मक रूप से तेजी आ सकेगी। दूसरी ओर स्वदेश में डिजाइन की गयी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस सरीखी मेक इन इंडिया मुहिम के तहत बनायी गयी ट्रेनों की योजनाओं को भी बढ़ावा मिल सकेगा। सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए अभी तक की सबसे बड़ी घोषणा की है। इस मद में 3 लाख करोड़ से अधिक का बजटीय प्रावधान किया गया है। बजट पेश करते समय खुद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्वीकार किया कि देश के सैनिक कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की सुरक्षा करते हैं। इसलिए सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाए जाना आवश्यक है। उन्होंने अभी तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट प्रस्तुत करते हुए भविष्य में जरुरत के मुताबिक और फंड मुहैया कराने की बात भी कही। सरकार ने इस बजट में सूचना प्रौद्योगिकी पर भी विशेष ध्यान दिया है। इसके तहत एक लाख गांवों को डिजिटल गांव में तब्दील किया जाएगा, जिससे देश के सभी लोगों तक नई पीढ़ी की सूचना प्रौद्योगिकी के फायदे पहुंचाए जा सकें।

इसके साथ ही जल्द ही एक राष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र की स्थापना भी की जाएगी। निश्चित रूप से इस बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। लेकिन, सरकार के लिए राजकोषीय घाटा पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। बजट में निर्धारित 3.3 फीसदी के तुलना में यद्यपि 3.4 फीसदी राजकोषीय घाटा को ज्यादा नहीं कहा जा सकता है, लेकिन खर्च के मोर्चे पर उसकी गुणवत्ता पर ध्यान रखा जाना आवश्यक है। अन्यथा राजकोषीय घाटा लक्ष्य से काफी आगे निकल जाएगा। सरकार ने जो बजट प्रस्ताव रखे हैं, उससे इसी बात का आभास मिलता है कि वह राजकोषीय घाटे को 3.4 फीसदी तक आसानी से नियंत्रित रख सकेगी। यही बजट की सबसे अहम बात है।

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रांची विश्वविद्यालय से स्नातक। वर्ष 1988 में रांची में ही फील्ड रिपोर्टर के रूप में रांची एक्सप्रेस से जुड़े। उसके बाद साप्ताहिक रविवार, प्रभात खबर, सेंटिनल, पांचजन्य, राजस्थान पत्रिका, टेलीग्राफ, इकोनॉमिक्स टाइम्स, अमर उजाला, बीएजी फिल्म्स, न्यूज 24, इंडिया टीवी, जी न्यूज जैसी संस्थाओं के लिए उप संपादक से लेकर विशेष संवाददाता, सहायक फीचर एडिटर, समन्वय संपादक, एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। टीवी की दुनिया में ‘पोलखोल’ और ‘सनसनी’ जैसे कार्यक्रमों का भी प्रोडक्शन किया है।

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