अमेरिका ने भारत से ड्यूटी-फ्री आयात को खत्म करने का निर्णय लिया है। इसके बावजूद भारत निश्चिंत है। भारत का कहना है कि उसके कुल निर्यात में ड्यूटी-फ्री निर्यात की हिस्सेदारी महज 1.9 फीसदी है। इसकी भरपाई मित्र देशों को निर्यात बढ़ाकर आसानी से की जा सकती है।

अं तरराष्ट्रीय स्तर पर जब ट्रेड-वॉर की बात की जाती है, तो अमेरिका और चीन की खींच-तान की ओर ही ध्यान जाता है। लेकिन, अब अमेरिका ने एक कदम आगे बढ़ते हुए भारत को निशाना बनाने की शुरूआत कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका लंबे समय से भारत और टर्की को जनरलाइज्ड सिस्टम आॅफ प्रेफरेंस (जीएसपी) के तहत ड्यूटी-फ्री वस्तुओं के निर्यात का मौका देता रहा है, लेकिन इन देशों में अमेरिकी उत्पादों पर भारी-भरकम ड्यूटी लगती है। इसकी वजह से अमेरिका को हर साल व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है। सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि जनरलाइज्ड सिस्टम आॅफ प्रेफरेंस (जीएसपी) क्या है। अमेरिका ने कुछ विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए इस कार्यक्रम की शुरूआत की थी।

इसके तहत अमेरिका इन देशों से आयात होने वाले सामान पर कोई कर नहीं लगाता है। जीएसपी के तहत फिलहाल हर साल 1784 भारतीय उत्पादों को अमेरिका निर्यात करने की अनुमति मिली हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में भारत ने अमेरिका को 39,645 करोड़ रुपए का उत्पाद जीएसपी के तहत निर्यात किया था। ड्यूटी फ्री होने के कारण इन उत्पादों के निर्यात पर भारत को कुल 1345 करोड़ रुपए की छूट मिली थी। अमेरिका को जीएसपी के तहत होने वाले निर्यात से दुनिया भर में सबसे अधिक फायदा भारत को ही होता है, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में और किसी देश से अमेरिका ड्यूटी फ्री आयात नहीं करता है। अभी अमेरिका ने भारत से जीएसपी की सुविधा वापस लेने का ऐलान किया है, तो इससे देश के फार्मा सेक्टर और टैक्सटाइल सेक्टर के साथ ही मोटर व्हीकल पार्ट, मेटल, ज्वेलरी, हैंडीक्राट, मरीन, केबल और वायर जैसे उत्पादों के अमेरिकी निर्यात पर असर पड़ सकता है।

ये सारे उत्पाद भारत जीएसपी के तहत अमेरिकी बाजार में भेजता है और वहां के बाजार में इन उत्पादों की काफी मांग भी है। परंतु जीएसपी की सुविधा छिनने और ड्यूटी का बोझ लदने के बाद ये भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे जिससे वहां इनकी खपत घट जाएगी। हालांकि भारत का दावा है कि जीएसपी की सुविधा छिनने से भी उसको विशेष नुकसान नहीं होगा, वाणिज्य सचिव अनूप वधावन के मुताबिक भारत के कुल निर्यात में जीएसपी के तहत होने वाले निर्यात की हिस्सेदारी महज 1.9 फीसदी है। वैसे भी, पिछले दो वर्षों के दौरान भारत सरकार ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के सदस्य देशों और आसियान देशों के बीच परस्पर व्यापार को बढ़ाने पर अधिक जोर दिया है। ऐसे में अगर जीएसपी की सुविधा छीने जाने की वजह से भारत को कोई नुकसान होता भी है, तो उसकी भरपाई आरसीईपी और आसियान के सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाकर की जा सकती है। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वहां की व्यापारिक कंपनियों के दबाव में आकर भारत को जीएसपी का झटका दिया है।

कुछ समय पहले ही ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भारत सरकार ने नियमों को सख्त किया है। इससे वॉलमार्ट और अमेजॉन जैसी कंपनियों के लिए भारत में अपने काम का प्रसार करने में कठिनाई हो रही है। इसी तरह अमेरिका में डेयरी उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने भी शिकायत की थी कि भारत में उनके उत्पादों को वरीयता नहीं दी जा रही है। इसके अलावा भारत में जीवन-रक्षक दवाओं और चिकित्सीय उपकरणों के मूल्य को नियंत्रित करने की पिछले चार सालों में चली मुहिम से भी अमेरिकी कंपनियों को नुकसान का सामना करना पड़ा है।

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रांची विश्वविद्यालय से स्नातक। वर्ष 1988 में रांची में ही फील्ड रिपोर्टर के रूप में रांची एक्सप्रेस से जुड़े। उसके बाद साप्ताहिक रविवार, प्रभात खबर, सेंटिनल, पांचजन्य, राजस्थान पत्रिका, टेलीग्राफ, इकोनॉमिक्स टाइम्स, अमर उजाला, बीएजी फिल्म्स, न्यूज 24, इंडिया टीवी, जी न्यूज जैसी संस्थाओं के लिए उप संपादक से लेकर विशेष संवाददाता, सहायक फीचर एडिटर, समन्वय संपादक, एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। टीवी की दुनिया में ‘पोलखोल’ और ‘सनसनी’ जैसे कार्यक्रमों का भी प्रोडक्शन किया है।

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